INDvsENG: चैंपियनों की तरह नहीं खेले हम, अगर दोबारा बने 350 रन तो कैसे करेंगे चेस?

It is time to rethink does india has batting linn up that can chase 350 plus runs in big stage

नई दिल्ली: 30 जून को बर्मिंघम में जो हुआ उसको देखने के बाद टीम इंडिया की गेंदबाजी को हार का दोषी ठहराने का मन करता है। कागजों में यदि हार के कारण देखें जाए तो गेंदबाजी ही विलेन नजर आ रही है लेकिन इसी बीच अगर हम मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों के वास्ताविक समय में प्रदर्शन का आकलन करें तो पाएंगे कि पिछले तीन मैचों में भारत के लिए चिंता का विषय उसकी गेंदबाजी नहीं बल्कि बल्लेबाजी रही है। 30 जून को फर्क केवल इतना रहा कि सुपरहिट गेंदबाजी के दो अहम हिस्से कुलदीप और चहल फेल हो गए अन्यथा तेज गेंदबाजों ने अपनी भूमिका ठीक ठाक निभा दी थी। कुल मिलाकर यह विश्व कप का लगातार तीसरा मैच है जो भारत की बल्लेबाजी के चलते ज्यादा खलता है।

धवन के साथ चला गया टॉप ऑर्डर ?

धवन के साथ चला गया टॉप ऑर्डर ?

अफगानिस्तान के मैच से पहले या यूं कहें कि शिखर धवन की चोट से पहले टीम इंडिया चैपिंयनों वाली स्थिति में नजर आ रही थी लेकिन कड़वी सच्चाई एक ये भी अब साफ नजर आने लगी है कि धवन के बाहर हो जाने के बाद भारतीय टॉप ऑर्डर पहले के मुकाबले आधी क्षमता का भी नहीं रह गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि धवन, रोहित और कोहली में गजब का तालमेल और बडे़ मंचों पर प्रदर्शन करने का हुनर और अनुभव दोनों था। धवन के बाहर होते ही लोकेश राहुल टॉप थ्री में वह जादू कायम नहीं कर सके हैं जिसके लिए भारतीय शीर्ष क्रम विपक्षी टीमों में मशहूर है। शिखर की चोट के बाद रोहित के प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी है। राहुल तो खैर मैच दर मैच साधारण ही नजर आए हैं।

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कोहली पर आया अनावश्यक दबाव

कोहली पर आया अनावश्यक दबाव

इसका सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव विराट कोहली की बल्लेबाजी पर पड़ा है। कोहली लगातार 5वां विश्व कप 2019 अर्धशतक बनाकर भी एक बार फिर उसको शतक में तब्दील करने से चूक गए तो इसका बड़ा कारण ओपनिंग जोड़ी से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना और फिर लचर मध्यक्रम का भी अनावश्यक दबाव कप्तान पर आ जाना है। जाधव बड़े मंचों के लिए एक साधारण ही खिलाड़ी नजर आते हैं इसलिए उनसे बहुत बड़ी प्रतियोगिताओं में बहुत ज्यादा उम्मीदें करना शायद बेमानी होगा लेकिन असली समस्या धोनी का लगातार गायब होता 'एक्स फैक्टर' है। पहले जब धोनी मध्यक्रम पर होते थे तो कोहली समेत टॉप ऑर्डर में आराम से बेखौफ होकर बैटिंग करते था लेकिन अब वह बात नहीं है। सच यही है कि इस समय भारत केवल धोनी भरोसे बड़ा लक्ष्य चेस करने की सोच भी नहीं सकता है।

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मीडिल ऑर्डर की पुरानी समस्या

मीडिल ऑर्डर की पुरानी समस्या

दूसरी ओर नंबर चार भारत की लगातार चिंता बना हुआ है। शंकर बहुत ज्यादा विस्फोटक बल्लेबाज नहीं हैं। जबकि अब धोनी और जाधव भी लगातार सिंग्लस आधारित मोड पर पहुंच चुके हैं ऐसे में भारत को पंत-पांड्या जैसे 'एक्स फैक्टर्स' की मीडिल ऑर्डर में जरूरत है लेकिन यहां समस्या यह है कि पंत की एंट्री विश्व कप में बहुत लेट हुई है और तुरंत उनके सामने अंतिम स्टेज के दबाव के साथ इंग्लिश परिस्थितियों से तालमेल बैठाने की दोहरी चुनौती है। ऐसे में पंत टीम में चमत्कारिक बदलाव करेंगे ऐसा सोचना ठीक नहीं होगा। लेकिन टीम प्रबंधन को अब यह सोचना होगा कि क्या उसके पास वैसी बैटिंग लाइन-अप है जो 350 रनों का पीछा करते हुए लड़ सके। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अब सेमीफाइनल में भारत के साथ फिर इंग्लैंड का मैच होने के समीकरण बनने लगे हैं।

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स्पष्ट करनी होगी धोनी की भी भूमिका

स्पष्ट करनी होगी धोनी की भी भूमिका

अगर ऐसा होता है तो भारत को राहुल, जाधव, शंकर और धोनी जैसे खिलाड़ियों की भूमिका को और स्पष्ट करने की जरूरत होगी। भारतीय टॉप ऑर्डर समेत पंत और पांड्या जहां किसी भी समय बिग हिटिंग करने की काबिलियत रखते हैं तो वहीं बाकि के खिलाड़ी अभी तक सिंग्लस आधारित गेम पर चिपके हुए है। ऐसी मानसिकता किसी छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए कारगर साबित हो सकती है लेकिन अगर नॉकआउट स्टेज में इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के 325-350 रन जैसे स्कोर का पीछा करना पड़ा तो भारत को अपनी ये मानसिकता बदलनी होगी। 30 जून के मैच की बात करें तो दोनों टीमों में सबसे बड़ा फर्क मानसिकता का ही नजर आया। आपको बता दें कि भारतीय पारी का एकमात्र छक्का जहां 50वें ओवर में आया तो वहीं इंग्लैंड ने अपनी पारी में 13 छक्के लगाए थे।

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Story first published: Monday, July 1, 2019, 0:51 [IST]
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