भारतीय बल्लेबाज आउट होने के लिए ये गलती करते गए, सुनील गावस्कर ने बताई खामी

नई दिल्लीः भारत की इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट मुकाबले में शर्मनाक हार हुई है। इस मैच को इस तरीके से परिभाषित किया जा सकता है 'आओ, अपने बल्ले से ऐज लगवाओ और विकेट के पीछे कैच देकर पवेलियन लौट जाओ।'

भारत ने दूसरी पारी में चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली के साथ मिलकर थोड़ा संयम तो दिखाया लेकिन यह बिल्कुल टेंपरेरी साबित हुआ। सच यह है कि रन बनाने के बावजूद चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली एक समस्या के तौर पर सामने आए हैं और इनसे भी बुरा हाल उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे का भी है।

एक दिन रन बनाने के बाद फिर खुल गई पोल-

एक दिन रन बनाने के बाद फिर खुल गई पोल-

कोहली और पुजारा पूरी तरह सेट थे और इनके ऊपर चौथा दिन शुरू होने के बाद बड़ी जिम्मेदारी थी लेकिन नई गेंद के सामने पहले सत्र में दोनों बल्लेबाज ने फिर से नौसिखिया की तरह घुटने टेक दिए। अगर देखा जाए तो अच्छी परिस्थितियों और खराब बॉलिंग में चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली रन बनाने में कामयाब रहे लेकिन जब चुनौती सामने आई तो फिर से यह बल्लेबाज कुछ नहीं कर सके।

यह चीज भारत को आगे भी समस्या देती रहेगी, अगर इसमें सुधार नहीं हुआ। भारतीय बल्लेबाजों के इतने किनारे निकले कि 50% विकेट तो विकेट के पीछे जॉस बटलर या फिर स्लिप के हाथों में समा गए और भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने बताया है कि ऐसा क्यों हो रहा है।

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गावस्कर ने बताई बैटिंग में खामी-

गावस्कर ने बताई बैटिंग में खामी-

गावस्कर ने भारतीय बल्लेबाजों की खामियां तकनीकी तौर पर तो बताई हैं लेकिन अंग्रेज गेंदबाजों की तारीफ करने में भी वे पीछे नहीं हटे और उन्होंने कहा कि गजब की गेंदबाजी थी जिसके चलते एक पारी, 76 रनों से भारत को हार मिली और अब यह सीरीज 1-1 से बराबर हो चुकी है जो किसी भी और मोड़ खा सकती है। फिलहाल तो इंग्लैंड के जीतने के चांस काफी ज्यादा दिखने लगे हैं।

गावस्कर ने कहा कि जैसे ही अंग्रेज बल्लेबाज गेंद सामने फुल लेंथ पर करते तो भारतीय बल्लेबाज अपने विकेट गंवा देते थे। मैच के बाद सोनी स्पोर्ट्स से बात करते हुए गावस्कर कहते हैं, "जब बल्लेबाजों को छोटी लेंथ पर गेंदबाजी कर आते हैं तो उनके पास इसको छोड़ने के लिए समय मिलता है या फिर खेलने के लिए भी मिल जाता है। लेकिन जब आप बल्लेबाज को आगे की ओर खींचते हैं तो उसके पास ज्यादा कुछ करने के लिए समय नहीं रहता और यहां पर बल्ले की स्पीड का फैक्टर काम आता है।"

"अगर आप भारतीय बल्लेबाजों के आउट होने का तरीका देखेंगे तो पाएंगे उन्होंने बल्ले को हार्ड हैंड से खेला है। इंग्लिश बॉलर्स ने विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे को आउट करने वाली गेंदे बड़ी शानदार डाली थी। वह बहुत ही बढ़िया गेंदें थी फिर भी बल्लेबाज उसको खेलने के लिए गए और यहां पर उन्होंने अपने आप को आउट पाया। यह चीज निश्चित तौर पर एक समस्या तो है ही।"

कमियों को ना मानना मैनेजमेंट की जिद सी बन चुकी है-

कमियों को ना मानना मैनेजमेंट की जिद सी बन चुकी है-

ऐसा भी नहीं है कि भारत का यह शर्मनाक प्रदर्शन पहली बार आया है क्योंकि जब भी मुश्किल परिस्थितियां आती हैं टीम के बड़े बल्लेबाज घुटने टेकते ही हैं और यह एक परंपरा सी बनती जा रही है।

हाल ही में भारत ने आस्ट्रेलिया में कुछ सफलता प्राप्त की है लेकिन यहां देखने वाली बात यह है कि आस्ट्रेलिया में गेंद इतनी स्विंग नहीं करती है। पिचें भी पहले की तुलना में काफी धीमी हो चुकी हैं। वहां उछाल जरूर है जिस पर भारतीय बल्लेबाजों ने महारत हासिल कर ली है लेकिन स्विंग की परिस्थितियों में टीम पूरी तरह घुटने टेक रही है चाहे वह न्यूजीलैंड हो या फिर इंग्लैंड हो।

भारतीय कप्तान विराट कोहली अपनी इस खामी को हमेशा छुपाएंगे लेकिन अगर जल्द ही अपनी खामियों की समीक्षा करके उचित फैसले नहीं लिए गए तो भारत यह सीरीज भी गवाने जा रहा है।

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Story first published: Sunday, August 29, 2021, 11:50 [IST]
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