750 विकेट लेने वाला नहीं खेल सका टेस्ट मैच, बोले थे- मैं पैदा ही गलत समय हुआ था
स्पोर्ट्स डेस्क(नोएड) किस्मत साथ ना दे फिर की गई कड़ी मेहनत पर भी पानी फिर ही जाता है। क्रिकेट एक ऐसा खेल है जहां खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में अपना साै प्रतिशत देने के लिए पूरा जोर लगा देता है कि ताकि राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन फिर देश के लिए काम किया जाए और गहरी पहचान बनाई जाए। आज के समय में अगर कोई खिलाड़ी किसी एक घरेलू मैच में भी विकटों की झड़ी लगा दे या रन बरसा दे तो फिर उसे चर्चे शुरू हो जाते हैं, यही नहीं, देखते ही देखते उनका टिकट राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के लिए भी कट जाता है। भारतीय टीम में भूमिका निभा रही पांड्या ब्रदर्स इसके उदाहरण हैं जिन्होंने आईपीएल में कुछ मैचों में ही शानदार प्रदर्शन दिखाकर टीम में जगह बना ली थी। लेकिन साल 1958 में एक ऐसा पूर्व भारतीय क्रिकेट भी रहा जिसने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 750 विकेट झटके लेकिन फिर भी उसे कभी भारतीय टीम की तरफ से टेस्ट मैच खेलने का माैका नहीं मिला।

काैन ये वो गेंदबाज?
यह बड़ी हैरान कर देने वाली बात है कि आखिर क्यों उस गेंदबाज को तब माैका नहीं दिया गया था। जी हां, हम बात कर रहे हैं हरियाणा में जन्में राजिंदर गोयल की। गोयल का जिक्र आज इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वो आज यानी कि 20 सितंबर को उनका जन्म हुआ था। 1942 में जन्मे राजिंदर आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह बाएं हाथ के स्पिनर गेंदबाज रहे। साल 1985 में जब उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट का आखिरी मैच खेला था तो उन्होंने 157 मैचों में 750 विकेट अपने नाम कर लिए थे। वह इस फाॅर्मेट में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले भारतीय गेंदबाज हैं। राजिंदर को दुख है कि उन्हें ऐसा प्रदर्शन करने के बावजूद राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली थी।

बिशन के चलते नहीं मिली जगह
राजिंदर खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि सब किस्मत का खेल है, जिस कारण माैका नहीं मिला। जून 2001 को एक इंटरव्यू के दाैरान राजिंदर ने कहा था कि टेस्ट क्रिकेट खेलना मेरी किस्मत में लिखा ही नहीं था। मैं गलत समय पर पैदा हुआ था। मेरे खेलने के वक्त अलग-अलग टीमों में भी अच्छे स्पिन गेंदबाज थे। बता दें कि राजिंदर के समय बिशन सिंह बेदी टीम में जगह पक्की कर चुके थे। उनके कारण राजिंदर को टीम में एंट्री करने का माैका नहीं मिला था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर चुके राजिंदर गोयल को 1974 में विंडीज के खिलाफ टीम में खेलने का माैका मिला था, लेकिन अंतिम समय बिशन वेदी को फिर उनकी जगह शामिल कर लिया गया था। इस बाक खुलासा राजिंदर ने खुद ईएसपीएन.क्रिकइंफो को दिए इंटरव्यू में किया था। उन्होंने कहा, '' मुझे 1974-75 में विंडीज के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में खेलने के लिए बुलाया गया था। बिशन सिंह वेदी किसी वजह से बाहर थे और मैं फाॅर्म में था। मुझे पूरी उम्मीद थी कि डेब्यू का माैका मिलेगा लेकिन जैसे ही टीम का ऐलान हुआ तो उसमें मेरा नाम शामिल नहीं था।"
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डाकू से जुड़ा किस्सा करेगा हैरान
राजिंदर के क्रिकेटर करियर से जुड़ा एक किस्सा ऐसा है जो आपको हैरान करेगा। उस समय जहां भारत क्रिकेट के मैनेजमेंट ने उन्हें नजरअंदाज किया था तो दूसरी तरफ जेल में बैठे एक डाकू ने उन्हें खत लिखते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 600 विकेट लेने के लिए बधाई दी। राजिंदर का इस बात पर कहना है कि जब उन्होंने 1985 में 600 विकेट पूरे किए थे तो उनके घर खत आया। उस खत को पढ़ने के बाद उनकी आंखों में आंसू आ गए। वो इसलिए क्योंकि एक डाकू ने भी उनके खेल की प्रशंसा की थी, जिसका फिर उन्होंने जवाब भी दिया था। यह खत मिला था उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में खौफ पैदा करने वाले कुख्यात डकैत भूरा सिंह यादव का, तब वह ग्वालियर जेल में बंद था। हालांकि डाकू का खत घर आने पर राजिंदर का परिवार घबरा गया था।

राजिंदर का करियर
इस गेंदबाज के नाम 157 प्रथम श्रेणी मैचों में 750 विकेट दर्ज हैं। वहीं लिस्ट ए में खेले 8 मैचों में 14 विकेट। राजिंदर कितने खतरनाक गेंदबाज रहे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो 18 बार किसी एक टेस्ट मैच में 10 या इससे अधिक विकेट चटका चुके हैं। इनके नाम रणजी क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने का रिकाॅर्ड है। उन्होंने 637 विकेट लिए हैं, जबकि दूसरे नंबर पर एस एस वेकेंटराघवन हैं जिन्होंने 479 विकेट लिए हैं।
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