
2019 में रसेल का धमाल-
आंद्रे रसेल जमैका (वेस्ट इंडीज) के रहने वाले हैं और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलते हैं। 2019 में उनकी विस्फोटक पारियों से विपक्षी गेंदबाजों में आतंक छा गया है। हालां कि 11 मैचों में 404 रन बना कर रसेल छठे पायदान पर काबिज हैं लेकिन उनके सुलगते स्ट्राइक रेट के सामने आइपीएल के सभी बड़े बल्लेबाज फीके पड़ गये हैं। अभी तक आंद्रे रसेल ने 406 रन बनाने के लिए 42 छक्के लगाये लगाये हैं। छक्का ठोकने में क्रिस गेल भी उनके सामने टीक नहीं पा रहे। गेल 440 रन बना कर तीसरे स्थान पर हैं लेकिन उन्होंने 32 छक्के ही लगाये हैं, जो रसेल से दस कम हैं। स्ट्राइक रेट के मामले में भी कोई बल्लेबाज रसेल के आसपास नहीं है। सनराइजर्स के डेविड वार्नर ने 10 मैचों में 574 रन बनाये हैं और औरेंज कैप पर उनका कब्जा बना हुआ है। लेकिन जहां रसेल ने 209 के स्ट्राइक रेट से 406 रन बनाये हैं वहीं वार्नर ने केवल 146 के स्टाइक रेट से 574 रन बनाये हैं। यानी तेज बल्लेबाजी के मामले में रसेल ने धाकड़ बल्लेबाजों को भी बड़े अंतर से पछाड़ रखा है। रसेल ऑलराउंडर हैं लेकिन उन्होंने बल्लेबाजी में तहलका मचाया हुआ है। उनके सामने नियमित बल्लेबाज भी पानी भर रहे हैं।

रसेल का क्रिकेट करियर-
जमैका के रहने वाले आंद्रे रसेल को 2010 में वेस्ट इंडीज की तरफ से खेलने का मौका मिला था। श्रीलंका के खिलाफ उनका टेस्ट करियर शुरू हुआ लेकिन एक टेस्ट से आगे नहीं बढ़ा। टीम में उनका चयन बॉलर आलराउंडर के रूप में हुआ था। एक मात्र टेस्ट में उन्होंने 2 रन बनाये और एक विकेट लिया। फिर रसेल को 2011 के विश्वकप में मौका मिला। उनका वनडे करियर भारत के मोहाली में आयरलैंड के खिलाफ शुरू हुआ था। लेकिन रसेल का प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा। लचर प्रदर्शन के कारण वे टीम से अंदर बाहर होते रहे। इसकी वजह से आठ साल में वे केवल 52 वन डे मैच खेल पाये। 52 मैचों में उन्होंने 130 के स्ट्राइक रेट से कुल 998 रन बनाये और 65 विकेट हासिल किये। वेस्ट इंडीज की तरफ से उन्होंने 47 टी-20 मैच खेले में जिसमें 141 के स्ट्राइक रेट से 465 रन बनाये। कुछ साल बाद जब मैच फीस के मुद्दे पर वरिष्ठ खिलाड़ियों का वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड से विवाद हुआ तो आंद्रे रसेल का करियर भी प्रभावित हुआ। लेकिन IPL ने रसेल को उबार लिया।
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कोयला से हीरा बने रसेल-
वे IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स से जुड़े। अपनी धामाकेदार पारियों के दम पर वे जल्द ही वे केकेआर के सबसे भरोसेमंद फिनिशऱ बन गये। इस प्रतियोगिता में रसेल की बैटिंग ऐसी निखरी कि उनकी गेंदबाजी पीछे छूट गयी। डेथ ओवरों में जब भी केकेआर को तेज रन बनाने की जरूरत हुई रसेल ने आगे ब़ढ़ कर ये जिम्मेवारी उठायी। इसकी बदौलत रसेल आठ साल बाद फिर वेस्ट इंडीज की तरफ से विश्वकप खेलने का गौरव पा गये। आपीएल के उनके डूबते करियर को एक बार फिर उछाल दी है।


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