खेल को शामिल करने का खेल

By मैट मैकग्रॉ
बीबीसी की जाँच में संकेत मिले हैं कि जापान ने ओलंपिक में केरिन साइकिलिंग को शामिल करने के लिए विश्व साइकिलिंग संस्था को बड़ी रक़म अदा की.

बीबीसी को मिले काग़ज़ात संकेत देते हैं कि जापानी साइकिलिंग के आयोजकों ने यूसीआई यानी विश्व साइकिलिंग संस्था को 30 लाख डॉलर अदा किए हैं.

आरोप है कि यह राशि 1990 में अदा की गई थी. इसके बाद केरिन नाम की इस प्रतियोगिता को 1996 में यूसीआई के खेलों में शामिल कर लिया गया.

यूसीआई और उसके तत्कालीन अध्यक्ष हीन वर्ब्रूगेन ऐसे किसी काम से इनकार करते हैं. केरिन कम दूरी में तेज़ गति से खेली जाने वाली साइकिलिंग प्रतियोगिता है.

जापान में ही इस खेल की शुरुआत हुई थी और वहाँ यह काफ़ी लोकप्रिय है. जापान को हर साल इस खेल पर लगने वाली सट्टेबाज़ी से करोड़ों डॉलर राजस्व मिलता है.

वैश्विक पहचान की कमी

लेकिन वित्तीय लाभ के बावजूद साइकिलिंग की इस ख़ास प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिल पाई है.

1980 में जापानियों ने अपनी इस दौड़ को वर्ल्ड ट्रैक चैम्पियनशिप में सफलतापूर्वक शामिल करवा लिया था जिसे यूसीआई ने आयोजित कराया था.

यूसीआई और उसके तत्कालीन अध्यक्ष हीन वर्ब्रूगेन किसी ग़लत लेनदेन से इंकार करते हैं

केरिन एसोसिएशन के तत्कालीन प्रमुख कोरामासू ने बताया कि यही वह क़दम था जिसे यूसीआई के अगले अध्यक्ष हीन वर्ब्रूगेन ने संशय के बावजूद सराहा.

उन्होंने कहा, "1992 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप से केरिन को बाहर कर दिया गया जो हमारे लिए एक धक्का था. लेकिन इसके चार साल बाद केरिन को फिर शामिल कर लिया गया."

केरिन को उस साल दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने औपचारिक रूप से स्वीकार लिया फिर वर्ष 2000 में सिडनी में इस प्रतियोगिता को शामिल कर लिया गया.

इतना बड़ा परिवर्तन कैसे?

काफ़ी समय तक तो साइकिलिंग में यह अफ़वाहें उड़ती रहीं कि जापानियों ने इस खेल को ओलंपिक में शामिल करने के लिए पैसा दिया.

उस समय के यूसीआई के एक सदस्य के अनुसार, "जापानियों ने उन्हें इसके बदले एक बड़ा सा लिफ़ाफ़ा दान में दिया."

डेनमार्क के हेनरिक एमग्रीन भी उस समय साइकिलिंग आयोजक समिति के सदस्य थे.

वे कहते हैं, "सभी जानते हैं कि जापानियों ने विश्व कप शृंखला को तो समर्थन दिया ही और साथ में बहुत कुछ को समर्थन दिया. सभी यह भी समझ सकते हैं कि वे बिना कुछ चाहे यह सब नहीं कर रहे थे."

हेनरिक एमग्रीन ने कहा, "वे इसके बदले कुछ चाहते थे और सभी जानते हैं कि इसके बदले उन्हें क्या मिला."

सभी जानते हैं कि जापानियों ने विश्व कप शृंखला को तो समर्थन दिया ही और साथ में बहुत कुछ को समर्थन दिया. सभी यह भी समझ सकते हैं कि वे बिना कुछ चाहे यह सब नहीं कर रहे थे
लेकिन जब हमने जापान की केरिन एसोसिएशन के कारामासु से यह पूछा तो उन्होंने साफ़तौर से इसे नकार दिया. उन्होंने कहा, "पैसे का कोई लेनदेन नहीं हुआ."

उन्होंने कहा, "हमने जापान में साइकिलिंग ट्रेनिंग केंद्रों को सहायता दी और हमने सदस्यता के लिए उतनी ही रक़म अदा की जिसे कोई भी देश अदा करता है."

कहानी कुछ और है

लेकिन बीबीसी को मिले काग़ज़ात कुछ और ही कहानी बयाँ करते हैं.

इन काग़ज़ातों के अनुसार यूसीआई को कई किश्तों में पैसा दिया गया जो केरिन को ओलंपिक में शामिल करने के दो महीनों के बाद ही शुरू हुआ.

कुल 30 लाख डॉलर की रकम जो यूसीआई के कुल बजट का पाँचवा हिस्सा थी, रोज़मर्रा की कई चीज़ों के ख़र्च की तरह तरह अदा की गई है. जैसे यूसीआई के सदस्यों रोज़ाना के आने-जाने का ख़र्च.

हमने वर्ब्रूगेन को यह काग़ज़ात दिखाए जिन्होंने किसी भी ग़लत लेन-देन से इनकार किया था.

उन्होंने कहा, "सब कुछ पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है. यह सब दुनिया भर में ट्रैक साइकिलिंग के विकास के लिए किया गया था."

हालांकि वह सीधे तौर पर यह नहीं बता पाए कि रोज़मर्रा के हवाई किराए और दूसरे ख़र्च जापानियों ने क्यों वहन किए?

Story first published: Monday, July 28, 2008, 17:57 [IST]
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