राष्ट्रमंडल खेल : खेलों के रंग में डूबी दिल्ली!
नई दिल्ली। पश्चिम और एशिया प्रशांत देशों की मीडिया लगातार यह खबरें प्रकाशित और प्रसारित कर रही है कि भारत 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दर्शक नहीं जुटा पा रहा है लेकिन इस बात में बिल्कुल सच्चाई नहीं है। सच तो यह है कि राजधानी दिल्ली इन दिनों खेलों के रंग में पूरी तरह डूब चुकी है।
इस बात को साबित करने के लिए सोमवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जुटी भीड़ काफी है। सोमवार को इस स्टेडियम में लगभग 50,000 लोगों ने एथलेटिक्स का लुत्फ लिया। ऐसा तब हुआ, जब भारत में एथलेटिक्स को वह लोकप्रियता प्राप्त नहीं, जो टेनिस, क्रिकेट, फुटबाल और मुक्केबाजी को है।
सोमवार को प्रकाशित आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के समाचार पत्रों ने नेटबाल और लॉन बॉल जैसे खेलों के दौरान स्टेडियमों की तस्वीरें प्रकाशित करके यह साबित करना चाहा कि दर्शकों की संख्या के लिहाज से 19वां राष्ट्रमंडल खेल फ्लॉप रहा है।
देखें: राष्ट्रमंडल खेलों पर विशेष
दूसरी ओर, भारत के लोग मुक्केबाजी, कुश्ती, एथलेटिक्स, हॉकी, टेनिस और टेबल टेनिस मुकाबलों के दौरान टिकटें नहीं मिलने पर निराश दिखे। 17 में से कुल सात खेलों में स्टेडियम पूरी तरह भरे रहे। तैराकी, जिमनास्टिक, साइकिलिंग, भरोत्तोलन और रग्बी सेवन मुकाबलों के दौरान भी भारी संख्या में लोगों ने स्टेडियमों का रुख किया।
सोमवार को चूंकि सभी दफ्तर खुले रहते हैं, लिहाजा इस दिन नेहरू स्टेडियम में 50,000 की भीड़ जुटने की किसी को भी आशा नहीं थी। भीड़ खेलों को लेकर इतनी उत्साहित थी कि उसके उत्साह ने जहां डिस्कस थ्रोअर सीमा अंतिल में हौसला भर दिया वहीं 800 मीटर दौड़ में भारतीय धाविका लुका इतनी घबराईं कि उनके हाथ से पदक निकल गया।
लुका ने बाद में कहा कि उन्होंने अपने अब तक के करियर में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का कभी सामना नहीं किया था। अंतिल से लेकर लुका और सानिया मिर्जा से लेकर भारतीय हॉकी टीम के कोच जोस ब्रासा तक दर्शकों की तारीफ कर चुके हैं। भारत-पाकिस्तान के चिर प्रतिक्षित मुकाबले के बाद ब्रासा ने तो इतना तक कह दिया था कि उन्हें हॉकी स्टेडियम के दर्शक बार्सिलोना और रियाल मेड्रिड के बीच होने वाले मुकाबले के दौरान जुड़ने वाले दर्शकों से ज्यादा उत्साहित नजर आए।
सानिया मिर्जा ने पत्रकार सम्मेलन में दर्शकों के उत्साह का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने दिल्ली में आज तक किसी टेनिस मुकाबले के लिए इतनी बड़ी संख्या में दर्शकों को स्टेडियम में नहीं देखा। यही बात पुरुषों का एकल खिताब जीत चुके सोमदेव देवबर्मन, महेश भूपति और लिएंडर पेस जैसे खिलाड़ी कह चुके हैं।
डिस्कस थ्रो का स्वर्ण जीतने वाली कृष्णा पूनिया ने 52 साल में पहली बार देश को मिली इस सफलता को देश को ही समर्पित कर दिया। जाहिर तौर पर कृष्णा ने स्टेडियम में जुटे हजारों-हजारों लोगों को देखते हुए यह घोषणा की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूनिया ने यह भी कहा कि भारत ने तमाम दुश्वारियों और आलोचनाओं के बाद आखिरकार अपनी एकता से इस आयोजन में चार चांद लगा दिया है।
सभी आयोजन स्थलों पर सुरक्षा की इतनी कड़ी व्यवस्था की गई है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबले के लिए नेशनल स्टेडियम में तिल रखने की जगह नहीं थी। वह भी तब इस मुकाबले के लिए अब तक की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के कारण दर्शकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और नेहरू स्टेडिय में पहुंचने ेक लिए तो उन्हें कई किलोमीटर तक चलना पड़ा है।
यही नहीं, गेम लेन के कारण लोगों को अपने वाहनों से स्टेडियमों तक पहुंचने में भी काफी दिकक्त और देरी का सामना कना पड़ता है। इसमें अगर थोड़ी ढील रहती तो शायद सोमवार को या फिर आने वाले दिनों में नेहरू स्टेडियम की सीटें कम पड़ जातीं। ऐसे में पश्चिम की मीडिया का यह प्रचारित करना कि भारत अपने घर में हो रहे अब तक के सबसे बड़े खेल आयोजन के लिए दर्शक नहीं जुटा सका, सर्वथा अनुचित है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
इस बात को साबित करने के लिए सोमवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जुटी भीड़ काफी है। सोमवार को इस स्टेडियम में लगभग 50,000 लोगों ने एथलेटिक्स का लुत्फ लिया। ऐसा तब हुआ, जब भारत में एथलेटिक्स को वह लोकप्रियता प्राप्त नहीं, जो टेनिस, क्रिकेट, फुटबाल और मुक्केबाजी को है।
सोमवार को प्रकाशित आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के समाचार पत्रों ने नेटबाल और लॉन बॉल जैसे खेलों के दौरान स्टेडियमों की तस्वीरें प्रकाशित करके यह साबित करना चाहा कि दर्शकों की संख्या के लिहाज से 19वां राष्ट्रमंडल खेल फ्लॉप रहा है।
देखें: राष्ट्रमंडल खेलों पर विशेष
दूसरी ओर, भारत के लोग मुक्केबाजी, कुश्ती, एथलेटिक्स, हॉकी, टेनिस और टेबल टेनिस मुकाबलों के दौरान टिकटें नहीं मिलने पर निराश दिखे। 17 में से कुल सात खेलों में स्टेडियम पूरी तरह भरे रहे। तैराकी, जिमनास्टिक, साइकिलिंग, भरोत्तोलन और रग्बी सेवन मुकाबलों के दौरान भी भारी संख्या में लोगों ने स्टेडियमों का रुख किया।
सोमवार को चूंकि सभी दफ्तर खुले रहते हैं, लिहाजा इस दिन नेहरू स्टेडियम में 50,000 की भीड़ जुटने की किसी को भी आशा नहीं थी। भीड़ खेलों को लेकर इतनी उत्साहित थी कि उसके उत्साह ने जहां डिस्कस थ्रोअर सीमा अंतिल में हौसला भर दिया वहीं 800 मीटर दौड़ में भारतीय धाविका लुका इतनी घबराईं कि उनके हाथ से पदक निकल गया।
लुका ने बाद में कहा कि उन्होंने अपने अब तक के करियर में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का कभी सामना नहीं किया था। अंतिल से लेकर लुका और सानिया मिर्जा से लेकर भारतीय हॉकी टीम के कोच जोस ब्रासा तक दर्शकों की तारीफ कर चुके हैं। भारत-पाकिस्तान के चिर प्रतिक्षित मुकाबले के बाद ब्रासा ने तो इतना तक कह दिया था कि उन्हें हॉकी स्टेडियम के दर्शक बार्सिलोना और रियाल मेड्रिड के बीच होने वाले मुकाबले के दौरान जुड़ने वाले दर्शकों से ज्यादा उत्साहित नजर आए।
सानिया मिर्जा ने पत्रकार सम्मेलन में दर्शकों के उत्साह का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने दिल्ली में आज तक किसी टेनिस मुकाबले के लिए इतनी बड़ी संख्या में दर्शकों को स्टेडियम में नहीं देखा। यही बात पुरुषों का एकल खिताब जीत चुके सोमदेव देवबर्मन, महेश भूपति और लिएंडर पेस जैसे खिलाड़ी कह चुके हैं।
डिस्कस थ्रो का स्वर्ण जीतने वाली कृष्णा पूनिया ने 52 साल में पहली बार देश को मिली इस सफलता को देश को ही समर्पित कर दिया। जाहिर तौर पर कृष्णा ने स्टेडियम में जुटे हजारों-हजारों लोगों को देखते हुए यह घोषणा की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूनिया ने यह भी कहा कि भारत ने तमाम दुश्वारियों और आलोचनाओं के बाद आखिरकार अपनी एकता से इस आयोजन में चार चांद लगा दिया है।
सभी आयोजन स्थलों पर सुरक्षा की इतनी कड़ी व्यवस्था की गई है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबले के लिए नेशनल स्टेडियम में तिल रखने की जगह नहीं थी। वह भी तब इस मुकाबले के लिए अब तक की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के कारण दर्शकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और नेहरू स्टेडिय में पहुंचने ेक लिए तो उन्हें कई किलोमीटर तक चलना पड़ा है।
यही नहीं, गेम लेन के कारण लोगों को अपने वाहनों से स्टेडियमों तक पहुंचने में भी काफी दिकक्त और देरी का सामना कना पड़ता है। इसमें अगर थोड़ी ढील रहती तो शायद सोमवार को या फिर आने वाले दिनों में नेहरू स्टेडियम की सीटें कम पड़ जातीं। ऐसे में पश्चिम की मीडिया का यह प्रचारित करना कि भारत अपने घर में हो रहे अब तक के सबसे बड़े खेल आयोजन के लिए दर्शक नहीं जुटा सका, सर्वथा अनुचित है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:22 [IST]
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