महानतम खिलाड़ियों में शुमार हुए आनंद
नई दिल्ली, 30 अक्तूबर: तीन दशक बाद ही सही लेकिन भारत के एकमात्र सुपरग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने विश्व चैंपियन खिताब बरकरार रखकर खुद को दुनिया के महानतम शतरंज खिलाड़ियों में शुमार कर लिया है।
वर्ष 1987 में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करने वाले आनंद ने जर्मनी के शहर बॉन में रूस के व्लादिमीर क्रेमनिक को हराने के साथ ही वह मुकाम हासिल किया जिसे दुनिया के महानतम शतरंज खिलाड़ी माने जाने वाले रूस के गैरी कास्परोव भी नहीं हासिल कर सके थे।
वर्ष 2000 और 2007 में विश्व खिताब जीत चुके आनंद को शतरंज की दुनिया का हरफनमौला खिलाड़ी कहें तो गलत नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि उन्होंने शतरंज के हर एक फॉरमेट में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। आनंद शतरंज के तीनों फॉरमेट का विश्व खिताब जीतने वाले दुनिया के पहले ग्रैंडमास्टर हैं।
आनंद ने नॉक-आउट, राउंड-रॉबिन और मैच-प्ले फॉरमेट में विश्व खिताब जीता है। क्रेमनिक के साथ उनकी भिड़ंत से पहले कास्परोव ने क्रेमनिक को खिताब का प्रबल दावेदार बताया था लेकिन आनंद ने तीन मौकों पर क्रेमनिक को हराकर 11वें दौर में ही खिताब अपने नाम कर कास्परोव को गलत साबित किया।
वर्ष 1969 में जन्मे आनंद ने छह वर्ष की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। आज 37 वर्ष के हो चुके आनंद ने 1984 में विश्व सब-जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद वे उसी साल एशियाई जूनियर (अंडर-19) चैंपियन बने थे। इस जीत ने आनंद को इंटरनेशनल मास्टर का दर्जा दिलाया था।
फिलिपींस में रहते हुए आनंद ने अपनी मां से शतरंज के गुर सीखे थे क्योंकि उनके पिता वहां कार्यरत थे। वर्ष 1987 आनंद के लिए बेहद खास रहा क्योंकि इस वर्ष उन्हें ग्रैंडमास्टर का दर्जा मिला और तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
वर्ष 1987 में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करने वाले आनंद ने जर्मनी के शहर बॉन में रूस के व्लादिमीर क्रेमनिक को हराने के साथ ही वह मुकाम हासिल किया जिसे दुनिया के महानतम शतरंज खिलाड़ी माने जाने वाले रूस के गैरी कास्परोव भी नहीं हासिल कर सके थे।
वर्ष 2000 और 2007 में विश्व खिताब जीत चुके आनंद को शतरंज की दुनिया का हरफनमौला खिलाड़ी कहें तो गलत नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि उन्होंने शतरंज के हर एक फॉरमेट में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। आनंद शतरंज के तीनों फॉरमेट का विश्व खिताब जीतने वाले दुनिया के पहले ग्रैंडमास्टर हैं।
आनंद ने नॉक-आउट, राउंड-रॉबिन और मैच-प्ले फॉरमेट में विश्व खिताब जीता है। क्रेमनिक के साथ उनकी भिड़ंत से पहले कास्परोव ने क्रेमनिक को खिताब का प्रबल दावेदार बताया था लेकिन आनंद ने तीन मौकों पर क्रेमनिक को हराकर 11वें दौर में ही खिताब अपने नाम कर कास्परोव को गलत साबित किया।
वर्ष 1969 में जन्मे आनंद ने छह वर्ष की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। आज 37 वर्ष के हो चुके आनंद ने 1984 में विश्व सब-जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद वे उसी साल एशियाई जूनियर (अंडर-19) चैंपियन बने थे। इस जीत ने आनंद को इंटरनेशनल मास्टर का दर्जा दिलाया था।
फिलिपींस में रहते हुए आनंद ने अपनी मां से शतरंज के गुर सीखे थे क्योंकि उनके पिता वहां कार्यरत थे। वर्ष 1987 आनंद के लिए बेहद खास रहा क्योंकि इस वर्ष उन्हें ग्रैंडमास्टर का दर्जा मिला और तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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