
वाकई में बहुत बड़े खिलाड़ी...
जिन्होंने बैटिंग, शॉट्स और स्टाइल से साबित कर दिया कि वो वाकई में बहुत बड़े खिलाड़ी हैं और अभी भी उनमें काफी क्रिकेट बाकी है। धोनी ने ना केवल मैदान में धैर्य दिखाया बल्कि उन्होंने ये जता दिया कि हर चीख का जवाब खामोशी से ऐसा दो कि लोगों की बोलती बंद हो जाए।

माही की आतिशी पारी
आपको बता दें कि माही की आतिशी पारी के दम पर ही शनिवार को राइजिंग पुणे सुपरजाएंट को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 6 विकेट से जीत मिली है और इसी वजह से पुणे की टीम आठ टीमों की अंकतालिका में सबसे नीचले स्थान से चौथे स्थान पर आ गई है। स्मिथ को भरोसा है कि आगे चार मैच घर में होने के कारण टीम और ऊपर जाएगी।

11 महीने बाद निकले रन
मालूम हो कि धोनी के बल्ले से इस तरह के रन पूरे 11 महीने बाद निकले हैं, जिसने एक बार फिर से मिस्टर कूल को बेस्ट फिनिशर साबित किया। धोनी ने इससे पहले 21 मई 2016 20-20 मैच में ये कारनामा किया था। जब उन्हें आखिरी गेंद पर छक्के की जरूरत थी और धोनी ने अक्षर पटेल की गेंद पर वह जादुई छक्का लगा राइजिंग पुणे सुपरजायंट को अविश्वसनीय जीत दिलाई थी।

मैन ऑफ द मैच
इस मैच के लिए मैन ऑफ द मैच चुने गए धोनी ने कहा कि वह अपने ऊपर बढ़ते हुए रन रेट का दबाव नहीं लेते, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि दूसरी टीम के गेंदबाज किस तरह से गेंदबाजी करते हैं। इसलिए सात, आठ, नौ, दस की रन रेट मायने नहीं रखती। जो मायने रखता है वो यह है कि आप अपने आप को कितना शांत रखते हो।

34 गेंदों में 61 रनों की पारी
धोनी ने अहम समय पर 34 गेंदों में 61 रनों की पारी खेलते हुए पुणे को छह विकेट से जीत दिलाई और ये साबिक किया कि मुंह से नहीं खेल से विरोधियों को शांत करो, आपको बता दें कि पिछले मैचों में जब धोनी का बल्ला नहीं चला तो काफी लोगों ने उनकी कड़ी आलोचनाएं करते हुए कहा था कि अब उनका टाइम खत्म हो चुका है।


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