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समस्याओं पर चर्चा नहीं करते शीर्ष खिलाड़ी : बैडमिंटन कोच

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। एशियाई बैडमिंटन चैम्पियनशिप के पुरुषों के एकल मुकाबले में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम के विदेशी कोच अदीत जौहरी ने कुछ खुलासे किए हैं। जौहरी के मुताबिक टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी अपनी समस्याओं की चर्चा उनसे नहीं करते हैं।

जौहरी ने कहा कि चोट, व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम, सकारात्मक मनोभाव और 'कुछ कर गुजरने की ललक' की कमी के कारण भारतीय पुरुष खिलाड़ियों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।

इंडोनेशिया के सिद्धहस्त कोच को यह बताने में काफी मुश्किल हो रही थी कि आखिर क्या कारण है कि अनूप श्रीधर और अरविंद भट्ट जैसे अनुभवी खिलाड़ी पहले ही दिन हार का शिकार बने।

जौहरी बताते हैं कि श्रीधर और भट्ट का कद काफी बड़ा है। दोनों व्यक्तिगत कोच के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और सबसे खास बात यह है वे अपनी समस्याओं का जिक्र टीम के मुख्य कोच यानि जौहरी से नहीं करते हैं।

श्रीधर और भट्ट जहां एकल वर्ग में पहले दिन ही हार गए वहीं पुरुपल्ली कश्यप दूसरे दिन हार का शिकार बने। दो मैच जीतने के बाद कश्यप को प्री-क्वार्टर फाइनल में यून हू के हाथों हार मिली थी।

जौहरी ने कहा, "श्रीधर और भट्ट हाल ही में चोट से उबरे हैं। खेल में यह सिलसिला चलता रहता है लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि चोट के बाद एक खिलाड़ी किस तरह का प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने लिए तय करता है। उसे इस बात का खास ध्यान रखना होता है कि वह पूरी तरह फिट है या नहीं और उसी के मद्देनजर उसे प्रशिक्षण लेना होता है। सही दिशा में प्रगति के लिए एक व्यापक और सुनियोजित कार्यक्रम के तहत अभ्यास करना होता है।"

एक कोच के तौर पर 27 वर्ष का अनुभव रखने वाले जौहरी ने इंडोनेशिया की राष्ट्रीय टीम का कोच रहते हुए कई चैम्पियन तैयार किए हैं। वह मानते हैं कि भारतीय खिलाड़ी मानसिक तौर पर लचीले नहीं होते हैं वेवजह जरूरत से ज्यादा तनावग्रस्त हो जाते हैं।

बकौल जौहरी, "जीतने का मंत्र-आत्मविश्वास, बहादुरी और खेल का लुत्फ उठाने में छुपा है। अगर किसी खिलाड़ी में ये तीन गुण हैं तो उसे कोई नहीं रोक सकता। भारतीय खिलाड़ी करीबी मैच हार रहे हैं। इससे साबित है कि वे अपने ऊपर जरूरत से अधिक दबाव डाल रहे हैं। उन्हें अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना होगा और मन को लचीला बनाना होगा।"

जौहरी ने महिला खिलाड़ी सायना नेहवाल की जमकर तारीफ की लेकिन उनका मानना है कि सर्वोच्च वरीयता हासिल करने के लिए सायना को अभी काफी लंबा रास्ता तय करना है।

जौहरी ने कहा, "सायना अपने खेल को लेकर काफी गंभीर हैं। वह अपने खेल का लुत्फ भी उठाती हैं। वह मेहनती और जुझारू हैं। वह किसी से नहीं घबरातीं और अपने से ऊंची वरीयता वाले खिलाड़ी का भी बहादुरी से सामना करती हैं। उनमें शीर्ष-3 में पहुंचने की क्षमता लेकिन सर्वोच्च मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें और मेहनत करनी होगी। इसके लिए उन्हें सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़ने की रणनीति बनानी होगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:34 [IST]
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