मेंडिस से निपटने के लिए धोनी का मंत्र
दिनों-दिन भारतीय टीम के लिए मुसीबत बनते जा रहे श्रीलंका के अजंता मेंडिस से निपटने के लिए कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने साथी खिलाड़ियों को मंत्र दिया है.
मंत्र ये कि अगर मेंडिस पर दबाव बनाना है तो उन्हें ख़राब गेंदों पर बख़्शा न जाए, उनकी पिटाई की जाए.
धोनी ने कहा कि मेंडिस को सबक सिखाने के लिए भारतीय टीम को ध्यान रखना होगा कि अगर वह ख़राब गेंदे फेंकें तो उसकी पिटाई की जाए ताकि दबाव मेंडिस पर बने.
भारतीय कप्तान का कहना है कि अगर मेंडिस की गेंदों से बचने की कोशिश की जाएगी तो वे हावी हो जाएँगे. पाकिस्तान में हुए एशिया कप के बाद से ही भारतीय टीम अजंता मेंडिस से परेशान है. मेंडिस ने भारतीय शीर्ष बल्लेबाज़ों की नाक में दम कर रखा है.
उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ हो रहे तीसरे वन-डे मैच के दौरान अपने खिलाड़ियों के हाथ से छूटे कैचों के लिए भीड़ और दर्शकों के रंग-बिरंगे कपड़ों को दोषी ठहराया. उन्होंने कहा कि दर्शकों के रंग-बिरंगे कपड़ों की वजह से खिलाड़ियों का ध्यान भंग हुआ और इसी कारण उनके हाथों से चार कैच छूटे.
मैदान पर भारत का प्रदर्शन इस मैच के दौरान काफ़ी ख़राब रहा था क्योंकि श्रीलंका जब बल्लेबाज़ी कर रहा था तब भारतीय टीम ने चार मौक़े गँवा दिए थे. इस वजह से भारत ने सिर्फ़ 33 रनों से जीत हासिल की जबकि एक समय उसकी स्थिति काफ़ी अच्छी थी.
मात्र 33 रनों से जीत हासिल करने के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा, "श्रीलंका के दर्शक बहुत रंगीन कपड़े पहने हुए थे इसलिए गेंद का अंदाज़ लगा पाना मुश्किल हो रहा था, ख़ासकर रात में. मिट्टी लगने से गेंद गंदी भी हो गई थी."
टीम को तनाव
धोनी ने माना कि जब श्रीलंका के कप्तान महेला जयवर्धने तिलकरत्ने और थिलन तुषार के साथ लक्ष्य के क़रीब बढ़ रहे थे, तब भारतीय टीम तनाव में आ गई थी.
उन्होंने कहा, "जब जयवर्धने और थिलन तुषार रन पर रन बना रहे थे तब भारतीय टीम चिंतित हो गई थी."
चार गेंदबाज़ों की नीति के बारे में धोनी ने कहा, " हमें चार गेंदबाज़ों के साथ ही काम करना होगा. हमारे पास युवराज, रैना और विराट जैसे गेंदबाज़ हैं. हमें तो एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ की ज़रूरत थी."
भारत को 76 रन बनाकर जीत दिलाने वाले धोनी ने यह भी माना कि उन्होंने बल्लेबाज़ी करने का अपना ढंग बदल दिया है.
चुनौती
उन्होंने कहा, "पहले भारत के पास ऐसे बल्लेबाज़ थे जो मैच के अंत तक खेलते थे और मैं बड़े शॉट ले सकता था. फिर भी मुझे खुशी है कि अब भी मैं 90 का स्ट्राइक रेट ले रहा हूँ. हालाँकि मुझे तब और ज़्यादा खुशी होगी जब यह रेट 100 से ऊपर रहे."
मेंडिस ने भारतीय टीम की नाक में दम कर रखा है. मैच में 94 रन बना कर टीम की स्थिति सुधारने वाले श्रीलंका के कप्तान जयवर्धने ने कहा कि उनकी टीम जीत हासिल करने के लायक नहीं थी.
मैच में सलामी बल्लेबाज़ कुमार संगकारा के प्रदर्शन के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "जब कोई शतक बनाता है, तब आप कुछ नहीं पूछते. हर बल्लेबाज़ कभी अच्छे फ़ार्म में होता है तो कभी नहीं. संगकारा से सलामी बल्लेबाज़ी कराने के पीछे यह विचार था कि वे वरिष्ठ बल्लेबाज़ होने के नाते ज़्यादा देर तक खेल सकें."
जयवर्धने ने आत्मविश्वास से कहा कि वह जानते हैं कि उनकी टीम क्या कर रही है लेकिन उन्होंने कहा कि अपने ही देश में दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना मुश्किल था क्योंकि यह बेहद चुनौतीपूर्ण था.
मंत्र ये कि अगर मेंडिस पर दबाव बनाना है तो उन्हें ख़राब गेंदों पर बख़्शा न जाए, उनकी पिटाई की जाए.
धोनी ने कहा कि मेंडिस को सबक सिखाने के लिए भारतीय टीम को ध्यान रखना होगा कि अगर वह ख़राब गेंदे फेंकें तो उसकी पिटाई की जाए ताकि दबाव मेंडिस पर बने.
भारतीय कप्तान का कहना है कि अगर मेंडिस की गेंदों से बचने की कोशिश की जाएगी तो वे हावी हो जाएँगे. पाकिस्तान में हुए एशिया कप के बाद से ही भारतीय टीम अजंता मेंडिस से परेशान है. मेंडिस ने भारतीय शीर्ष बल्लेबाज़ों की नाक में दम कर रखा है.
उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ हो रहे तीसरे वन-डे मैच के दौरान अपने खिलाड़ियों के हाथ से छूटे कैचों के लिए भीड़ और दर्शकों के रंग-बिरंगे कपड़ों को दोषी ठहराया. उन्होंने कहा कि दर्शकों के रंग-बिरंगे कपड़ों की वजह से खिलाड़ियों का ध्यान भंग हुआ और इसी कारण उनके हाथों से चार कैच छूटे.
मैदान पर भारत का प्रदर्शन इस मैच के दौरान काफ़ी ख़राब रहा था क्योंकि श्रीलंका जब बल्लेबाज़ी कर रहा था तब भारतीय टीम ने चार मौक़े गँवा दिए थे. इस वजह से भारत ने सिर्फ़ 33 रनों से जीत हासिल की जबकि एक समय उसकी स्थिति काफ़ी अच्छी थी.
मात्र 33 रनों से जीत हासिल करने के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा, "श्रीलंका के दर्शक बहुत रंगीन कपड़े पहने हुए थे इसलिए गेंद का अंदाज़ लगा पाना मुश्किल हो रहा था, ख़ासकर रात में. मिट्टी लगने से गेंद गंदी भी हो गई थी."
टीम को तनाव
धोनी ने माना कि जब श्रीलंका के कप्तान महेला जयवर्धने तिलकरत्ने और थिलन तुषार के साथ लक्ष्य के क़रीब बढ़ रहे थे, तब भारतीय टीम तनाव में आ गई थी.
उन्होंने कहा, "जब जयवर्धने और थिलन तुषार रन पर रन बना रहे थे तब भारतीय टीम चिंतित हो गई थी."
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भारत को 76 रन बनाकर जीत दिलाने वाले धोनी ने यह भी माना कि उन्होंने बल्लेबाज़ी करने का अपना ढंग बदल दिया है.
चुनौती
उन्होंने कहा, "पहले भारत के पास ऐसे बल्लेबाज़ थे जो मैच के अंत तक खेलते थे और मैं बड़े शॉट ले सकता था. फिर भी मुझे खुशी है कि अब भी मैं 90 का स्ट्राइक रेट ले रहा हूँ. हालाँकि मुझे तब और ज़्यादा खुशी होगी जब यह रेट 100 से ऊपर रहे."
मेंडिस ने भारतीय टीम की नाक में दम कर रखा है. मैच में 94 रन बना कर टीम की स्थिति सुधारने वाले श्रीलंका के कप्तान जयवर्धने ने कहा कि उनकी टीम जीत हासिल करने के लायक नहीं थी.
मैच में सलामी बल्लेबाज़ कुमार संगकारा के प्रदर्शन के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "जब कोई शतक बनाता है, तब आप कुछ नहीं पूछते. हर बल्लेबाज़ कभी अच्छे फ़ार्म में होता है तो कभी नहीं. संगकारा से सलामी बल्लेबाज़ी कराने के पीछे यह विचार था कि वे वरिष्ठ बल्लेबाज़ होने के नाते ज़्यादा देर तक खेल सकें."
जयवर्धने ने आत्मविश्वास से कहा कि वह जानते हैं कि उनकी टीम क्या कर रही है लेकिन उन्होंने कहा कि अपने ही देश में दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना मुश्किल था क्योंकि यह बेहद चुनौतीपूर्ण था.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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