
फर्श से अर्श तक...
फर्श से अर्श तक पहुंचे कुलवंत को यहां तक आने के लिए काफी संघर्षों और चुनौतियों से गुजरना पड़ा है। कुलवंत की कहानी उनके आत्मविश्वास, सपनों और जूनून की नायाब तस्वीर पेश करती है, जिसे हर हिंदुस्तानी को जानना काफी जरूरी है।

गोवा के एक सिंपल से रेस्टोरेंट में वेटर
आपको बता दें कि कुलवंत का जन्म राजस्थान के झुंझुनू में आज से करीब 25 साल पहले एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट को दीवानों की तरह चाहने वाले कुलवंत आज से करीब एक साल पहले तक जीविका के लिए गोवा के एक सिंपल से रेस्टोरेंट में वेटर की भूमिका निभाते थे। लेकिन क्रिकेट का कीड़ा उन्हें वहां रूकने नहीं दिया।

एलबी शास्त्री क्लब
अपने सपनों को आकार देने के लिए कुलवंत गोवा में वेटर की नौकरी छोड़कर दिल्ली आ गए और बिना अपने घरवालों को बताए वो यहां पर एलबी शास्त्री क्लब से जुड़ गए।

मोहब्बत और जंग में सब जायज
कहते है ना मोहब्बत और जंग में सब जायज है इसलिए कुलवंत ने अपने सपनों की जंग को जीतने के लिए घरवालों से एक छोटा सा सफेद झूठ बोला, उन्होंने कहा कि वो अपने एक दोस्त के ट्रांसपोर्ट बिज़नेस में हाथ बंटा रहे हैं और अहमदाबाद में हैं। जबकि वो शास्त्री क्लब में मेंटर संजय भारद्वाज की देख रेख में बॉलिंग के गुण सीख रहे थे।

10 लाख के बेस प्राइस पर खरीदा
कुलवंत की मेहनत रंग लाई और किस्मत ने पलटी खाई और वो एक शानदार बाएं हाथ के गेंदबाज बनकर उभरे जिसे मुंबई इंडियंस मे बिना देर किए अपनी टीम में शामिल कर लिया। टीम ने उन्हें 10 लाख के बेस प्राइस पर खरीदा था।

पहला फर्स्ट क्लास मैच विजय हजारे ट्राफी में
मालूम हो कि कुलवंत ने एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है लेकिन घरेलू स्तर पर उनका रिकार्ड शानदार रहा है। इन्होंने साल 2017 में अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच विजय हजारे ट्राफी में खेला था।


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