मैं जानता हूं, जब जेब में पैसे नहीं होते तो कैसा लगता है: तेंदुलकर
लंदन। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर अच्छी तरह से समझते हैं कि जब एक गरीब या मध्यम वर्ग का बच्चा सीमित साधनों में क्रिकेट खेलता है तो उसकी मनोदशा क्या होती है, उसे कैसे खेलना पड़ता है और कैसीी इच्छाओं पर अंकुश लगाना होता है।
सचिन स्पोर्टस उपकरण बनाने वाली कंपनी स्पार्टन इंटरनेशनल में अपने निवेश के बारे में ऐलान करते हुए कहा कि वो दुनिया के गरीब बच्चों की मदद करना चाहते हैं ताकि वे क्रिकेट खेल सकें, जिससे देश की कोई प्रतिभा पैसों के कारण बर्बाद ना हो।
देश की कोई प्रतिभा पैसों के कारण बर्बाद ना हो
सचिन ने कहा कि मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से था, मुझे पता है कि जब बच्चे को ये डर होता है कि अगर उसका बल्ला टूट जायेगा तो फिर उसे दूसरा बल्ला नहीं मिलेगा तो कैसा महसूस होता है?
मैं नहीं चाहता कि कोई भी बच्चा डर के साथ जिये
मैं उस दर्द और डर दोनों को जानता हूं इसलिए मैं नहीं चाहता कि कोई भी बच्चा इस डर के साथ जिये। इसलिए मैं कोशिश करूंगा कि किसी भी टैलेंटड क्रिकेटर का टैलेंट पैसे के कारण ना रूकें और ना बर्बाद हो।
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