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ओलंपिक की शानदार शुरुआत

शुक्रवार की शाम को एक भव्य और रंगारंग कार्यक्रम के साथ बीजिंग ओलंपिक खेलों की शुरूआत हो रही है.

दुनिया भर के खेल प्रतिनिधियों, कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और लगभग नब्बे हज़ारों दर्शकों की उपस्थिति में चीनी कलाकार अपनी पाँच हज़ार साल पुरानी संस्कृति की मंत्रमुग्ध कर देने वाली झलक पेश कर रहे हैं.

पिछले दस वर्षों से चली आ रही ओलंपिक की अथक तैयारी का निचोड़ इन समारोहों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है.

चीन के स्वर्णिम अतीत से आधुनिक युग की ओर क़दमताल में जितने पड़ाव आए उन सबकी झलक दिखाने की कोशिश हो रही है.

बीजिंग के आसमान में शानदार आतिशबाजी के ज़रिए चीन ने मानो ये याद दिलाने की कोशिश बारूद उसी की देन है.

यही नहीं चीन की दीवार, छपाई कला, रेशम कारोबार से लेकर उन सबकी झलकियाँ देखने को मिली जो दुनिया को चीन की देन हैं.



लगभग दस हज़ार कलाकार समारोह की शाम को रंगीन बनाने में जुटे हुए हैं.

ऐतिहासिक क्षण

चीन के राष्ट्रपति हू चिंताओ ने ओलंपिक समारोह शुरु होने पर कहा, "जिस ऐतिहासिक क्षण का हमें इंतज़ार था, वो आ गया."

ओलंपिक समारोह को देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और बीजिंग के मुख्य हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया है.

24 अगस्त तक चलने वाले ओलंपिक में भाग लेने के लिए दुनिया भर के 11 हज़ार खिलाड़ी बीजिंग में एकत्रित हुए हैं. वे 302 खेलों में हिस्सा लेकर एक हज़ार मैडल जीतने के लिए खेलेंगे.

माना जा रहा है कि 1980 के दशक की शुरुआत में जब खेलों का बहिष्कार हुआ था, उसके बाद से यह पहला आयोजन है जिसका इतना राजनीतिकरण हुआ है.

प्रदूषण से लेकर मानवाधिकार तक बहुत से विवादों से गुज़रने के बाद अब सभी का ध्यान उद्धाटन समारोह पर रहेगा.

लंबी और खर्चीली तैयारी

चीन को इन ओलंपिक खेलों की तैयारियाँ करने में सात साल का समय लगा है और इन पर लगभग 40 अरब डॉलर का ख़र्च आया है.

सुरक्षा के भी पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं

चीन ने दुनिया को यह दिखाने में कोई कोर क़सर बाक़ी नहीं छोड़ी कि वह भी ओलंपिक जैसा विशाल आयोजन कर सकता है.

चीन ने इन ओलंपिक खेलों के लिए ख़ासतौर से बीजिंग नेशनल स्टेडियम तैयार किया है जो स्टील की छड़ों से बना है और इसी लिए इसे 'बर्ड्स नेस्ट' यानी 'चिड़ियों का घोंसला' का नाम भी दिया गया है.

इन ओलंपिक खेलों के आयोजकों को उम्मीद है कि जब एक बार बीजिंग ओलंपिक खेल शुरू हो जाएंगे तो वायु प्रदूषण, इंटरनेट पर लगी पाबंदियाँ और चीन के ख़िलाफ़ होने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शन नैपथ्य में चले जाएंगे.

बीजिंग ओलंपिक खेलों के आयोजन में शामिल एक अधिकारी तीऊ मिंगते का विचार है कि चीन के लोग इन ओलंपिक खेलों के लोकर गौर्वान्वित महसूस कर रहे हैं और बहुत उत्साहित भी हैं.

वे कहते हैं, "चूँकि आप ख़ुद यहाँ हैं इसलिए आप ख़ुद यहाँ के माहौल को महसूस कर सकते हैं. आम लोगों में इन खेलों को लेकर जो उत्साह नज़र आता है, वो देखते ही बनता है."

उनका कहना है, "आप रेडियो चलाएंगे तो आपको पहला समाचार ओलंपिक खेलों के बारे में ही सुनने को मिलेगा और आप अख़बार खोलेंगे तो भी ओलंपिक की ख़बरों से ही भरा हुआ पाएंगे. इसी तरह टेलीविज़न का पर्दा भी आपको ओलंपिक खेलों की तैयारियों से भरा हुआ नज़र आएगा. सचमुच चीन के लोग इन खेलों के लिए बेहद उत्साहित हैं."

समझने का मौक़ा

उधर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ज़्याक रॉख़े ने चीन को ओलंपिक खेलों का आयोजन करने का अवसर देने के फ़ैसले की बार-बार हिमायत की है.

रॉख़े ने उम्मीद जताई है कि इन खेलों के ज़रिए चीन को दुनिया को समझने और दुनिया को चीन को समझने का मौक़ा मिलेगा.

दुनिया इन खेलों के ज़रिए एक ऐसे देश को समझने की कोशिश करेगी जिसका पाँच हज़ार साल का एक इतिहास और परंपरा है. वे चीन को एक अदभुत देश पाएंगे और मेरा ख़याल है कि इससे दुनिया भर में चीन के बारे में राय बदलेगी
रॉख़े ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति इस पर नज़र रख रही है कि इतिहास में अभी तक के सबसे महंगे बीजिंग ओलंपिक खेलों से क्या निकलकर आता है.

उन्होंने कहा, "दुनिया इन खेलों के ज़रिए एक ऐसे देश को समझने की कोशिश करेगी जिसका पाँच हज़ार साल का एक इतिहास और परंपरा है. वे चीन को एक अदभुत देश पाएंगे और मेरा ख़याल है कि इससे दुनिया भर में चीन के बारे में राय बदलेगी."

ज़्याक रॉख़े ने ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले गुरुवार को अपनी अंतिम पत्रकार वार्ता आयोजित की.

जिसमें उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन ने ओलंपिक खेलों के दौरान बीजिंग में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए समुचित उपाय किए हैं और एथलीटों के लिए माहोल ख़ुशनुमा रहेगा.

ज़्याक रॉख़े ने ओलंपिक खेलों के इतिहास पर नज़र डालते हुए कहा, "ग्रीस से यह परंपरा शुरू हुई और चीन अपने इन ओलंपिक खेलों के ज़रिए अपने एक अरब तीस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों के साथ दुनिया के सामने होगा."

सुरक्षा के मुद्दे पर तो रॉख़े ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन एथलीटों को ओलंपिक नियमों का ध्यान दिलाते हुए कहा कि ओलंपिक स्थलों पर प्रदर्शन नहीं होने चाहिए. लेकिन अगर कोई एथलीट खेल के मैदान पर प्रदर्शन करेगा तो उसकी बात भी सुनी जाएगी.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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