लॉर्ड्स पर 25 साल बाद आई मिलन की शाम
लेकिन उस मामूली से प्यादे ने कुछ ऐसी चाल चली कि बादशाह चारों खाने चित हो गया.
वेस्टइंडीज़ को मात दे 1983 में भारत बना था विश्व क्रिकेट चैंपियन.
उस ऐतिहासिक लम्हे के 25 साल बाद कपिल देव के नेतृत्व में लॉर्डस में इकट्ठा हुए विश्व विजेता टीम के सभी धुरंधर जिसमें शामिल थे सुनील गावस्कर, मदन लाल, मोहिंदर अमरनाथ,रॉजर बिन्नी और संदीप पाटिल जैसे खिलाड़ी.
तारीख़ वही, मैदान वही, ढलती शाम की वही मंज़र....तो कैसा लग रहा था दोबारा लॉर्ड्स आकर फ़ाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ को.
वे कहते हैं," सब कुछ वैसा ही है. वैसी ही धूप खिली है, वैसा ही दिन है. यादें एकदम ताज़ा हैं.हम सब खिलाड़ी साथ आए हैं इतने सालों के बाद, बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है कि ये वही जगह है जहाँ हमने इतिहास बनाया था जो आज की पीढ़ी के लिए यादगार बन गया है. "
यही थी वो जादूई गेंद
यही वो जादूई गेंद थी जिससे भारत वर्ल्ड कप जीता था
सफ़र अगर 25 साल पुराना हो तो यादों का पिटारा सा खुल जाता है. 1983 विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर रहे सैयद किरमानी इस मिलन के बारे में कहते हैं, "हमारे बच्चे, पोता-पोती, नाती-नातिन जब कभी इस मिलन का वीडियो देखेंगे तो सोचेंगे कि हमारे दादा, हमारे नाना भारत के लिए खेले थे, आहा वर्ल्ड कप जीते थे. तो उन्हें खुशी होगी और अगर वो कभी भारत का नाम रोशन करना चाहेंगे तो प्रेरणा मिलेगी."
समारोह में बलविंदर सिंह संधू एक गेंद लेकर घूमते रहे. जब हमने उनसे इस गेंद की ख़ासियत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यही वो जादूई गेंद जो वर्ल्ड कप में इस्तेमाल हुई थी और जिससे उन्होंने ग्रीनिज को आउट किया था. ये गेंद तब से सुनील गावस्कर के पास है.
इस ख़ूबसूरत शाम के आयोजन का श्रेय जाता है सुनील गावस्कर को. उन्होने एक साल पहले ही लॉर्ड्स का लॉंग रूम बुक कर लिया था इस खा़स दिन के इंतज़ार में.
लिटिल मास्टर ने अपनी भावनाएँ कुछ यूँ बयां की," उस दिन जब कपिल देव ने अपने सर के ऊपर वर्ल्ड कप उठाया था उससे ज़्यादा फ़क्र मुझे कभी महसूस नहीं हुआ."
कपिल को चाहिए दूसरा वर्ल्ड कप
विश्व विजेता टीम के खिलाड़ी लॉडर्स पर उतरे
पूरे समारोह में जहाँ हर कोई पुरानी यादों में खोया था वहीं एक अच्छे रणनीतिकार की तरह पूर्व कप्तान कपिल देव की नज़र भविष्य पर टिकी हुई थी.
जीत की 25वी सालगिरह पर कपिल देव ने इच्छा जताई कि अगले वर्ल्ड कप में ट्रॉफ़ी फिर भारत लौटे.
कपिल ने उम्मीद जताई कि दस साल बाद फिर से ऐसा ही मिलन होगा और इसी बीच हंसी मज़ाक चलता रहा, पूर्व खिलाड़ियों ने एक दूसरे पर खूब जुमले कसे.
क्लाइमैक्स हुआ जब कपिल देव समेत पूरी टीम बालकनी पहुँची और विश्व कप एक बार फिर थामा. और उसके बाद खुली शैम्पेन की बोतल ठीक वैसे ही जैसे 25 साल पहले खुली थी.
जब किसी ने पूछा कि उस रात जश्न कैसा मनाया था तो कपिल बोले कि खु़शी में सब नशे में इतने चूर थे कि क्या हुआ किसी को याद नहीं है.
1983 में विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की बातें किताबों और अख़बारों में पढ़ी हैं, किस्सों में सुनी है-ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ कपिल देव के वो नाबाद 175 रन, फ़ाइनल में ग्रीनिज को चकमा देती बलविंदर सिंह संधू की गेंद, मदनलाल की गेंद पर रिचर्डस का कैच लेते कपिल देव, फ़ाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ की गेंदबाज़ी.. पर अफ़सोस की बाल मन के स्मृति पटल पर वो यादें दर्ज नहीं हुई.
उस करिश्मे को ख़ुद न देख पाने की टीस हमेशा मन में रही. लेकिन बुधवार शाम यानी 25 जून 2008 को लंदन के लॉर्डस मैदान पर जो मंज़र देखा उसने पुरानी टीस के निशां मिटा दिए.
वेस्टइंडीज़ को मात दे 1983 में भारत बना था विश्व क्रिकेट चैंपियन.
उस ऐतिहासिक लम्हे के 25 साल बाद कपिल देव के नेतृत्व में लॉर्डस में इकट्ठा हुए विश्व विजेता टीम के सभी धुरंधर जिसमें शामिल थे सुनील गावस्कर, मदन लाल, मोहिंदर अमरनाथ,रॉजर बिन्नी और संदीप पाटिल जैसे खिलाड़ी.
तारीख़ वही, मैदान वही, ढलती शाम की वही मंज़र....तो कैसा लग रहा था दोबारा लॉर्ड्स आकर फ़ाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ को.
वे कहते हैं," सब कुछ वैसा ही है. वैसी ही धूप खिली है, वैसा ही दिन है. यादें एकदम ताज़ा हैं.हम सब खिलाड़ी साथ आए हैं इतने सालों के बाद, बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है कि ये वही जगह है जहाँ हमने इतिहास बनाया था जो आज की पीढ़ी के लिए यादगार बन गया है. "
यही थी वो जादूई गेंद
यही वो जादूई गेंद थी जिससे भारत वर्ल्ड कप जीता था
सफ़र अगर 25 साल पुराना हो तो यादों का पिटारा सा खुल जाता है. 1983 विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर रहे सैयद किरमानी इस मिलन के बारे में कहते हैं, "हमारे बच्चे, पोता-पोती, नाती-नातिन जब कभी इस मिलन का वीडियो देखेंगे तो सोचेंगे कि हमारे दादा, हमारे नाना भारत के लिए खेले थे, आहा वर्ल्ड कप जीते थे. तो उन्हें खुशी होगी और अगर वो कभी भारत का नाम रोशन करना चाहेंगे तो प्रेरणा मिलेगी."
समारोह में बलविंदर सिंह संधू एक गेंद लेकर घूमते रहे. जब हमने उनसे इस गेंद की ख़ासियत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यही वो जादूई गेंद जो वर्ल्ड कप में इस्तेमाल हुई थी और जिससे उन्होंने ग्रीनिज को आउट किया था. ये गेंद तब से सुनील गावस्कर के पास है.
इस ख़ूबसूरत शाम के आयोजन का श्रेय जाता है सुनील गावस्कर को. उन्होने एक साल पहले ही लॉर्ड्स का लॉंग रूम बुक कर लिया था इस खा़स दिन के इंतज़ार में.
लिटिल मास्टर ने अपनी भावनाएँ कुछ यूँ बयां की," उस दिन जब कपिल देव ने अपने सर के ऊपर वर्ल्ड कप उठाया था उससे ज़्यादा फ़क्र मुझे कभी महसूस नहीं हुआ."
कपिल को चाहिए दूसरा वर्ल्ड कप
विश्व विजेता टीम के खिलाड़ी लॉडर्स पर उतरे
पूरे समारोह में जहाँ हर कोई पुरानी यादों में खोया था वहीं एक अच्छे रणनीतिकार की तरह पूर्व कप्तान कपिल देव की नज़र भविष्य पर टिकी हुई थी.
जीत की 25वी सालगिरह पर कपिल देव ने इच्छा जताई कि अगले वर्ल्ड कप में ट्रॉफ़ी फिर भारत लौटे.
कपिल ने उम्मीद जताई कि दस साल बाद फिर से ऐसा ही मिलन होगा और इसी बीच हंसी मज़ाक चलता रहा, पूर्व खिलाड़ियों ने एक दूसरे पर खूब जुमले कसे.
क्लाइमैक्स हुआ जब कपिल देव समेत पूरी टीम बालकनी पहुँची और विश्व कप एक बार फिर थामा. और उसके बाद खुली शैम्पेन की बोतल ठीक वैसे ही जैसे 25 साल पहले खुली थी.
जब किसी ने पूछा कि उस रात जश्न कैसा मनाया था तो कपिल बोले कि खु़शी में सब नशे में इतने चूर थे कि क्या हुआ किसी को याद नहीं है.
1983 में विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की बातें किताबों और अख़बारों में पढ़ी हैं, किस्सों में सुनी है-ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ कपिल देव के वो नाबाद 175 रन, फ़ाइनल में ग्रीनिज को चकमा देती बलविंदर सिंह संधू की गेंद, मदनलाल की गेंद पर रिचर्डस का कैच लेते कपिल देव, फ़ाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ की गेंदबाज़ी.. पर अफ़सोस की बाल मन के स्मृति पटल पर वो यादें दर्ज नहीं हुई.
उस करिश्मे को ख़ुद न देख पाने की टीस हमेशा मन में रही. लेकिन बुधवार शाम यानी 25 जून 2008 को लंदन के लॉर्डस मैदान पर जो मंज़र देखा उसने पुरानी टीस के निशां मिटा दिए.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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