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बीसीसीआई अध्यक्ष बनकर जगमोहन डालमिया ने श्रीनिवासन का एहसान उतारा

मुंबई। एक बड़ी खबर बीसीसीआई से आ रही है जहां जगमोहन डालमिया को एक बार फिर से बीसीसीआई अध्यक्ष चुन लिया गया है , वो निर्विरोध चुने गये हैं। एन श्रीनिवासन पर सुप्रीम कोर्ट के बैन के बाद यही कयास लगाये जा रहे थे कि डालमिया को ही यह कुर्सी मिल सकती है क्योंकि श्रीनिवासन चाहते थे कि इस कुर्सी पर वो ही बैठे जो उनका भरोसेमंद हो और डालमिया, श्रीनिवासन के बेहद करीबी माने जाते हैं।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को आईपीएल सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग मामले में अहम फैसला सुनाते हुए श्रीनिवासन को 'हितों के टकराव' की स्थिति में रहते हुए बीसीसीआई चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था।

डालमिया के वश में जो रहा, वह वो करेगा

चुनाव से ठीक पहले डालमिया ने भी संकेत दे दिये थे कि वो भी इस चुनाव के लिए मेंटली प्रीपेयर हैं क्योंकि उन्होंने कहा था कि वो क्रिकेट को हमेशा अपना सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार रहते हैं। अगर डालमिया की कमी महसूस की गई तो डालमिया के वश में जो रहा, वह वो करेगा।

डालमिया की वापसी

डालमिया क्रिकेट से जुड़ी मजबूत हस्ती है और उनका और बीसीसीआई का रिश्ता बहुत ज्यादा पुराना है। मालूम हो कि डालमिया ईस्ट ज़ोन के बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और नियम के मुताबिक इस बार ईस्ट ज़ोन से बीसीसीआई अध्यक्ष चुना जाना था इसलिए डालमिया को यह सीट मिल गई।

डालमिया 1979 में वे बीसीसीआई में आए

डालमिया 1979 में वे बीसीसीआई में आए और 1983 में वे बोर्ड के कोषाध्यक्ष बने। बोर्ड अध्यक्ष आईएस बिंद्रा के साथ मिलकर उन्हें 1987 और 1996 में वर्ल्ड कप आयोजन को भारत लाने का श्रेय जाता है इसलिए उन्हें मीडिया में काया-कल्प पुरूष कहा जाता था।

श्रीनिवासन का एहसान चुकाया

डालमिया इससे पहले 2001 से 2004 तक वे बीसीसीआई के अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पहले 1997 में वे तीन साल के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे। 2004 में बीसीसीआई से हटाए जाने के बाद एन श्रीनिवासन ने 2007 में उनकी क्रिकेट की दुनिया में फिर से वापसी कराई, इसलिए जब श्रीनिवासन को बीसीसीआई अध्यक्ष पद का काम छोड़ना पड़ा तो उनकी जगह अंतरिम जिम्मेदारी संभालने के लिए जगमोहन डालमिया ही सामने आए और अपना एहसान चुकाया।

विवादों के घेरे में

डालमिया के नाम पर बहुत विवाद भी रहे, उन पर आर्थिक गड़बड़ियों और धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके कारण उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी लेकिन बाद में वो सारे मामलों में बाइज्जत बरी हो गये थे।

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:12 [IST]
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