हॉकी विश्व कप : जर्मनी को हराकर आस्ट्रेलिया बना चैम्पियन
जयंत के. सिंह
नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में मौजूदा चैम्पियन जर्मनी को 2-1 से हराकर हीरो होंडा एफआईएच विश्व कप खिताब जीत लिया है। इसके साथ आस्ट्रेलिया ने खिताबी हैट्रिक पूरी करने की जर्मनी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जर्मनी ने 2002 और 2006 विश्व कप में आस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता था।
वर्ष 1986 के बाद पहली बार खिताबी जीत हासिल करने वाली आस्ट्रेलियाई टीम के लिए पहला गोल एडवर्ड ओकेंडन ने किया। ओकेंडन ने मैच के छठे मिनट में जर्मनी के गोलकीपर टिम जेसॉल्ट को छकाकर अपनी टीम के लिए एक शानदार फील्ड गोल किया।
भारत में 28 वर्ष के अंतराल के बाद खेले जा रहे विश्व कप के खिताबी मुकाबले का गवाह बनने के लिए नेशनल स्टेडियम में करीब 15,000 हॉकी प्रेमी मौजूद थे।
जोश और जुनून से भरपूर माहौल में खेले गए इस मुकाबले में 1-0 की बढ़त लेने के बाद आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को अपने क्षेत्र में घुसने का कम ही मौका दिया।
आस्ट्रेलियाई टीम जानती थी कि 1-0 के अंतर से भी विश्व कप जीतना उसके लिए उतना ही मायने रखेगा, जितना कि इससे बड़े अंतर से। ऐसे में उसने अपनी रक्षापंक्ति पर ध्यान दिया।
अगले 41 मिनट तक दोनों टीमों के बीच आगे निकलने और बराबरी करने की होड़ चलती रही। दर्शकों ने भी पल-पल बदलते हालात का जमकर लुत्फ लिया।
इसी बीच 47वें मिनट में मिले दूसरे पेनाल्टी कार्नर पर जर्मन खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। यह मौका बराबरी का गोल करने का हो सकता था और मोरित्ज फुस्र्ट्े ने अपने साथियों की इसी उम्मीद को सच में बदलते हुए एक शानदार गोल किया। जर्मनी 1-1 की बराबरी कर चुका था।
जर्मनी की टीम ने अगले 11 मिनटों तक स्कोर 1-1 बनाए रखा और गोल करने का प्रयास करती रही लेकिन उसका दुर्भाग्य था कि 59वें मिनट में आस्र्ट्ेलिया को पेनाल्टी कार्नर मिला। ल्यूक डोरनर एक बार ड्रैग फ्लिक करने को तैयार थे।
दर्शकों की सांसें रुकी हुई थीं। तभी डोरनर ने गेंद को जर्मन पोस्ट में डाल दिया। आस्ट्रेलिया 2-1 से आगे हो चुका था। डोरनर ने इस टूर्नामेंट में आठवां गोल किया। इस गोल के साथ सर्वाधिक गोल की दौड़ में वह हॉलैंड के ताएकी ताएकेमा के बराबरी पर आ गए।
एक मिनट बाद ही जर्मनी को एक और पेनाल्टी कार्नर मिला लेकिन वह उसका लाभ नहीं उठा सका। गेंद आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास आते ही जर्मनी की रक्षापंक्ति कमजोर होती दिखी और नतीजा हुआ कि आस्ट्रेलिया ने 64वें मिनट में एक और पेनाल्टी कार्नर हासिल कर लिाया। हालांकि इस पर गोल करने का उसका प्रयास बेकार साबित हुआ।
जर्मनी के हाथों लगातार दो बार फाइनल गंवाती आ रही आस्ट्रेलियाई टीम ने प्रतिष्ठा के लिए हुई इस 'लड़ाई' में बाजी मार ली। इससे पहले यह बाजी जर्मनी के नाम रही थी। कुकाबुरा टीम में हर शनिवार को हर वो बात दिखी जो एक चैम्पियन टीम में होनी चाहिए।
इस हार ने जर्मन टीम को जहां खिताब की हैट्रिक पूरी करने नहीं दिया वहीं कुकाबुरा टीम ने दूसरा खिताब जीता। उसने 1986 में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर इस खिताब पर कब्जा किया था। इसके बाद हालांकि उसे एक भी खिताबी जीत नहीं मिल सकी थी।
आस्ट्रेलिया ने इससे पहले एक खिताबी जीत के अलावा विश्व कप में दो बार रजत पदक और चार बार कांस्य पदक हासिल किए थे। यह मैच जर्मनी के लिए इसलिए खास था क्योंकि इसे जीतकर वह हॉकी विश्व कप में लगातार तीन बार खिताब हासिल करने वाली एकमात्र टीम बन सकती थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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