भारतीय हॉकी का ओलंपिक सपना चकनाचूर
लंदन, 10 मार्चः ग्रेट ब्रिटेन की हाकी टीम ने आज यहां चिली के सेंटियागों में आयोजित ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के फाइनल में भारत को 2-0 से हरा दिया.
इसके साथ ही आठ बार के ओलंपिक चैंपियन भारत का इस वर्ष अगस्त में चीन के पेइचिंग में आयोजित होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का सपना चकनाचूर हो गया. भारत को हराने के साथ ही ग्रेट ब्रिटेन ने ओलंपिक में अपना स्थान पक्का कर लिया जबकि भारत पहली बार इस दौड़ से बाहर हो गया है.
भारत की इस हार को भारतीय हॉकी और इस खेल के चाहने वालों के लिए 'काला दिन" माना जा रहा है. इंग्लैंड ने हॉकी में स्वर्ण पदक वर्ष 1988 जीता था और इसबार वह भारत को हराकर खिताब की ओर तेजी से बढ़ गया. आज मैच की शुरुआत में इंग्लैंड ने जल्दी-जल्दी दो गोल किए जबकि जवाब में भारत एक भी गोल नहीं कर पाया. इंग्लैंड की तरफ से एश्ली जैक्सन ने मैच के चौथे मिनट में जबकि रिचर्ड मैनटेल ने 10 वें मिनट में गोल किया.
भारत के प्रभजोत सिंह ने प्रतिद्वंदी टीम की बढ़त को कम करने के लिए कई अच्छे प्रयास किए मगर इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति ने उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया. इंग्लैंड के हाथों राउण्ड राबिन लीग में भी 3-2 से हारने के बावजूद भारत टूर्नामेंट के फाइनल जैसे अति महत्वपूर्ण मैच में उसके खिलाफ कारगर रणनीति के अभाव में खेलता नजर आया.
भारत को शिकस्त देने के बाद बहुत खुश नजर आ रहे इंग्लैंड के कप्तान बेन हावेस ने कहा, “हमें पिछले आठ महीनों से इसका इंतजार था. यह जीत हमारी टीम में नया जोश भरेगी. हम भारत की मानसिकता समझ रहे थे और हम जानते थे कि हमें मैच में आक्रामक शुरुआत करनी होगी". उन्होंने कहा, कि शुरुआत में ही गोल कर लेने के बाद हम पर से दबाव हट गया था. हमने अपनी तकनीक में सुधार किया और कई मौके बनाए.
इस क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में भारत के अलावा मेजबान चिली, ऑस्ट्रिया, रूस और मैक्सिको ने भी हिस्सा लिया था. गौरतलब है कि चीन, हालैंड, दक्षिण कोरिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, बेलारूस, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया को ओलंपिक हॉकी के लिए सीधे प्रवेश दिया गया है. वर्ष-2006 के एशियाई खेलों के फाइनल में नहीं पहुंच पाने की वजह से भारत को बीजिंग ओलंपिक के क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में खेलना पड़ा.
इसके साथ ही आठ बार के ओलंपिक चैंपियन भारत का इस वर्ष अगस्त में चीन के पेइचिंग में आयोजित होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का सपना चकनाचूर हो गया. भारत को हराने के साथ ही ग्रेट ब्रिटेन ने ओलंपिक में अपना स्थान पक्का कर लिया जबकि भारत पहली बार इस दौड़ से बाहर हो गया है.
भारत की इस हार को भारतीय हॉकी और इस खेल के चाहने वालों के लिए 'काला दिन" माना जा रहा है. इंग्लैंड ने हॉकी में स्वर्ण पदक वर्ष 1988 जीता था और इसबार वह भारत को हराकर खिताब की ओर तेजी से बढ़ गया. आज मैच की शुरुआत में इंग्लैंड ने जल्दी-जल्दी दो गोल किए जबकि जवाब में भारत एक भी गोल नहीं कर पाया. इंग्लैंड की तरफ से एश्ली जैक्सन ने मैच के चौथे मिनट में जबकि रिचर्ड मैनटेल ने 10 वें मिनट में गोल किया.
भारत के प्रभजोत सिंह ने प्रतिद्वंदी टीम की बढ़त को कम करने के लिए कई अच्छे प्रयास किए मगर इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति ने उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया. इंग्लैंड के हाथों राउण्ड राबिन लीग में भी 3-2 से हारने के बावजूद भारत टूर्नामेंट के फाइनल जैसे अति महत्वपूर्ण मैच में उसके खिलाफ कारगर रणनीति के अभाव में खेलता नजर आया.
भारत को शिकस्त देने के बाद बहुत खुश नजर आ रहे इंग्लैंड के कप्तान बेन हावेस ने कहा, “हमें पिछले आठ महीनों से इसका इंतजार था. यह जीत हमारी टीम में नया जोश भरेगी. हम भारत की मानसिकता समझ रहे थे और हम जानते थे कि हमें मैच में आक्रामक शुरुआत करनी होगी". उन्होंने कहा, कि शुरुआत में ही गोल कर लेने के बाद हम पर से दबाव हट गया था. हमने अपनी तकनीक में सुधार किया और कई मौके बनाए.
इस क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में भारत के अलावा मेजबान चिली, ऑस्ट्रिया, रूस और मैक्सिको ने भी हिस्सा लिया था. गौरतलब है कि चीन, हालैंड, दक्षिण कोरिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, बेलारूस, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया को ओलंपिक हॉकी के लिए सीधे प्रवेश दिया गया है. वर्ष-2006 के एशियाई खेलों के फाइनल में नहीं पहुंच पाने की वजह से भारत को बीजिंग ओलंपिक के क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में खेलना पड़ा.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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