
नई दिल्ली। भारतीय टीम की ऑस्ट्रेलिया में असली परीक्षा 6 सितंबर से शुरू हो चुकी है। इस हाईप्रोफाइल सीरीज में भारत की नजरे 70 साल का सूखा खत्म करने पर जमी हैं। भारत ने अब तक कंगारू जमीन पर 44 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उसको केवल पांच बार ही जीत नसीब हुई है। भारत के पास यह सीरीज जीतने का एक सुनहरा मौका है। एडिलेड में पहले मैच का पहला दिन समाप्त हो चुका है। भारत ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया।
हालांकि मैच में भारत की शुरूआत ऐसी नहीं हो पाई जिसको सबको उम्मीदें थी। लेकिन चेतेश्वर पुजारा की संकटमोचक पारी की बदौलत टीम 250 रनों तक पहुंचने में कामयाब हुई जिसकी एक समय किसी को उम्मीद नहीं थी। मैच में भारत शुरू से संघर्ष करता तब नजर आया जब उसका शीर्ष क्रम कंगारू पेस बैटरी के सामने तहस-नहस हो गया। अभ्यास मैच की दूसरी पारी में फार्म मे लौटने वाले केएल राहुल ने सबको एक फिर से निराश कर दिया है। राहुल आउट होने वाले पहले बल्लेबाज बने। उसके बाद देखते ही देखते 10 ओवरो में विराट कोहली समेत भारत के तीनों शीर्ष क्रम के बल्लेबाज पैवेलियन जा चुके थे।
रोहित और ऋषभ पंत नजरे जमाकर हुए आउट
उसके बाद रहाणे भी कुछ खास नहीं कर सके और 13 रन के निजी स्कोर पर चलते बने। ऐसे में जब भारत के 4 विकेट 50 रनों के अंदर ही गिर गए थे तो रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी थी। पुजारा ने तो अपनी जिम्मेदारी आखिरी समय तक निभाई लेकिन हिटमैन के नाम से मशहूर रोहित शर्मा यहां जरूरत से ज्यादा उतावले पन के शिकार हो गए और नाथन लियोन को लगातार दो गेंदों पर छक्का जड़ने के लालच में टॉप ऐज लगवा बैठे। यही हाल ऋषभ पंत का रहा। वे और रोहित दोनों ही क्रीज पर नजरे जमाकर आउट हुए।
पुजारा के नाम पहला दिन
ऐसे में जब भारत को 127 रनों पर 6 विकेटों के झटके लग चुके थे, पुजारा-अश्विन ने मिलकर पारी को संभाला। दोनों ने अर्धशतकीय भागीदारी भी पूरी की। लेकिन 25 रनों के निजी स्कोर पर अश्विन भी पुजारा का साथ छोड़कर चलते बने। तब तक भारत 200 पार नहीं कर पाया था। उसके बाद पुजारा ने जो किया उसकी जितनी तारीफ की जाए उतना ही कम है।
पुजारा ने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ छोटी-छोटी लेकिन तेज गति की साझेदारियां करके टीम का स्कोर 250 रन पहुंचा दिया। इस दौरान पुजारा ने ना केवल अपना 16वां टेस्ट पूरा किया बल्कि कुछ हद तक टीम को मझधार से भी निकाला है। पुजारा आउट होने वाले दिन के अंतिम बल्लेबाज बने। उनको हेजलवुड की गेंद रन चुराते समय कमिंस ने जबरदस्त थ्रो से आउट किया। इसके साथ ही पहले दिन की समाप्ति हो चुकी है।
ऐसा ही जवाब देना होगा भारतीय गेंदबाजों को भी
जबकि कंगारूओ की ओर से उसके सभी मुख्य गेंदबाजों को दो-दो विकेट मिले हैं। स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर जैसे दिग्गजों के ना रहने के कारण इसको ऑस्ट्रेलिया की अब तक की कमजोर टीमों में गिना जा रहा है। लेकिन, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कंगारूओं को अपनी जमीन पर खेलने का फायदा मिला इस मैच में भी मिला। अब सारा दारोमदार भारतीय गेंदबाजों पर है। अगर वे कंगारूओं को बेहतर जवाब देने में कामयाब रहे तो ये मैच ही नहीं बल्कि पूरी सीरीज ही रोमांचक होने वाली है।
दोनो टीमें मैच में अपने इन ग्यारह खिलाड़ियों के साथ उतर रही हैं-
भारत- विराट कोहली (कप्तान), मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), रविचंद्रन अश्विन, जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी
ऑस्ट्रेलिया- टिम पेन (कप्तान/विकेटकीपर), एरोन फिंच, मार्कस हैरिस, उस्मान ख्वाजा, शॉन मार्श,पीटर हैंड्सकॉम्ब, ट्रेविस हेड, मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस, नाथन लॉयन, जोश हेजलवुड