रांची। जी हां, ये ही सवाल किया गया कप्तान धोनी से उस समय जब टीम इंडिया पहली बार उनके ही घर रांची में हारी। जो हाल टीम का दिल्ली में था वहीं रांची में, दोनों ही जगह विराट कोहली का बल्ला नहीं चला और टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
इस बारे में धोनी ने कहा कि नहीं ऐसा नहीं है और मैं अपने टीम के सदस्यों से यही कहना चाहूंगा कि विराट कोहली पर इतना निर्भर नहीं रहना चाहिए और रांची में मिली हार से हमें सबक सीखना चाहिए। हमने आज के मैच में काफी गलतियां की है, जिससे अगर हमने सीख नहीं ली तो यही हाल होगा जो आज हुआ है।
हमने ज्यादा एकदिवसीय मैच नहीं खेले
अगर आप हमारे पिछले कुछ महीनों पर नज़र डालें तो हमने ज्यादा एकदिवसीय मैच नहीं खेले हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए ही ज़िम्बाब्वे का दौरा भी हमारी टीम के लिए काफी समस्याओं भरा रहा था। फिलहाल हम आगे बढ़ेंगे और गलतियों से सीखेंगे।
धोनी तो इतनी सी बात कहकर निकल लिए लेकिन आपको बता दें कि पिछले 7 वनडे मैचों में से 5 में से इंडिया तभी जीती है, जिसमें विराट कोहली का बल्ला चला है, इसलिए जितना मैदान के बाहर लोग सोचते हैं कि अगर विराट चल गए तो टीम जीत जाएगी ठीक उसी तरह से ड्रेसिंग रूम में भी शायद यही सोच हावी हो गई है कि कोहली आउट तो हम आउट।
टीवी चैनलों पर पुरोधाओं की बहस भी यही कह रही है कि इस मामले में भी विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर की तरह बनते जा रहे हैं क्योंकि 90 के दशक में टीम इंडिया का यही हाल था, सचिन आउट तो टीम आउट लेकिन अगर टीम इंडिया को नंबर वन बनना है और सीरीज जीतनी है तो उसे कोहली के ही भरोसे मैच नहीं खेलना होगा।
मालूम हो कि रांची वनडे में कोहली मात्र 45 रन बनाकर आउट हो गए थे और उसके बाद पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई और न्यूजीलैंड ने ये मैच जीत लिया।