
दो महान खिलाड़ियों के बीच भिड़ंत में कौन कमाएगा सम्मान-
2014 में एंडरसन के सामने कोहली केवल 10 पारियों में 134 रन ही बना सके थे। जिमी को तब 25 विकेट मिले थे। लेकिन दो साल बाद जब इंग्लैंड भारत आया तो कोहली ने 655 रन ठोक दिए और एंडरसन को 3 मैचों में केवल 4 विकेट मिले। खैर अब तो वे 600 विकेट ले चुके हैं और भारत में ही महान कुंबले के 619 टेस्ट विकेटों के रिकॉर्ड को तोड़ने की कगार पर हैं।
एंडरसन कोहली को पाटा विकेटों का उस्ताद बता चिढ़ा चुके हैं। कोहली भी बदला लेने के लिए मशहूर हैं और उन्होंने 2018 में इंग्लैंड जाकर 5 मैचों में 593 रन बनाए। हालांकि एंडरसन की हेकड़ी नहीं निकली क्योंकि भारत तब सीरीज 1-4 से हारा था।
अब दो महान दिग्गजों के बीच फिर से मुकाबला देखने को मिलेगा।
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चार गेंदबाज या पांच- टीम चुनना भी है चुनौती
भारत को शुरुआती दो मुकाबले चेन्नई में खेलने है और इनके लिए ही चयनकर्ताओं ने टीम चुनी है। बाकी के दो टेस्टों के लिए बाद में टीम चुनी जाएगी। शुरुआती दो टेस्ट की टीम को देखकर साफ होता है कि भारत अपने स्पिनरों पर ही सवारी करने जा रहा है। अश्विन, सुंदर, कुलदीप और अक्षर पटेल स्पिनर के तौर पर मौजूद हैं तो ईशांत, बुमराह, सिराज और ठाकुर जैसे नाम पेस विभाग में हैं।
हम यह तो जानते हैं कि बुमराह, अश्विन और ईशांत का चुना जाना तय है लेकिन बाकी बॉलिंग को देखना दिलचस्प होगा। देखना होगा कि चार गेंदबाजी विकल्प के साथ जाया जाएगा या फिर पांच विकल्प के साथ।
अक्षर पटेल एक ऑलराउंडर के तौर पर जडेजा की जगह भरने के लिए आते हैं तो उनको मिलाकर पांच बॉलर का चयन होना तय है। पटेल का फर्स्ट क्लास बैटिंग औसत 35 के करीब है। आप अगर सुंदर के साथ जाते हैं तो यह ध्यान में रख लिया होगा कि इंग्लैंड के पास तीन बाए हाथ के बल्लेबाज हैं जिनको सुंदर की ऑफ स्पिन तंग कर सकती है।

ऋषभ पंत कौन सा रोल अदा करेंगे- कीपर या बल्लेबाज
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन सप्ताह पहले तीन टेस्ट मैचों में 274 रन बनाने के बावजूद ऋषभ पंत से टेस्ट में विकेटकीपिंग कराना अभी तक सवाल बना हुआ है पंत दस्ताने के साथ अभी भी एक अधूरे उत्पाद लगते हैं। हो सकता है कि कोहली उन्हें मध्य क्रम में एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में खेलने के लिए देख लें ताकी वे लीच और बेस पर दबाव डालने के लिए स्पिनरों के खिलाफ अपने आक्रामक स्ट्रोकप्ले का नजारा पेश कर सकें।
उस स्थिति में, रिद्धिमान साहा टर्न लेती सतहों पर स्टंप के पीछे मजबूत मामला बनाते हैं। हालांकि, बंगाल के क्रिकेटर की बल्लेबाजी का औसत 29.09 है। अगर सच कहें तो साहा एक बहुत ही औसत बल्लेबाज हैं और अब इस तरह के विकेटकीपर बल्लेबाजों का जमाना नहीं रहा। ये ऑलराउंडर विकेटकीपर का जमाना है। धोनी के बाद हमको कीपर में एक जबरदस्त बल्लेबाज भी देखने की आदत हो गई है। पंत ने भी इस आदत को पकाया है, भले ही वे टुकड़ों में प्रदर्शन करते रहें लेकिन उनसे आस लगी रहती है।
चेपॉक की सतह के साथ कुछ घास कवर होने के कारण, घरेलू टीम पंत को विकेटकीपर के रूप में खेलने का जोखिम भी उठा सकती है।

रूट, जो फैब-थ्री को फिर से 'फोर' कर चुके हैं-
जो रूट भारत के खिलाफ कभी नहीं चूकना चाहते। उन्होंने 15 टेस्टों में टीम इंडिया का सामना किया है और 1328 रन बनाए हैं। पिछले कुछ समय से रूट का प्रदर्शन कुछ ऐसा था कि उनको विराट कोहली, केन विलियमसन और स्टीव स्मिथ जैसे समकक्षों के मुकाबले नीचे माना जाने लगा। अब श्रीलंका दौरे पर रूट के दो शतकों ने फिर से फैब-4 क्लब को जीवंत कर दिया है। उन्होंने लंका में पहले मैच में दोहरा शतक लगाया जबकि दूसरे मैच में करियर की बेस्ट पारी में एक खेली और 186 रन बनाए। ये मुकाबला भी इंग्लैंड की झोली में गया।
इसके साथ ही रूट का एशिया में औसत 54.13 से आगे बढ़कर 46.07 हो चुका है।
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अंग्रेज स्पिनर कैसे तोड़ेंगे कोहली एंड कंपनी की तकनीक-
भारत में सफल होना है तो कुछ बढ़िया स्पिनर होना अहम हो जाता है। इंग्लैंड ने पिछली बार 2012 में भारत को उसकी धरती पर 2-1 से टेस्ट में हराया था। तब ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर जैसे दो शानदार इंग्लिश स्पिनर थे। अब अंग्रेजों के पास जैक लीच और डॉम बेस है। मोइन अली भी ऑलराउंडर हैं और फिरकी कर लेते हैं। लेकिन क्या आपको लगता है ये स्पिनर भारत को तंग करेंगे?
इस बात की आशंका बहुत कम है कि भारत इनसे परेशान होगा। दूसरी और श्रीलंका सीरीज कहती है कि बेस और लीच की जोड़ी ने मिलकर आपस में 22 विकेट बांटे थे। अली का तो भारत के खिलाफ रिकॉर्ड भी सही है। उन्होंने 7 टेस्टों में 22 विकेट बांटे हैं। लेकिन अली की गेंदबाजी में वो धार देखनी अभी बाकी है जो कभी हुआ करती थी। दूसरी और, बेस और लीच का यह पहला भारत दौरा है।

अब एक नजर मेहमानों की बैटिंग पर-
मोइन अली ऑलराउंडर बेहतरीन हैं और जब वे बेन स्टोक्स के साथ जुगलबंदी करते हैं तो इंग्लैंड दुनिया की शानदार और संतुलित टीम लगती है। रूट का फॉर्म भी आला है लेकिन क्या ये सब काफी होगा?
दरअसल इंग्लैंड को ओपनिंग में जवाब देना सीखना होगा अगर भारत को टक्कर देनी है तो। जबर रोरी बर्न्स ने डेब्यू किया है तबसे दो ही शतक लगाए हैं। जबकि वे 2018 के बाद से अब तक 21 टेस्ट खेल चुके हैं पर उनका औसत केवल 32.44 का है।
जब वे मौजूद नहीं थे तो डॉम सिबली और जैक क्राउली ने श्रीलंका में खूब संघर्ष किया। इन युवाओं का फुटवर्क एक समस्या है। याद दिला दें कि केविन पीटरसन ने खीजकर इन दोनों युवाओं को पाठ पढ़ाया था कि कैसे स्पिन को खेलना चाहिए। तब पीटरसन ने सोशल मीडिया पर राहुल द्रविड़ से मिले पुराने टिप्स को साझा किया था।
सिबली ने हालांकि अपनी अंतिम टेस्ट पारी में 144 गेंदों पर 56 रन बना थे। वे फॉर्म को बरकार रखेंगे तो इंग्लैंड को सहूलियत होगी। हालांकि अश्विन के सामने उनको कम ही सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
दूसरी और जॉनी बेयरस्टो को पहले दो टेस्टों से बाहर रखकर इंग्लैंड क्रिकेट ने मानों खुद की फजीहत बुला ली। सोशल मीडिया पर हर कोई उनको लताड़ रहा है।
इसके अलावा बाकी नामों में ओली पोप, डैन लॉरेंस और बेन फॉक्स होंगे। अगर भारत को सिरदर्द देना है तो स्टोक्स, अली और जोस बटलर जैसे अनुभवी नामों को विलो से बोलना होगा।


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