सभी ने किया गांगुली को सलाम
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर: सौरव गांगुली द्वारा मंगलवार की शाम को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई की घोषणा के बाद उनके प्रशंसकों को भले ही निराशा हुई हो, लेकिन उन्होंने इस घोषणा के साथ भारतीय क्रिकेट को नया आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की खुराक दी है। इसी खुराक के बूते आज भारतीय क्रिकेटर अपना डंका बीट रहे हैं।
यदि गांगुली के क्रिकेट करियर की किताब के पन्ने पलटें तो कई पृष्ठ ऐसे खुलेंगे, जिनमें गांगुली ने भारतीय क्रिकेट में इतिहास रचा है। गांगुली में एक महान नेतृत्वकर्ता के सभी गुण हमेशा से रहे हैं। यह बात उनके व्यक्तित्व में झलकती भी है। इसी का नतीजा था कि एक साल के अंदर गांगुली ने एक ऐसी टीम खड़ी कर दी, जिसने दुनिया भर में घूम-घूमकर शानदार क्रिकेट खेला।
वर्ष 2000 में जब सौरव ने भारतीय टीम की कमान संभाली थी, तब भारतीय क्रिकेट के दामन पर मैच फिक्सिंग के छींटें पड़ रहे थे। गांगुली ने ना सिर्फ इन छींटों को साफ किया बल्कि जॉन राइट के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट को नए रंग में रंगने का काम शुरू किया।
गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट की साख बढ़ी और हमें एक ऐसी टीम के रूप में जाना जाने लगा, जो घर में 'शेर' और बाहर 'ढेर' के दायरे से निकलकर सभी जगह जीत दर्ज करने लगी।
गांगुली ने प्रतिभाशाली युवाओं को आंख बंद करके बढ़ावा दिया। उनकी कोशिश हमेशा यही रही कि जिनमें लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने की काबिलियत है, उनके साथ किसी तरह का अन्याय न होने पाए।
वर्ष 2004 में स्टीव वॉ को टॉस के लिए मैदान में इंतजार करवाकर गांगुली ने भारतीय क्रिकेट में आत्मसम्मान का संचार किया था। हालांकि कुछ लोगों ने गांगुली के इस कदम को नकारात्मक नतृत्व का परिचायक बताया लेकिन बहुतेरे मानते हैं कि जिनमें नेतृत्व की क्षमता होती है वही औरों से हटकर काम करते हैं। गांगुली ने ही दुनिया को बताया कि भारतीय क्रिकेट टीम का सम्मान होना चाहिए क्योंकि अब यह दबी-कुचली नहीं बल्कि एक महाशक्ति का रूप ले चुकी है।
गांगुली का शानदार करियर
टेस्ट करियर: वर्ष 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्डस में अपने टेस्ट करियर का आगाज करने वाले गांगुली ने 109 टेस्ट मैचों में 41.74 के औसत से 6888 रन बनाए हैं। इसमें 15 शतक और 34 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 239 रन रहा है।
एकदिवसीय करियर: दिग्गज खिलाड़ी माने जाने वाले गांगुली ने 311 मैचों में 41.02 के औसत से 11363 रन बनाए हैं। 183 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा है और उन्होंने 100 कैच भी लपके हैं। एकदिवसीय मैचों में गांगुली के नाम 22 शतक और 72 अर्धशतक हैं।
सभी ने किया गांगुली को सलाम
गांगुली के फैसले पर बीसीसीआई की चयन समिति के अध्यक्ष श्रीकांत ने कहा कि गांगुली का फैसला एकदम सही है। अब सौरव आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में खुले दिमाग से खेलेंगे। गांगुली ने भारतीय टीम में अपने स्थान को लेकर बनी अनिश्चितता के माहौल से तंग आकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। उन्होंने अपने फैसले के बारे में मुझे और अपने सहयोगियों को अवगत कराया। यह उनका अपना निजी फैसला है।
श्रीकांत ने सौरव को एक असाधारण खिलाड़ी करार दिया। उन्होंने कहा कि सौरव ने भारतीय क्रिकेट में बहुत कुछ दिया है। उन्होंने कहा "हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भारत के सफलतम कप्तान हैं।
पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने कहा कि गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को जो दिया है उसे आज उत्सव के रूप में मनाने का दिन है। पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा कि किसी भी क्रिकेटर के लिए यह कठोर फैसला होता है। लेकिन हमें दुखी नहीं होना चाहिए। वे एक महान खिलाड़ी है और उनका करियर शानदार रहा है। उन्होंने कप्तान के रूप में भारतीय टीम को शानदार विश्वास दिया है।
यदि गांगुली के क्रिकेट करियर की किताब के पन्ने पलटें तो कई पृष्ठ ऐसे खुलेंगे, जिनमें गांगुली ने भारतीय क्रिकेट में इतिहास रचा है। गांगुली में एक महान नेतृत्वकर्ता के सभी गुण हमेशा से रहे हैं। यह बात उनके व्यक्तित्व में झलकती भी है। इसी का नतीजा था कि एक साल के अंदर गांगुली ने एक ऐसी टीम खड़ी कर दी, जिसने दुनिया भर में घूम-घूमकर शानदार क्रिकेट खेला।
वर्ष 2000 में जब सौरव ने भारतीय टीम की कमान संभाली थी, तब भारतीय क्रिकेट के दामन पर मैच फिक्सिंग के छींटें पड़ रहे थे। गांगुली ने ना सिर्फ इन छींटों को साफ किया बल्कि जॉन राइट के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट को नए रंग में रंगने का काम शुरू किया।
गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट की साख बढ़ी और हमें एक ऐसी टीम के रूप में जाना जाने लगा, जो घर में 'शेर' और बाहर 'ढेर' के दायरे से निकलकर सभी जगह जीत दर्ज करने लगी।
गांगुली ने प्रतिभाशाली युवाओं को आंख बंद करके बढ़ावा दिया। उनकी कोशिश हमेशा यही रही कि जिनमें लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने की काबिलियत है, उनके साथ किसी तरह का अन्याय न होने पाए।
वर्ष 2004 में स्टीव वॉ को टॉस के लिए मैदान में इंतजार करवाकर गांगुली ने भारतीय क्रिकेट में आत्मसम्मान का संचार किया था। हालांकि कुछ लोगों ने गांगुली के इस कदम को नकारात्मक नतृत्व का परिचायक बताया लेकिन बहुतेरे मानते हैं कि जिनमें नेतृत्व की क्षमता होती है वही औरों से हटकर काम करते हैं। गांगुली ने ही दुनिया को बताया कि भारतीय क्रिकेट टीम का सम्मान होना चाहिए क्योंकि अब यह दबी-कुचली नहीं बल्कि एक महाशक्ति का रूप ले चुकी है।
गांगुली का शानदार करियर
टेस्ट करियर: वर्ष 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्डस में अपने टेस्ट करियर का आगाज करने वाले गांगुली ने 109 टेस्ट मैचों में 41.74 के औसत से 6888 रन बनाए हैं। इसमें 15 शतक और 34 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 239 रन रहा है।
एकदिवसीय करियर: दिग्गज खिलाड़ी माने जाने वाले गांगुली ने 311 मैचों में 41.02 के औसत से 11363 रन बनाए हैं। 183 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा है और उन्होंने 100 कैच भी लपके हैं। एकदिवसीय मैचों में गांगुली के नाम 22 शतक और 72 अर्धशतक हैं।
सभी ने किया गांगुली को सलाम
गांगुली के फैसले पर बीसीसीआई की चयन समिति के अध्यक्ष श्रीकांत ने कहा कि गांगुली का फैसला एकदम सही है। अब सौरव आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में खुले दिमाग से खेलेंगे। गांगुली ने भारतीय टीम में अपने स्थान को लेकर बनी अनिश्चितता के माहौल से तंग आकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। उन्होंने अपने फैसले के बारे में मुझे और अपने सहयोगियों को अवगत कराया। यह उनका अपना निजी फैसला है।
श्रीकांत ने सौरव को एक असाधारण खिलाड़ी करार दिया। उन्होंने कहा कि सौरव ने भारतीय क्रिकेट में बहुत कुछ दिया है। उन्होंने कहा "हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भारत के सफलतम कप्तान हैं।
पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने कहा कि गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को जो दिया है उसे आज उत्सव के रूप में मनाने का दिन है। पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा कि किसी भी क्रिकेटर के लिए यह कठोर फैसला होता है। लेकिन हमें दुखी नहीं होना चाहिए। वे एक महान खिलाड़ी है और उनका करियर शानदार रहा है। उन्होंने कप्तान के रूप में भारतीय टीम को शानदार विश्वास दिया है।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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