IPL में औसत प्रदर्शन के बाद विश्वकप में अपनी ऑलराउंडर भूमिका को लेकर शंकर ने कही बड़ी बात
नई दिल्ली। निदहास ट्रॉफी के बाद से विजय शंकर ने अपने करियर में नए मुकाम को छुआ। वह एक नर्वस युवा से एक आत्मविश्वासी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनकर उभरे हैं। निश्चित रूप से विश्व कप की टीम में चुना जाना उनके लिए बहुत बड़ा अवसर है। ये शंकर के लिए करियर की नई ऊंचाईयों तक पहुंचने का भी एक शानदार मौका है। हालांकि इस युवा ऑलराउंडर के लिए आईपीएल का गत सीजन बहुत ज्यादा खास नहीं गया है। शंकर ने सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से आईपीएल 2019 में भाग लिया था। उन्होंने 15 मैचों में 244 रन बनाए और उनका औसत 20.33 ही रहा। जबकि गेंदबाजी में वे केवल 1 ही विकेट ले सके जिसमे उनका औसत 70 का रहा।

IPL 2019 में औसत रहा शंकर का प्रदर्शन-
आईपीएल की औसत परफारमेंस के बाद आईएएनएस से बात करते हुए शंकर ने कई अपने खेल के कई पहलुओं के साथ विश्व कप के बारे में भी बात की है। उन्होंने निदहास ट्रॉफी से बात शुरू करते हुए बताया कि इस ट्रॉफी ने सही मायनों में उनके खेल करियर को बदलकर रख दिया। इस ट्रॉफी के फाइनल मैच में शंकर ने नौसिखियों की भांति बल्लेबाजी करते हुए 19 गेंदों पर 17 रन बनाए थे। ये तब की बात है जब टीम को बहुत ही तेजी से बैटिंग करने की दरकार थी। लेकिन शंकर का बल्ला गेंद को छू भी नहीं पा रहा था। हालांकि बाद में कार्तिक की शेल-दिल पारी की बदौलत भारत यह मैच जीत गया था। उस पारी के बाद शंकर को आत्मविश्लेषण करने का मौका मिला और बाद में उन्होंने अपने आप को एक मजबूत बल्लेबाज के तौर पर ढाल लिया।

विश्व कप के लिए तैयार हैं शंकर-
आज उसी का नतीजा है कि शंकर विश्व कप टीम में नंबर चार पर चयनकर्ताओं की पहली पसंद बने हुए हैं। शंकर ने बताया है कि निदहास ट्रॉफी ने उनको अब दबाव से बाहर आकर बल्लेबाजी करना सीखा दिया है। विश्व कप में बल्लेबाजी को लेकर शंकर ने कहा, 'टीम की जरूरत मेरी प्राथमिकता है और मैं हर स्थिति में खेलने को तैयार हूं। मैं अपने खेल का लुत्फ उठा रहा हूं और अपने आप पर किसी तरह का दबाव नहीं ले रहा। मैं स्थिति को समझने और उसके हिसाब से खेलने पर ध्यान दे रहा हूं। मैं अपने काम को महत्व दे रहा हूं और इसको लेकर कोई शॉर्ट कट नहीं है।'
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अपनी गेंदबाजी पर काम करना चाहते हैं शंकर-
शंकर के मुताबिक विश्व कप में खेलने का मतलब एक सपना पूरा होने जैसा है। भारतीय टीम में विश्व कप के लिए हार्दिक पांड्या जैसा मजबूत ऑलराउंडर भी है। शंकर और हार्दिक की भूमिका लगभग एक जैसी होने के कारण दोनों की तुलना भी होती रहती है। हालांकि शंकर को लगता है कि उनको अभी अपनी गेंदबाजी पर काम करना बाकी है। जबकि गेंदबाजी पांड्या का मजबूत पक्ष भी है जो उनको शंकर के मुकाबले कहीं बेहतर ऑलराउंडर के रूप में स्थापित करती है। इस बारे में शंकर ने बात करते हुए बताया, 'मैं अपनी गेंदबाजी पर काफी काम कर रहा हूं। मैं सही प्रक्रिया पर ध्यान देने में यकीन रखता हूं। मुझे लगता है कि मेरे अंदर आत्मविश्वास होना चाहिए ताकि जब भी कप्तान मुझे गेंद दें तो मैं अच्छा कर पाऊं। यह हर मौके के साथ आत्मविश्वास हासिल करने की बात है।'
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