सिक्का खोटा है या किस्मत? बार-बार टॉस हारते विराट कोहली की बदकिस्मती के आंकड़े

पुणेः भारतीय टीम महाराष्ट्र क्रिकेट स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में एक और टॉस हार गई है। इस बार भी कप्तान विराट कोहली थे और यह इस सीरीज में उनका लगातार तीसरा टॉस था जो उन्होंने हारा। इंग्लैंड की टीम भारतीय परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए हर बार टॉस जीतकर पहले बैटिंग करती है और फिर ओस पड़ने के समय वह चेज करना पसंद करती है। सच तो यह है कि इस पूरे दौरे पर विराट कोहली 12 मैचों में केवल 2 बार टॉस जीत पाए हैं और पिछले 12 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में तो उनका रिकॉर्ड और भी अजीबोगरीब है जहां पर उन्होंने मात्र दो बार ही टॉस जीतने में सफलता हासिल की है।

अब टॉस एक ऐसी चीज है जिसके बारे में किसी खिलाड़ी की काबिलियत पर सवाल नहीं उठाया जा सकता क्योंकि यह पूरी तरह से सिक्के के घूमने का मामला है जो किसी भी तरफ गिर सकता है, पर विराट कोहली की किस्मत पर जरूर सवाल हैं जो वे बार-बार टॉस हार जाते हैं।

इंटरनेशनल मैचों में टॉस का रिकॉर्ड-

इंटरनेशनल मैचों में टॉस का रिकॉर्ड-

विराट कोहली ने अभी तक 200 मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की है जिसमें इंग्लैंड के खिलाफ तीसरा एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला भी शामिल है। सच तो यह है कि वह इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले केवल तीसरे कप्तान हैं उनसे पहले महेंद्र सिंह धोनी 332 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कप्तानी कर चुके हैं और मोहम्मद अजहरुद्दीन 221 मैचों में कप्तानी कर चुके हैं।

हालांकि इन 200 मैचों में विराट कोहली अभी तक केवल 85 बार ही टॉस जीत पाए हैं और वह 115 बार हार गए हैं। उनका टॉस में जीत और हार का जो अनुपात है वह 0.74 है। यह उस भारतीय कप्तान के लिए सबसे खराब है जिसने कम से कम 100 मैचों में कप्तानी की है।

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अलग प्रारूपों में कोहली की किस्मत का रिकॉर्ड-

अलग प्रारूपों में कोहली की किस्मत का रिकॉर्ड-

क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में यह टेस्ट क्रिकेट है जिसमें विराट कोहली का टॉस में जीत हार का अनुपात 0.82 है जो कि उनका बेस्ट है हालांकि सामान्य तौर पर बाकी कप्तानों के रिकॉर्ड के मुकाबले यह भी कम ही है। अगर हम T20 इंटरनेशनल मुकाबलों की बात करें तो यहां पर विराट कोहली ने 45 मैच खेले हैं जिसमें केवल 18 बार ही टॉस में उनको सफलता मिली है। यह किसी भी भारतीय कप्तान का क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में सबसे खराब रिकॉर्ड है।

 मौजूदा कप्तानों के साथ तुलना क्या कहती है-

मौजूदा कप्तानों के साथ तुलना क्या कहती है-

अगर हम मौजूदा क्रिकेट कप्तानों की बात करें जिन्होंने कम से कम 20 मैचों में अपनी टीम की कमान संभाली है तो विराट कोहली का टॉस में जीत और हार का अनुपात सबसे कम है। वेस्टइंडीज के कप्तान कीरोन पोलार्ड अभी तक इस मामले में बेस्ट नजर आते हैं। पोलार्ड ने वेस्ट इंडीज क्रिकेट की कमान लिमिटेड ओवर क्रिकेट में संभाली है और उनका अनुपात 1.13 है जो कि बाकी सब में बेहतर है। इसके अलावा इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन भी 1 से ऊपर का टॉस जीत/हार का अनुपात रखते हैं।

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तो क्या विराट कोहली सबसे बदकिस्मत कप्तान हैं?

तो क्या विराट कोहली सबसे बदकिस्मत कप्तान हैं?

अभी तक ऐसे 44 खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने 100 या उससे ज्यादा मैचों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कप्तानी की है। और इन सभी खिलाड़ियों में टॉस के जीत हार के अनुपात के मामले में विराट कोहली सबसे निचले स्थान पर बैठते हैं। एक बार फिर से विराट कोहली का टॉस का जीत और हार का अनुपात रिकॉर्ड देखते हैं। विराट कोहली ने 200 मैचों में 85 बार टॉस जीता है जबकि 115 में मात खाई है और उनका टॉस जीत हार का अनुपात 0.739 रहा रहा है।

वेस्टइंडीज के कप्तान रिची रिचर्ड्सन ने 155 मैचों में 66 बार टॉस जीता है और 89 बार हार मिली है उनका रिकॉर्ड 07.41 है। माइकल क्लार्क का रिकॉर्ड भी इन लोगों से बेहतर है जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 139 मैचों में कप्तानी की है और उनका अनुपात 0.805 है। इसके बाद ब्रायन लारा के रिकॉर्ड को हम देख सकते हैं जिन्होंने 172 मैचों में 77 में टॉस जीता है और और 95 बार हारा है। इस दौरान उनका अनुपात 0.811 रहा है। पाकिस्तान की टीम के विवादित कप्तान सरफराज अहमद ने 100 मैचों के दौरान अपने देश की कमान संभाली और उनको 45 बार टॉस में जीत मिली जबकि 55 बार हार और उनका अनुपात रिकॉर्ड 0.818 है।

बड़े मैचों में टॉस के दौरान कोहली की किस्मत का हाल-

बड़े मैचों में टॉस के दौरान कोहली की किस्मत का हाल-

विराट कोहली चैंपियंस ट्रॉफी 2017 से पहले भारत के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और टी20 कप्तान बनाए गए थे। उसके बाद फाइनल में पाकिस्तान के साथ भारत का मुकाबला हुआ था जो उन्होंने जीता था लेकिन उनका गेंदबाजी करने का फैसला भारत पर बहुत भारी पड़ा क्योंकि पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए 339 रन ठोक दिए थे जबकि भारतीय टीम चेज करते हुए 158 रनों पर ही ऑल-आउट हो गई थी। इसके बाद वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत ने टॉस हारा और उनको फील्डिंग करने के लिए कहा गया। तब कीवी टीम ने यह मुकाबला 18 रनों से जीत लिया और भारत को विश्व कप से बाहर कर दिया।

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Story first published: Sunday, March 28, 2021, 19:30 [IST]
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