
ग्रैग चैपल की वजह से करियर नहीं हुआ खराब
इरफान पठान ने कहा कि स्विंग पर हमेशा से ही उनका अधिकार बना रहा और उनके प्रदर्शन में गिरावट के लिये तत्कालीन कोच ग्रैग चैपल को दोष देना चीजों को मुद्दे से भटकाने से ज्यादा कुछ नहीं होगा।
इरफान पठान ने कहा, ‘इस तरह की सभी बातें .... लोगों का ग्रेग चैपल को लेकर बात करना, ये सब चीजों को मुद्दों से भटकाना मात्र था। इस तरह की बातें भी सामने आईं कि इरफान अब खेलने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। लोगों ने एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया कि इरफान का स्विंग पर पहले जैसा अधिकार नहीं रहा, लेकिन लोगों को यह समझने की जरूरत है कि पूरे मैच में आपको वैसी स्विंग नहीं मिलेगी, जैसी पहले 10 ओवरों में मिलती है। मैं अब भी गेंद को स्विंग कराने में सक्षम हूं।'

देश के लिये मैच जीतने के बाद भी किया गया टीम से बाहर
शनिवार को संन्यास की घोषणा करने वाले इरफान पठान ने कहा था कि जिस उम्र में अधिकतर खिलाड़ी भारतीय टीम के साथ अपना करियर शुरु करते हैं मैंने उस उम्र में अपना आखिरी अतंर्राष्ट्रीय मैच खेला। उल्लेखनीय है कि इरफान पठान ने 27 साल की उम्र में (2012) में अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला था।
इरफान पठान ने कहा कि ऐसा भी समय था जब लोगों ने उनके सभी तीनों फॉर्मेट में खेलने को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, ‘लोग मेरे प्रदर्शन को लेकर बात करते हैं, लेकिन मेरा काम अलग तरह का था। मुझे रनों पर अंकुश लगाने का काम सौंपा गया था क्योंकि मैं पहले बदलाव के रूप में आता था। मुझे याद है कि श्रीलंका में 2008 में मैच जीतने के बाद मुझे बाहर कर दिया गया था। देश के लिए मैच जीतने के बाद बिना किसी वजह के किसी बाहर किया जाता है?'

चोट की वजह से वापसी नहीं हो पाई
इरफान पठान को लेकर कई दिग्गज खिलाड़ियों का मानना है कि वह लंबे समय तक खेल सकते थे लेकिन लगातार चोटों से जूझते रहने के कारण उनकी काबिलियत खुलकर सामने नहीं आ पाई। आईपीएल 2008 के बाद पठान के सभी तीनों फॉर्मेट में खेलने की इच्छा पर सवाल उठाए गए, लेकिन इस ऑलराउंडर ने कहा कि ऐसा कोई बात नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘हां, मैं हमेशा तीनों फॉर्मेट में खेलना चाहता था। मैं 2009-10 में पीठ दर्द से परेशान रहा। मुझे कई तरह के स्कैन कराने पड़े जो कि आपके शरीर के लिए सही नहीं होते लेकिन मैंने ऐसा इसलिए किया ताकि पता चल सके कि मेरे पीठ दर्द की वास्तविक वजह क्या है।'

काश! उस वक्त होती ऐसी मशीने तो नहीं डूबता करियर
पठान ने कहा, ‘दुर्भाग्य से तब हमारे पास वैसी मशीनें नहीं थीं जिससे स्पष्ट पता चल पाता कि मेरी पीठ दर्द का क्या कारण है। मैं दो साल तक पीठ दर्द से जूझता रहा और स्थिति बिगड़ती रही लेकिन मैंने रणजी ट्रोफी में खेलना नहीं छोड़ा।'
पठान ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी तरफ से पूरे प्रयास किए। पठान ने अपने पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले की भी तारीफ की।
उन्होंने कहा, ‘उस दौर में मेरी गति कम हो गयी थी क्योंकि मैं पूरी तरह से फिट नहीं था। मैं अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहा था क्योंकि मैं इस खेल को चाहता हूं। रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा की अगुआई भी की। मैं देश की तरफ से खेलना चाह रहा था और टेस्ट क्रिकेट में वापसी करना चाहता था।'


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