नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। चेन्नई ने विश्व क्रिकेट को एक बार फिर 'जिंदा' कर दिया क्योंकि मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद जो हालात उपजे थे, उन्हें देखते हुए यह कहना बहुत मुश्किल था कि भारत में क्रिकेट एक बार फिर रोमांच की पराकाष्ठा को छू पाएगा या नहीं।
यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछले महीने की 26 तारीख की उस घटना ने सबसे पहला वार क्रिकेट पर किया था। भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई एकदिवसीय श्रंखला के बाकी बचे दो मैच रद्द कर दिए गए और इंग्लैंड की टीम 'नहीं' लौटने के इरादे के साथ स्वदेश रवाना हो गई थी। इसके अलावा इस महीने खेली जाने वाली चैंपियंस लीग भी टाल दी गई।
काफी जद्दोजहद के बाद इंग्लैंड की टीम जब टेस्ट श्रंखला के लिए भारत लौटी तो उसे सुरक्षा के नाम पर पुलिस और कमांडो जवानों की चादर ओढ़ा दी गई। हालात खेल के लायक बिल्कुल नहीं थे लेकिन जिस तरह हमले के बाद मुंबईवासियों की जिंदगी नहीं थमी, भारत में क्रिकेट की सांस भी चलती रही। हालांकि उसकी गति धीमी होती दिख रही थी।
इंग्लैंड टीम ने स्वीकार किया था कि हजारों सुरक्षाकर्मियों के बीच वह स्वाभाविक खेल नहीं खेल पाएगी लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीता, क्रिकेट का रोमांच बढ़ता गया और पांचवे दिन भारतीय टीम की जीत के साथ वह भारत क्या दुनियाभर पर पूरी तरह हावी हो गया।
पांच दिन के मैच में 95 हजार लोग चेपक स्टेडियम में इस रोमांच का हिस्सा बनने पहुंचे। इसके अलावा न जाने कितने क्रिकेट प्रेमी होंगे, जिन्होंने टीवी पर इसका लुत्फ लिया। जो मैदान में पहुंचे, उन्हें कभी सुरक्षा का डर रहा होगा लेकिन आज कोई उसकी चर्चा नहीं कर रहा है क्योंकि उन्हें अपने देश में क्रिकेट के फिर से 'जिंदा' होने की खुशी है।
ब्रिटेन के समाचार पत्रों ने भी माना है कि चेन्नई ने क्रिकेट को जिंदा कर दिया। दुनिया के क्रिकेट हुक्मरानों की वह चिंता अब काफूर हो गई, जो उन्होंने मुंबई हमले के बाद जताई थी। इसे क्रिकेट की जीत कहा जाए फिर 'बाजार' की, लेकिन कुल मिलाकर इससे एक बात सामने निकलकर आती है कि भारत में क्रिकेट पर अगर कोई हावी हो सकता है तो वह सिर्फ भगवान ही हैं।
इस मैच के लिए चेपक स्टेडियम के अंदर और बाहर लगभग 15 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। इनमें से अकेले पांच हजार तो इंग्लैंड टीम की सुरक्षा में तैनात थे। मैच खत्म होने के बाद अब सुरक्षा और आतंकी हमले के खतरे की कोई चर्चा नहीं कर रहा। चर्चा है तो बस क्रिकेट की जीत की और इसे रोकने का प्रयास करने वाले आतंकियों की हार की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**