राष्ट्रमंडल खेल : सफलता से गदगद हैं महिला पहलवान
जयंत के. सिंह
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश के लिए 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाली महिला पहलवान अपनी सफलता पर फूली नहीं समा रही हैं। गांव, समाज और परम्पराओं से लड़कर कुश्ती को चुनने वाली इन महिलाओं को इस बात की खुशी है कि उनकी इस सफलता को देश ने करीब से देखा है और लोग उन्हें भी पहचानने लगे हैं।
जिस देश में क्रिकेट को धर्म का दर्जा प्राप्त हो, वहां महिला पहलवानों के मुंह से इस तरह की बात निकलना कोई आश्चर्य की बात नहीं। महिला कुश्ती हमेशा से आशंका के साए में रही है। महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करके शोहरत तक का रास्ता तय करना पड़ा है।
इस लिहाज से सभी महिला पहलवानों की सफलता काबिलेतारीफ और उनके कोच तथा सहयोगी स्टाफ का काम सराहनीय है। देश इनकी इस सफलता को कभी नहीं भुला पाएगा और साथ ही ये खिलाड़ी भी कभी नहीं भुला पाएंगी कि पदक जीतने पर देशवासियों ने उनका भरपूर सम्मान किया है।
मुख्य मीडिया सेंटर (एमपीसी) में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में फ्रीस्टाइल 59 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली अलका तोमर, 51 किलो वर्ग में रजत जीतने वाली बबीता कुमारी, 67 किलो वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली अनिता, स्वर्ण पदक विजेता गीता, सुमन कुंडू, भारतीय कुश्ती टीम के राष्ट्रीय कोच पी.आर. सोंधी, महिला टीम की कोच मोनिका चौधरी और कुश्ती टीम के सहायक कोच कमल सिंह शामिल थे।
इस दौरान सबसे बड़ा प्रश्न यह उभरकर आया कि 19वें राष्ट्रमंडल खेल पदक जीतने के लिहाज से 19वें हरियाणा खेल समझे जा रहे हैं क्योंकि पुरुष और महिला पहलवानों के अलावा कई खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों के पदक जीतने के बाद कइयों के आगे भी पदक पाने की संभावना है। ऐसे में आखिरकार भारतीय कुश्ती महासंघ दूसरे राज्यों की महिलाओं में कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रहा है।
इस सवाल पर सोंधी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने खेलों और खासकर मुक्केबाजी और कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए शानदार बुनियादी ढांचा आधार तैयार किया है और साथ ही वह अपने खिलाड़ियों को नौकरी एवं पुरस्कार के तौर पर कई तरह से मदद करती रहती है।
यह पूछे जाने पर कि आखिरकार कुश्ती महासंघ दूसरे राज्यों के संघों को हरियाणा की शैली में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने को क्यों नहीं कहता, सोधी ने कहा, "हम इस संबंध में महासंघ से बात करेंगे। केरल से कुछ लड़कियां सामने आई थीं लेकिन वहां के संघ के रवैये के कारण उनका आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका। इसके अलावा महाराष्ट्र और पंजाब से लड़कियों का आना जारी है। दूसरे राज्य भी इसके लिए प्रयास करें। "
संवाददाता सम्मेलन को दोपहर दो बजे शुरू होना था लेकिन खिलाड़ियों के आने में हुई देरी के कारण यह तीन बजे शुरू हो सका। पत्रकार सम्मेलन की शुरूआत होने के बाद भी आयोजन स्थल पर अव्यवस्था बरकरार रही।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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