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आईसीसी-पाक समझौते से भारत को मिलेगी राहत

रविकांत सिंह

खेल विश्लेषक

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आख़िरकार आईसीसी से 2011 विश्व कप के आयोजन को लेकर समझौता कर ही लिया.

मेज़बानी का दावा छोड़ने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट अधिकारियों ने एक करोड़ 80 लाख अमरीकी डॉलर में सौदा पक्का किया.

अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी के अध्यक्ष एजाज़ बट ने धीरे से बोर्ड पर अपनी पकड़ मज़बूत करनी शुरू भी कर दी है.

सबसे पहले तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलीम अल्ताफ की छुट्टी हुई. कारण साफ़ था. अल्ताफ़ आईसीसी के साथ किसी भी समझौते के खिलाफ़ थे. एजाज़ बट इस बात को अच्छी तरह समझ गए थे की अगर जल्दी ही आईसीसी से सौदा नहीं हुआ तो पैसे मिलने की गुंजाईश कम होती जाएगी. सबसे बड़ी बात थी की भारत चाहता था कि पाकिस्तान पैसे लेकर अपनी मेज़बानी की दावेदारी छोड़ दे. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और आईसीसी दोनों ने इस समझौते से बड़ी राहत की सांस ली होगी क्योंकि अब वे आगे की योजना बनाने पर अपना सारा ध्यान लगा सकते हैं. सबसे पहला काम होगा 2011-12 सीजन से आगे के लिए विश्व क्रिकेट के कार्यक्रम की रूप-रेखा तैयार करना. भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही तना-तनी के कारण इन दोनों देशों के बीच अगले पांच साल में किसी भी दौरे की गुंजाइश नहीं रखी गई थी.

यह बात अब तय हो गई है कि पाकिस्तान में अभी जो हालत हैं उसमें वहाँ किसी भी देश के लिए दौरा करना ख़तरे से ख़ाली नहीं होगा.

अब फ्यूचर टूअर प्रोग्राम (एफ़टीपी) में ये दिखाया जाएगा कि पाकिस्तान अपने घर में होने वाले मैच कहीं और आयोजित करने की कोशिश करे.

ठीक वैसे ही जैसे कि 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ अपने घरेलू मैच पाकिस्तान ने इंग्लैंड में आयोजित करने का फ़ैसला किया है.

भारत का फ़ायदा भारत के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह भी है कि बिना पाकिस्तान का दौरा किए या फिर पाकिस्तान को अपनी धरती पर खेलने का न्योता दिए ही एफ़टीपी पर सब की मंजूरी हो जाएगी.

फ़ायदा यह भी है कि जैसे ही एफ़टीपी को अंतिम रूप दिया जाता है कि सभी देशों को पता चल जाएगा कि अगले पाँच साल में उन्हें कब-कब और कहाँ-कहाँ खेलना है.

यह जानकारी इसलिए महत्व रखती है क्योंकि इसकी बदौलत ही टेलीविज़न राईट्स की क़ीमत तय होती है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड को सबसे ज़्यादा जल्दी थी क्योंकि उसके मौजूदा राईट्स की अवधि मार्च, 2010 में समाप्त हो रही है.

इससे पहले नया टेंडर करना है और इस सब के लिए समय के साथ-साथ यह जानना बहुत ज़रूरी है कि कौन-कौन से देश अगले पाँच साल में कब-कब भारत का दौरा करेंगे.

पाकिस्तान के आईसीसी के साथ हुए समझौते ने सभी के लिए रास्ता साफ़ करने का काम किया है. अब क्रिकेट जगत अपने अगले पांच साल के कार्यक्रम पर मुहर लगा कर ख़रीद बिक्री के बाज़ार में कूद पड़ेगा. आख़िर पैसे कमाने के लिए हर बोर्ड को समय तो चाहिए ही.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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