Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

अफ़्रीकी फ़ुटबॉल की दुर्दशा क्यों...

पंकज प्रियदर्शी

बीबीसी संवाददाता, दक्षिण अफ़्रीका से

मौजूदा विश्व कप का थीम म्यूज़िक दक्षिण अफ़्रीका में ख़ूब लोकप्रिय है. शकीरा के इस अलबम में गाने की लाइन कुछ यूँ है-दिस टाइम फ़ॉर अफ़्रीका यानी अब अफ़्रीकी टीम की बारी है. लेकिन क्या हो गया....अफ़्रीकी टीमों की दुर्दशा का ये आलम कि दूसरे दौर में घाना को छोड़कर कोई भी टीम क्वालीफ़ाई नहीं कर पाई.

कैमरून हो, आइवरी कोस्ट हो, नाइजीरिया हो, अल्जीरिया हो या फिर मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका की टीम- सबको पहले ही दौर में हार का सामना करना पड़ा. ये टीमें प्रतियोगिता से बाहर हो गईं.

कैमरून जिसकी टीम में सैमुएल एटो जैसा खिलाड़ी है, तो आइवरी कोस्ट जिसके कप्तान दिदिए द्रोगबा जैसे फ़ुटबॉल की दुनिया के महारथी खिलाड़ी हैं. वैसे भी अपने महाद्वीप में खेल रही इन टीमों के पास ये भी तर्क नहीं है कि वे ये कह दें कि यहाँ का माहौल उन्हें रास नहीं आ रहा था.

रास नहीं आया माहौल

जिस तरह इन अफ़्रीकी टीमों का बोरिया बिस्तर बंद हुआ है, उससे तो यही लगता है कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ गड़बड़ है. दक्षिण अफ़्रीका में मैच देखने आए एक ब्राज़ीलियाई समर्थक कहते हैं, "अफ़्रीकी खिलाड़ियों को मिलकर खेलना चाहिए, ये व्यक्तिगत फ़ुटबॉल खेलते हैं. उन्हें एक टीम की तरह खेलना चाहिए. हर कोई सुपर स्टार बनना चाहता है. अब द्रोगबा को ही देख लीजिए....उनका क़द बहुत बड़ा है शायद टीम से भी बड़ा."

कुछ ऐसी ही बात कही भारतीय राजीव ने, जो यहाँ पिछले पाँच वर्षों से एक दूरसंचार कंपनी में काम करते हैं. राजीव का कहना है, "दक्षिण अफ़्रीका में यह विश्व कप हो रहा है. इसमें कई अच्छी अफ़्रीकी टीम हिस्सा ले रही थी. कैमरून, आइवरी कोस्ट, नाइजीरिया और दक्षिण अफ़्रीका. घाना को छोड़कर किसी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है. फ़ुटबॉल टीम गेम है. समस्या ये है कि स्टार प्लेयर होने के बावजूद अफ़्रीकी टीमों में टीम प्ले नहीं है, व्यक्तिगत खेल है. अगर आप द्रोगबा, एटो, एसियन की बात करें, तो ये यूरोपीय लीग में बहुत अच्छा खेलते हैं लेकिन अपने देश के साथ नहीं."

बात गंभीर है. बहुत लोग इस बात से सहमत भी होंगे. चाहे वो द्रोगबा हों या सैमुएल एटो- सब पर ये आरोप लगता है कि वे क्लब के लिए बहुत अच्छा खेलते हैं लेकिन बात जब देश की आती है तो पिछड़ जाते हैं.

चलिए इतिहास के पन्ने के पलटते हैं और थोड़ा पीछे चलते हैं. आज से 20 साल पहले कैमरून के रोजर मिल्ला ने अफ़्रीकी फ़ुटबॉल की दिशा बदल दी थी. 1990 के विश्व कप में मिल्ला ने न सिर्फ़ अफ़्रीकी फ़ुटबॉल के प्रति लोगों का नज़रिया बदला बल्कि जश्न मनाने का नया तरीक़ा भी दुनिया को दिखाया.

उस समय ब्राज़ील के महान पेले ने भविष्यवाणी की थी कि 10 साल के अंदर कोई अफ़्रीकी टीम विश्व कप जीतेगी. लेकिन दस साल नहीं 20 साल बाद भी ऐसी स्थिति नहीं दिखती.

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:23 [IST]
Other articles published on Nov 13, 2017
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+