Must Read: 'प्लेइंग इट माई वे' में चैपल से लेकर मुल्तान तक का जिक्र
नई दिल्ली। 'भारत रत्न' सचिन तेंदुलकर ने कई दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ियों की उपस्थिति में अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' का विमोचन किया। क्रिकेट विशेषज्ञ हर्षा भोगले ने कार्यक्रम की मेजबानी की और मंच पर मौजूद दिग्गज खिलाड़ियों सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, वासु परांजपे के अलावा सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वी.वी. एस. लक्ष्मण और खुद तेंदुलकर के साथ उनके जीवन और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान पर बातचीत की।
यही नहीं सचिन के इस यादगार लम्हें की साक्षी बनीं उनकी पत्नी अंजलि और उनकी बेटी सारा। जिनके साथ ही सचिन ने अपनी किताब लांच की। लांचिग के ठीक पहले गॉड ऑफ इंडियन क्रिकेट ने अपनी किताब की पहली प्रति अपनी जननी अपनी मां रजनी को पेश की और दूसरी प्रति अपने गुरू रमाकांत आचरेकर को पेश की।
17 साल के छोरे सचिन को पहली नजर में दिल दे बैठी थीं 22 साल की अंजलि
अपने किताब के बारे में बात करते हुए सचिन ने कहा कि यह पुस्तक मेरे लिए एक अलग तरह की पारी के समान है, जिस पर मैं पिछले तीन वर्षो से काम कर रहा था। अपने खेल की ही तरह मैंने इस पुस्तक में अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं का ईमानदारी के साथ वर्णन किया है। उम्मीद करता हूं पाठक इस पुस्तक का लुत्फ उठाएंगे।"
सचिन की बुक 'प्लेइंग इट माई वे' लांच, पहली प्रति मां दूसरी गुरू के नाम
इस किताब का प्रकाशन हैचेट इंडिया ने किया है, किताब सचिन तेंदुलकर की है, इसलिए इस किताब को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मच गई है। आपको जानकर हैरत होगी कि सचिन की इस आत्मकथा ने रिलीज के पहले ही दिन हार्डबैक पुस्तक की बिक्री के भारत में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पुस्तक की हार्डबैक प्रति की एक लाख प्रतियां रिलीज की गई हैं।
इस किताब के जरिये अपने आप को लोगों को सामने रखने की पूरी कोशिश सचिन ने की है आईये जानते हैं कि 456 पन्नों की किताब 'प्लेइंग इट माई वे' में सचिने ने किन-किन बातों का और किनके बारे में जिक्र किया है।
एक नजर नीचे की स्लाइडों में..

ग्रैग चैपल
सचिन की किताब 'प्लेइंग इट माई वे' रिलीज होने से पहले ही चर्चा में तब आयी जब इसके कुछ पार्ट मीडिया में लीक हो गये। सचिन ने अपनी किताब में इंडिया के पूर्व कोच ग्रैग चैपल को रिंगमास्टर कहते हुए संबोधित किया है और कहा है कि चैपल ने साल 2007 में विश्वकप से पहले राहुल द्रविड़ की जगह उन्हें कप्तान बनाने की पेशकश की थी। चैपल का बर्ताव सीनयर खिलाड़ियों से अच्छा नहीं था।

मु्ल्तान टेस्ट
सचिन ने लिखा है कि वो और राहुल द्रविड़ बहुत अच्छे दोस्त थे, हैं और रहेंगे लेकिन मुल्तान टेस्ट के दौरान हमारे बीच की बातें मीडिया में गलत ढंग से प्रचारित हुई थीं। मुझे इस बात का अफसोस है कि ड्रेसिंग रूम की बातें बाहर आ गईं लेकिन मुझे फक्र है कि द्रविड़ ने इन बातों को दिल से नहीं लगाया और हमारे बीच कभी भी मतभेद नहीं हुए।

बैटर हॉफ अंजलि तेंदुलकर
सचिन ने अपनी किताब में अपनी लाइफ पार्टनर अपने लव अंजलि के बारे में लिखा है। सचिन ने अंजली को ब्यूटी विद ब्रेन बताया है और कहा है कि हमारी शादी की बात हमारे घरवालों से अंजलि ने ही की थी।

लविंग डॉटर सारा
सचिन ने लिखा है कि मेरी जिंदगी का सबसे सुनहरा वक्त वो था जब मैंने अपनी बेटी सारा को पहली बार अपनी गोद में लिया था। उसकी छोटी-छोटी आंखों और मासूम मुस्कान ने मुझे अपने बचपन की याद दिला दी।

मीडिया
सचिन ने लिखा है कि अक्सर लोग मीडिया के बारे में उल्टा-सीधा बोलते हैं लेकिन मीडिया ने हमेशा मेरा साथ दिया। 'मेरा मानना है कि जबसे मैं भारत के लिए खेल रहा हूं तब से ही नहीं, बल्कि स्कूल के दिनों से ही मुझे मीडिया का सहयोग मिला। मुझे याद है कि जब मैंने अपना पहला शतक लगाया था तो उस पर लेख लिखा गया।'

भज्जी-कोहली-युवी-वीरू का गाना..तूझ में रब दिखता है..
सचिन ने लिखा है कि मेरे लिए वो वक्त अनमोल है जब विश्वकप जीतने के बाद ड्रेसिंग रूम में भज्जी-कोहली-युवी-वीरू ने मेरे लिए गाना गाया था कि तूझ में रब दिखता है.. यारा मैं क्या करूं।

कप्तानी का डर और गम
सचिन ने लिखा है कि बतौर कप्तान वो कभी संतुष्ट नहीं रहें क्योंकि उन्हें कभी उनके मन की टीम नहीं मिली लेकिन मैंने बहुत सारे कप्तानों के साथ अच्छा प्रदर्शन किया है।

विश्वकप 2011
मेरे जीवन का गोल्डन मूवेंट है भारत का विश्वकप जीतना..लेकिन सचिन ने अपनी किताब में जिक्र किया है कि उन्होंने इस स्वर्णिम मैच के आखिरी पलों को मैदान में लाइव नहीं देखा था क्योंकि उन्हें पहली बार घबराहट हो रही थी इसलिए वो मैच छोड़कर भगवान से प्रार्थना कर रहे थे जिसमें उनका साथ दिया था उनके क्लोन वीरेंद्र सहवाग ने।

फिक्सिंग पर कुछ नहीं
क्रिकेट के भगवान ने क्रिकेट के सभी रोचक पहलुओं का जिक्र अपनी किताब में किया है लेकिन उन्होंने क्रिकेट के दाग क्रिकेट फिक्सिंग पर कुछ नहीं लिखा है।

मंकीगेट कांड
सचिन ने ऑस्ट्रेलिया (2007-08) में मंकीगेट कांड के दौरान अपने गुस्से और उन्हें जो विश्वसघात महसूस हुआ, उसके बारे में बात की, उन्होंने खुलासा किया कि जब विवाद अपने चरम पर था, तब वह दौरे का बहिष्कार करना चाहते थे. उस विवाद के कारण भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट रिश्ते खटाई में पड़ने की स्थिति में पहुंच गये थे।

पूरी रात अंजलि और शैपिंयन संग नाचा
जिस रात टीम इंडिया ने विश्वकप जीता..उस वक्त मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। सचिन ने किताब में लिखा है जब मैं घर आया तो अंजलि ने बताया कि वो भी अंतिम क्षणों में मैच छोड़कर ऊपर वाले से प्रेयर कर रही थी लेकिन अब हम जीत गये हैं।लोगों के पागलपन की बात जब अंजलि ने मुझसे की तो मैं भी अपने कमरे में अंजलि और शैपियन संग पूरी रात नाचा था।
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