शहीदों को नम आँखों ने दी विदाई

By Staff
मुंबई में चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए अधिकारी हेमंत करकरे, एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन और गजेंद्र सिंह को नम आंखों ने विदाई दी.
सैन्यकर्मियों ने राष्ट्र गान, मातमी धुन और हवा में गोलियां दागकर इन सुरक्षा अधिकारियों को सलामी दी.

शव यात्रा के दौरान सड़क के दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में लोग इन अधिकारियों को विदाई देने के लिए कतारबद्ध थे.

अदम्य साहस

26 नवंबर की रात को चरमपंथियों ने मुंबई में कई स्थानों पर हमला किया था. ताज होटल, नरीमन हाउस और होटल ऑबराय में चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच ढाई दिन तक मुठभेड़ें हुईं. चरमपंथी हमले में 170 से अधिक लोग मारे गए और 370 से अधिक घायल हुए. चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ में 14 सुरक्षाबल भी मारे गए.

मुंबई में हेमंत करकरे को पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई. श्रद्धांजलि देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल, छगन भुजबल और हर्षवर्धन पाटिल के अलावा मुंबई के पुलिस कमिश्नर हसन गफ़ूर, राकेश मारिया और केएल प्रसाद भी शामिल थे.

बुधवार की रात चरमपंथी हमले में कामा अस्पताल के पास करकरे, एडिशनल पुलिस कमिश्नर अशोक काम्ते और इंस्पेक्टर विजय सालस्कर चरमपंथियों की गोलियों का निशाना बने थे.

कमांडो गजेंद्र सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की 51वीं स्पेशल टास्क फोर्स के सदस्य थे. वर्ष 1982 के बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी 58 वर्षीय करकरे मालेगांव विस्फोट की जाँच के सिलसिले में पिछले दिनों सुर्खियों में आए थे.

मालेगांव विस्फोट की जाँच के दौरान साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत 10 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. करकरे सात साल तक भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ में रहे थे और इसी साल जनवरी में उन्हें एटीएस का प्रमुख नियुक्त किया गया था.

मेजर उन्नीकृष्णन

बंगलौर में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. शुक्रवार रात और शनिवार तड़के होटल ताज में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में 31 वर्षीय मेजर उन्नीकृष्णन मारे गए थे. वे पिछले दो साल से ब्लैक कैट कमांडो फोर्स में थे.

बिहार रेजीमेंट के अधिकारी मेजर उन्नीकृष्णन ने जून 1999 में भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया था और जनवरी 2007 में वे प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में आए थे.

मेजर उन्नीकृष्णन का तिरंगे में लिपटा शव बंगलौर के बाहरी इलाके में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो परिसर में लाया गया. मेजर उन्नीकृष्णन के पिता इसरो में कार्यरत हैं.

वहाँ बड़ी संख्या में मेजर के परिजनों, मित्रों और बड़ी संख्या में लोगों ने ताज होटल में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ज़ोरदार अभियान चलाने वाले इस जांबाज को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी.

गजेंद्र सिंह

उधर, मुंबई के नरीमन हाउस में चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए एनएसजी के हवलदार गजेंद्र सिंह का शव अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक निवास देहरादून भेजे जाने से पहले शनिवार को दिल्ली लाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई.

एनएसजी के वरिष्ठ अधिकारी हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए पालम स्थित एनएसजी मुख्यालय पर एकत्रित हुए. गजेंद्र एनएसजी के 51वीं स्पेशल टास्क फोर्स के सदस्य थे. उनका शव बाद में देहरादून ले जाया जाएगा.
Story first published: Saturday, November 29, 2008, 15:59 [IST]
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