नई दिल्लीः गालियों का थोड़ा मैदानी सभ्य रूप स्लेजिंग है लेकिन भद्रजनों के खेल में इतना होना भी काफी ज्यादा माना जाता है। और जब बात ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की आती है तो स्लेजिंग खुद ब खुद विचारों में कौंध जाती है। कंगारू खिलाड़ी मजबूर हैं और वे स्लेजिंग करने से खुद को रोक नहीं सकते।
लेकिन पिछले कुछ सालों में, खासकर बॉल टेंपरिंग कांड के बाद, परिस्थितियों में नाटकीय बदलाव आया है और कंगारू खिलाड़ी अब बहुत कम स्लेज करते हैं। करते भी हैं तो काफी हल्की डोज पर। भारत के साथ पिछली टेस्ट सीरीज में यही देखने को मिला था।
इसका एक कारण आईपीएल भी माना जाता है जिसका कॉन्ट्रेक्ट हासिल करना हर क्रिकेटर का अब सपना सा बन चुका है। ऐसा बताया जाता है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भारतीयों के साथ आईपीएल में साथ खेलने के कारण बहुत घुल मिल चुके हैं और वे दोस्ती के लिए भी स्लेज करना नहीं चाहते।
इसके अलावा ज्यादा स्लेज करने पर आईपीएल फ्रेंचाइजी की टेढ़ी नजरों का सामना करने की भी उम्मीदें हैं। कुल मिलाकर इस बार भी स्लेजिंग नहीं देखने को मिलने वाली है और इस बात की पुष्टि खुद कंगारू कोच जस्टिन लैंगर ने कर दी है।
लैंगर ने कहा, 'कोहली जो करते हैं हम उससे प्यार करते हैं, वे मजाकिया हैं और नाटकीयता से भरपूर भी'।
लैंगर भी इसी तरह से मैदान पर मनोरंजन होते देखना चाहते हैं और उनका कहना है-
'मैदान पर नोकझोंक करना, मजाक मस्ती करना और प्रतिद्वंदता करना आदि के लिए काफी स्कोप होता है लेकिन गालियों के लिए कोई जगह नहीं हैं।'
लैंगर ने कहा कि टीम की कल्चर अब बदल चुकी है। हालांकि यह उतना ही मीठा नहीं होगा क्योंकि ये एक कड़ी टेस्ट सीरीज होने जा रही है।