लंदन ओलंपिक: भारतीय बैडमिंटन कोच का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
प्रदीप शुक्ल 'स्वतंत्र'
हैदराबाद के बैडमिंटन ट्रेनिंग सेंटर पर सुबह 4:30 बजे सभी खिलाड़ी मैदान पर पहुंच जाते हैं। पहले वॉर्म अप और फिर प्रेक्टिस। दिन भर अलग-अलग तरह की क्लासेस और फिर रात को करीब 10:30 बजे तक खिलाड़ी को सांस लेने तक की फुरसत नहीं। देश के पांच जांबाज़ खिलाड़ी यह कड़ी मेहनत कर रहे हैं देश को ओलंपिक पदक दिलाने के लिए।
जी हां हम बात कर रहे हैं सायना नेहवाल, ज्वाला गट्टा, वी दीजू, अश्विनी पोनप्पा और पी कश्यप की। इन लोगों ने लंदन ओलंपिक के लिए दिन रात एक कर दिया है। इनकी मेहनत को दिशा प्रदान कर रहे हैं सात कोच। हमने उन्हीं में से एक कोच उमेंद्र राणा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। पेश है उमेंद्र राणा से बातचीत के कुछ अंश-
प्र. इस बार भारतीय टीम के कितने कोच हैं?
उ. लंदन ओलंपिक की तैयारियों के लिए पुलेला गोपीचंद के साथ कुल सात कोच हैं, जिनमें पांच भारतीय और दो इंडोनेशिया के हैं।
प्र. इस बार ओलंपिक के लिए आपकी ट्रेनिंग में सबसे ज्यादा फोकस किस पर है।
उ. हमारा फोकस किसी एक विधा पर नहीं है, ओलंपिक जीतने के लिए आपको ऑलराउंडर होना जरूरी है और हम खिलाड़ियों के ऑलराउंड डेवलपमेंट पर जोर दे रहे हैं।
प्र. लंदन ओलंपिक में टीम कैसे बनाई गई है?
उ. पांच खिलाड़ी लंदन जा रहे हैं- महिला एकल- सायना नेहवाल, पुरुष एकल- पी कश्यप, महिला डबल्स- ज्वाला गट्टा व अश्विनी पोनप्पा, मिक्स्ड डबल्स ज्वाला गट्टा व वी दीजू।
प्र. आजकल इन पांच खिलाड़ियों की दिनचर्या क्या है?
उ. प्रेक्टिस सेशन सुबह 5:45 बजे शुरू होता है। उसके बाद योगा और ध्यान की कक्षा। फिर नाश्ता और स्ट्रोक प्रेक्टिस का समय 7:30 से दस बजे तक एंव पुन: सत्र 11 बजे से एक बजे तक का होता है। शाम 4 से 7 बजे तक फिजिकल ट्रेनिंग होती है, जिसमें फुर्ती लाने के लिए अभ्यास किये जाते हैं, स्पीड ट्रेनिंग, सहनशक्ति की ट्रेनिंग, वजन नियंत्रित करने, ऑन कोर्ट शैडो आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। कई बार सुबह 4:30 बजे कोच खिलाड़ी को बुलाकर उनके लिए विशेष स्ट्रोक सत्र का आयोजन करते हैं।
प्र. सायना से तो पूरे देश को उम्मीदें हैं, आपकी नजर में सायना के अलावा और कौन-कौन हैं, जिनके मेडल जीतने की उम्मीद ज्यादा है?
उ. बतौर कोच मुझे हर खिलाड़ी से उम्मीदें हैं, ज्वाला और अश्विनी भी विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक ला चुके हैं और कश्यप ने इंडियन ओपन सुपर सीरीज में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। दीजू और ज्वाला काफी अनुभवी खिलाड़ी है, इन्होंने पिछले साल विश्व में छठी रैंक हासिल की थी। इन सभी के खेल को देखते हुए सभी से उम्मीदें बराबर की हैं।
प्र. बतौर कोच आपको सायना में ऐसा क्या दिखा, जो बाकियों में नहीं है?
उ. उसकी फाइटिंग स्पिरिट। सायना नेहवाल दुनिया के स्ट्रोकिंग खिलाडि़यों में से एक हैं। वो नया सीखने के लिए हर समय लालायित रहती हैं। वो मानसिक और भौतिक दोनो तरह से मजबूत खिलाड़ी हैं।
प्र. भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी कौन सा देश होगा? उससे भिड़ने के लिए कैसी तैयारियां हैं?
उ. बैडमिंटन में चीन भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी है। उससे टक्कर लेने के लिए हम प्रत्येक खिलाड़ी में खेल की हर विधा पर गहराई से फोकस कर रहे हैं। सिंगल्स में हमारे पास सिर्फ दो खिलाड़ी हैं- सायना और पी कश्यप और दोनों विश्व के बेहतरीन अटैकिंग खिलाडि़यों के रूप में जाने जाते है एवं दोनों की पावरफुल स्ट्रोक्स खेलने की क्षमता बेहतरीन है।
प्र. इंडोनेशिया को आप किस स्तर पर देख रहे हैं?
उ. हम इंडोनेशिया को हलके में तो नहीं ले सकते, लेकिन यह गेम पर निर्भर करेगा कि किस गेम में इंडोनेशिया भारत के सामने होता है। वैसे वे पुरुष युगल में काफी अच्छे हैं। लेकिन चीन और मलेशिया एंव डेनमार्क के खिलाड़ी एकल में अच्छे हैं।
प्र. भारतीय टीम लंदन के लिए कब रवाना होगी?
उ. अभी डेट तय नहीं हुई है।
प्र. जिन खिलाड़ियों को ओलंपिक का टिकट नहीं मिल सका है, उनसे आप क्या कहना चाहेंगे?
उ. मैं सिर्फ उनसे इतना कहना चाहूंगा कि वे सच्चे दिल और पूरी लगन के साथ कड़ी मेहनत करें और खुद से किये गये वादे को पूरा करें। भविष्य में उन्हें भी जरूर ओलंपिक का टिकट मिलेगा।
हैदराबाद के बैडमिंटन ट्रेनिंग सेंटर पर सुबह 4:30 बजे सभी खिलाड़ी मैदान पर पहुंच जाते हैं। पहले वॉर्म अप और फिर प्रेक्टिस। दिन भर अलग-अलग तरह की क्लासेस और फिर रात को करीब 10:30 बजे तक खिलाड़ी को सांस लेने तक की फुरसत नहीं। देश के पांच जांबाज़ खिलाड़ी यह कड़ी मेहनत कर रहे हैं देश को ओलंपिक पदक दिलाने के लिए।
जी हां हम बात कर रहे हैं सायना नेहवाल, ज्वाला गट्टा, वी दीजू, अश्विनी पोनप्पा और पी कश्यप की। इन लोगों ने लंदन ओलंपिक के लिए दिन रात एक कर दिया है। इनकी मेहनत को दिशा प्रदान कर रहे हैं सात कोच। हमने उन्हीं में से एक कोच उमेंद्र राणा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। पेश है उमेंद्र राणा से बातचीत के कुछ अंश-
प्र. इस बार भारतीय टीम के कितने कोच हैं?
उ. लंदन ओलंपिक की तैयारियों के लिए पुलेला गोपीचंद के साथ कुल सात कोच हैं, जिनमें पांच भारतीय और दो इंडोनेशिया के हैं।
प्र. इस बार ओलंपिक के लिए आपकी ट्रेनिंग में सबसे ज्यादा फोकस किस पर है।
उ. हमारा फोकस किसी एक विधा पर नहीं है, ओलंपिक जीतने के लिए आपको ऑलराउंडर होना जरूरी है और हम खिलाड़ियों के ऑलराउंड डेवलपमेंट पर जोर दे रहे हैं।
प्र. लंदन ओलंपिक में टीम कैसे बनाई गई है?
उ. पांच खिलाड़ी लंदन जा रहे हैं- महिला एकल- सायना नेहवाल, पुरुष एकल- पी कश्यप, महिला डबल्स- ज्वाला गट्टा व अश्विनी पोनप्पा, मिक्स्ड डबल्स ज्वाला गट्टा व वी दीजू।
प्र. आजकल इन पांच खिलाड़ियों की दिनचर्या क्या है?
उ. प्रेक्टिस सेशन सुबह 5:45 बजे शुरू होता है। उसके बाद योगा और ध्यान की कक्षा। फिर नाश्ता और स्ट्रोक प्रेक्टिस का समय 7:30 से दस बजे तक एंव पुन: सत्र 11 बजे से एक बजे तक का होता है। शाम 4 से 7 बजे तक फिजिकल ट्रेनिंग होती है, जिसमें फुर्ती लाने के लिए अभ्यास किये जाते हैं, स्पीड ट्रेनिंग, सहनशक्ति की ट्रेनिंग, वजन नियंत्रित करने, ऑन कोर्ट शैडो आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। कई बार सुबह 4:30 बजे कोच खिलाड़ी को बुलाकर उनके लिए विशेष स्ट्रोक सत्र का आयोजन करते हैं।
प्र. सायना से तो पूरे देश को उम्मीदें हैं, आपकी नजर में सायना के अलावा और कौन-कौन हैं, जिनके मेडल जीतने की उम्मीद ज्यादा है?
उ. बतौर कोच मुझे हर खिलाड़ी से उम्मीदें हैं, ज्वाला और अश्विनी भी विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक ला चुके हैं और कश्यप ने इंडियन ओपन सुपर सीरीज में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। दीजू और ज्वाला काफी अनुभवी खिलाड़ी है, इन्होंने पिछले साल विश्व में छठी रैंक हासिल की थी। इन सभी के खेल को देखते हुए सभी से उम्मीदें बराबर की हैं।
प्र. बतौर कोच आपको सायना में ऐसा क्या दिखा, जो बाकियों में नहीं है?
उ. उसकी फाइटिंग स्पिरिट। सायना नेहवाल दुनिया के स्ट्रोकिंग खिलाडि़यों में से एक हैं। वो नया सीखने के लिए हर समय लालायित रहती हैं। वो मानसिक और भौतिक दोनो तरह से मजबूत खिलाड़ी हैं।
प्र. भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी कौन सा देश होगा? उससे भिड़ने के लिए कैसी तैयारियां हैं?
उ. बैडमिंटन में चीन भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी है। उससे टक्कर लेने के लिए हम प्रत्येक खिलाड़ी में खेल की हर विधा पर गहराई से फोकस कर रहे हैं। सिंगल्स में हमारे पास सिर्फ दो खिलाड़ी हैं- सायना और पी कश्यप और दोनों विश्व के बेहतरीन अटैकिंग खिलाडि़यों के रूप में जाने जाते है एवं दोनों की पावरफुल स्ट्रोक्स खेलने की क्षमता बेहतरीन है।
प्र. इंडोनेशिया को आप किस स्तर पर देख रहे हैं?
उ. हम इंडोनेशिया को हलके में तो नहीं ले सकते, लेकिन यह गेम पर निर्भर करेगा कि किस गेम में इंडोनेशिया भारत के सामने होता है। वैसे वे पुरुष युगल में काफी अच्छे हैं। लेकिन चीन और मलेशिया एंव डेनमार्क के खिलाड़ी एकल में अच्छे हैं।
प्र. भारतीय टीम लंदन के लिए कब रवाना होगी?
उ. अभी डेट तय नहीं हुई है।
प्र. जिन खिलाड़ियों को ओलंपिक का टिकट नहीं मिल सका है, उनसे आप क्या कहना चाहेंगे?
उ. मैं सिर्फ उनसे इतना कहना चाहूंगा कि वे सच्चे दिल और पूरी लगन के साथ कड़ी मेहनत करें और खुद से किये गये वादे को पूरा करें। भविष्य में उन्हें भी जरूर ओलंपिक का टिकट मिलेगा।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:14 [IST]
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