नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ऑन-फील्ड अंपायरों को तकनीक की मदद देने के लिए लगातार काफी काम कर रहा है। तकनीक के प्रयोग का ताजा मामला नो-बॉल का है जब आईपीएल 2020 के दौरान फ्रंट फुट नो-बॉल जांचने के लिए कैमरे का इस्तेमाल होगा। इसके लिए भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता में दूसरे टेस्ट के दौरान ऑपरेशन शुरू किया गया था, यह आगामी विंडीज सीरीज में भी जारी रहेगा।
बोर्ड नो-बॉल लेने के लिए रन आउट कैमरे लगाने की तकनीक का परीक्षण कर रहा है, ताकि अंपायर गेंदबाज पैर से होने वाली नो-बॉल पढ़ने में न चूकें। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो इंडियन प्रीमियर लीग के आखिरी सीजन में भारी आलोचना के घेरे में आया था। सिर्फ आईपीएल में ही नहीं, यह ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच ब्रिस्बेन में होने वाले पहले टेस्ट के साथ भी एक बड़ा मुद्दा रहा है, क्योंकि दूसरे दिन के पहले दो सत्रों में 21 नो-बॉल मिस हुए थे।
बीसीसीआई के संयुक्त सचिव जयेश जॉर्ज ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह सब नई चीजों को ईजाद करने के के बारे में है और बीसीसीआई नई व्यवस्था यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं रखेगी कि नई तकनीक को अपनाया जाए।
"हां, काम चालू है। आईपीएल हमेशा नई चीजों के लिए हमेशा खड़ा हुआ है। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि आईपीएल का हर सीजन नई तकनीक को देखें और खेल की प्रगति में मदद करे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर तकनीक इस मुद्दे को मिटाने में मदद कर सकती है तो खिलाड़ी को क्यों नुकसान उठाना चाहिए?
"अतीत में, हमने देखा है कि फ्रंट फुट नो-बॉल एक ग्रे एरिया है और मेरा मानना है कि तकनीक फ्रंट फुट नो-बॉल का पता लगाने में मदद कर सकती है। इस तकनीक का व्यापक परीक्षण किया जा रहा है और वेस्ट इंडीज श्रृंखला में भी जारी रहेगा"
थर्ड अंपायर द्वारा रन आउट की जांच के लिए उपयोग किए जाने वाले कैमरे इस प्रक्रिया के लिए उपयोग किए जा रहे हैं और यह प्रति सेकंड 300 फ्रेम पर क्लिक कर रहा है। यह फ्रेम ऑपरेटर की इच्छा के अनुसार जूम किया जा सकता है। इस विचार को पहली बार इस महीने की शुरुआत में आइपीएल की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में लाया गया था।