धोनी ने 3 धमाकेदार पारियों से बताया विश्व कप 2019 जिताने में क्या होगी उनकी असल भूमिका

नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज खत्म हो गई। भारत ने 2-1 से टेस्ट सीरीज जीतने के बाद वनडे सीरीज भी 2-1 से अपने नाम कर ली। इस सीरीज में भारत ने जीत दर्ज तो की ही इसके साथ भारत को अपने उस हीरे की चमक वापस मिल गई जिसकी चमक से भारत ने कई हार के जंगल पार किए हैं और आगे पार पाता रहेगा। क्रिकेट की गणित में धोनी की वैल्यू पाई की तरह है जिसका भाग करने पर अंक छोटा बड़ा हो सकता है लेकिन खत्म नहीं हो सकता। साल 2018 और 2017 धोनी के लिए बुरे ख्वाब की तरह रहा। हाथों में गेंद तो आती थी लेकिन उन्हीं हाथों से बल्लेबाजी करते हुए रन नहीं बनते थे।

सवालों का दौर:

सवालों का दौर:

धोनी ने का करियर 14 साल से थोड़ा लंबा रहा है। इस दौरान उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत की झोली में वो सभी ट्रॉफी डाली जिसे जीतने के लिए कई क्रिकेट टीमों ने सिर्फ ख्वाब में ही सोचा होगा। धोनी ने भारत के लिए कुछ भी किया हो लेकिन धोनी की लो स्कोरिंग पारियां के आते ही उन पर सवालों की बौछार हुई। 2011-12 में टेस्ट की पारियों में धोनी के बल्ले से विदेश की पारियों में रन नहीं निकल रहे थे। 2014-2015 में क्रिकेट के लंबे प्रारुप टेस्ट से धोनी ने संन्यास ले लिया और फिर सवाल उठा की मुश्किल में धोनी ने भारत का साथ छोड़ दिया। हाल के दिनों की बात करें तो साल 2017 के बाद अब जाकर धोनी के बल्ले से अर्धशतक निकला है। 2018 में धोनी पूरी तरह से बुरे फार्म से जूझते हुए नजर आए। इस दौरान 20 वनडे मैचों में 25 की औसत से 275 रन ही बना सके। यह विकेटकीपर बल्लेबाज इस दौरान एक भी अर्धशतक नहीं जड़ पाया। उनका स्ट्राइक रेट भी इस बीच केवल 71.42 का रहा जो कि उनके करियर स्ट्राइक रेट से काफी कम था। इस दौरान भी सवाल उठा कि धोनी को अब संन्यास ले लेना चाहिए । उनकी जगह युवा खिलाड़ियों को मौका देना चाहिए। लेकिन कहावत है कि शेर बूढ़ा हो जाता है लेकिन शिकार करना नहीं भूलता। धोनी के साथ भी कुछ ऐसा ही है। धोनी ऐसा सूरज हैं जो भारत का अंधेरा छांटने के लिए हमेशा उदय करेगा।

सात समंदर पार कोहली को धोनी की जरूरत :

सात समंदर पार कोहली को धोनी की जरूरत :

मई 2019 में इंग्लैंड में क्रिकेट विश्व कप खेला जाना है । इस सवाल पर सोचना विचारना कि धोनी खेंलेगे या नहीं यह फिजूल में ही दिमाग की नसों पर जोर डालना है। विदेशी पिचों पर भारत को अनुभवी खिलाड़ी की जरूरत होगी। विराट कोहली बल्ले से भले पिच पर परफेक्ट हों लेकिन कप्तानी करते हुए कोहली को सात समंदर पारी भी धोनी की जरूरत पड़ेगी। ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक विकल्प हो सकते हैं लेकिन धोनी का फिलहाल रिप्लेसमेंट जरूरी नहीं हैं। वक्त ने बात दिया कि धोनी वापसी करने की भी क्षमता रखते हैं बस मौका मिलने की बात है। महेंद्र सिंह धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में तीन मैच खेलकर बेमिसाल औसत से 193 रन बनाए। सिडनी में खेले गए पहले वनडे में धीमी पारी की वजह से धोनी की आलोचना की गई थी। एडिलेड के दूसरे वनडे में उन्होंने ना सिर्फ 54 गेंद पर 55 रन की पारी खेली बल्कि आखिरी ओवर में छक्का लगा मैच भी भारत के हक में किया। निर्णायक मैच में 87 रन की पारी खेल धोनी ने भारत को सीरीज का विजेता बनाया।

धोनी दुनिया के बेस्ट फिनिशर हैं:

धोनी दुनिया के बेस्ट फिनिशर हैं:

महेंद्र सिंह धोनी रन की पीछा करते हुए टीम को जीत दिलाने के लिए जाने जाते हैं। दुनिया के महानतम फिनिशर में उनकी गिनती होती है। रन की पीछा करते हुए धोनी का औसत 103.07 का हो गया है। 79 मैचों में भारत के लिए लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने 2783 रन बनाए हैं। विराट कोहली का औसत 97.88 का है। दुनिया के बेहतरीन फिनिशर में शुमार पूर्व ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज माइकल बेवन का स्ट्राइक रेट 86.25 का है। वहीं पूर्व दक्षिण अफ्रीकी कप्तान एबी डिविलिर्स ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 82.77 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं।

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Story first published: Friday, January 18, 2019, 18:47 [IST]
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