नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। एक वक्त था जब श्रीलंकाई बल्लेबाज माहेला जयवर्धने को एक टेस्ट खिलाड़ी का तमगा हासिल था और उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट के लायक भी नहीं समझा जाता था। उसी जयवर्धने ने अपने प्रदर्शन से खुद को न सिर्फ एकदिवसीय क्रिकेट का एक सफल खिलाड़ी साबित किया, बल्कि फटाफट क्रिकेट में भी अपना लोहा मनवाया।
इन दिनों वह जिस अंदाज में खेल रहे, उसे देखकर नहीं लगता कि उन्हें रोकना किसी के लिए आसान रहेगा। मौजूदा ट्वेंटी-20 कप में विपक्षी टीमों के लिए सबसे बड़ी चिंता का सबब आज जयवर्धने हैं। वह इस टूर्नामेंट में अब तक खेले गए तीन मैचों में 279 रन बना चुके हैं। इसमें एक शतक भी शामिल है। शुक्रवार को मेजबान वेस्टइंडीज के खिलाफ वह इस टूर्नामेंट में अपना दूसरा शतक जड़ने की दहलीज पर पहुंचकर रह गए। उन्होंने 56 गेंदों पर 98 रन बनाए और टीम की जीत के सूत्रधार रहे।
कभी एक खांटी टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले माहेला जयवर्धने ने बड़े-बड़े क्रिकेट पंडितों को झुठला दिया है। फटाफट क्रिकेट में जयवर्धने का यह नया 'अवतार' इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के तीसरे संस्करण में देखने को मिला। तीसरे संस्करण के आधा गुजर जाने के बाद किंग्स इलेवन पंजाब ने अपने इस मध्यक्रम में खेलने वाले बल्लेबाज को बतौर सलामी बल्लेबाज मैदान पर उतारने का फैसला किया। इस फैसले को जयवर्धने इतना सही साबित करेंगे, इसका किसी को अंदाजा भी नहीं रहा होगा।
आईपीएल के तीसरे संस्करण में जयवर्धने की कामयाबी की गवाही उनके आंकड़े देते हैं। उन्होंने 13 मैचों में 43.90 की औसत से 439 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 147 से भी अधिक रहा। उनके इसे लाजवाब प्रदर्शन ने श्रीलंकाई टीम प्रबंधन को सलामी बल्लेबाजी के लिए एक नया विकल्प मुहैया करा दिया। स्थिति यह कि आज जयवर्धने विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में धाकड़ बल्लेबाज जयसूर्या के साथ पारी की शुरुआत कर रहे हैं।
जयवर्धने के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरुआत बतौर टेस्ट क्रिकेटर अगस्त, 1997 में भारत के खिलाफ हुई थी। टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें वर्ष 1998 में एकदिवसीय टीम में भी जगह मिल गई। दोनों प्रारुपों में अपनी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था। यह वह दौर था जब श्रीलंकाई टीम में अरविंद डीसिल्वा जैसे बल्लेबाज ढलान पर थे तो कई नवोदित बल्लेबाज टीम में पहले से मौजूदगी बनाए हुए थे।
खर, तमाम प्रतिस्पर्धाओं के बावजूद क्रिकेट के इन दोनों स्वरूपों में जयवर्धने ने अपना लोहा मनवाया। वह अब तक कुल 110 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। इनमें उन्होंने 53.96 की औसत से 9120 रन बनाए हैं। टेस्ट मैचों में उनके नाम 27 शतक भी दर्ज हैं और उनका उच्चतम स्कोर 374 रन का है। जयवर्धने ने अब तक खेले 317 एकदिवसीय मैचों में 32.74 की औसत से 8702 रन बनाए हैं। एकदविसीय मैचों में उन्होंने 12 शतक जड़े हैं और उनका उच्चतम स्कोर 128 का है।
कोलंबो के एक साधारण परिवार में 27 मई, 1977 में पैदा हुए जयवर्धने में क्रिकेट की ललक बचपन से थी। परंतु 16 साल की उम्र में उन्हें एक बड़ा सदमा उस समय लगा जब उनके छोटे भाई की कैंसर से मौत हो गई। इस घटना की वजह से उनका क्रिकेट करियर कुछ दिनों के लिए थम गया था हालांकि बाद में उन्होंने शानदार वापसी की। अब जयवर्धने की तमन्ना एक कैंसर अस्पताल बनवाने की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।