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टीमें तय करती हैं किसे ख़रीदना है -मोदी

इंडियन प्रीमियर लीग के हाई प्रोफ़ाइल कमिश्नर ललित मोदी लीग के तीसरे संस्करण की तैयारियों के साथ एक बार फिर सुर्ख़ियों में छाए हुए हैं. पहले खिलाड़ियों की नीलामी और अब गुगल की सहयोगी कंपनी यू-ट्यूब के साथ क़रार.

ललित मोदी से बीबीसी संवाददाता रुपा झा ने इन सभी विषयों की एक लंबी बात की. प्रस्तुत हैं इसी बातचीत के कुछ अंश.

सबसे पहले इंडियन प्रीमियर लीग के यू-ट्यूब के साथ हुए क़रार के बारे में बताइए.

आप दुनिया किसी भी कोने में हो अगर आपके पास इंटरनेट कनेक्शन है तो आप आईपीएल के मैच यू-ट्यूब पर देख सकते हैं. हम दुनिया की पहली ऐसी खेल संस्था हैं जिन्होंने अपने खेल के लिए ये मुमकिन किया है. सबसे अहम ये है कि आप मुफ़्त में ये मैच देख सकते हैं.

क्या खेल व्यवसाय ज़्यादा और खेल कम रह गया है ?

नहीं, ऐसा नहीं है. कंपनियां खेल का इस्तेमाल अपने ब्रांड को प्रचारित करने के लिए करतीं हैं. खेल की वजह से लोग इससे जुड़ना चाहते हैं. आईपीएल में उपभोक्ता की रुचि टी20 के रोमांच की वजह से बढ़ी है. हमारी लीग में दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी खेलते हैं. इसलिए सभी हमारी लीग को देखना चाहते हैं और इसी वजह से हम गूगल के साथ यू-टयूब वाला समझौता कर पाए हैं.

हाल में हुई आईपीएल की नीलामी में एक भी पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं बिका. आप इस पर क्या कहेंगे ?

अगर मैं किसी टीम का मालिक होता और मुझे एक खिलाड़ी चुनना होता तो मैं क्या करता? मेरे सामने 70 खिलाड़ियों का विकल्प है. आप सिर्फ़ पाकिस्तानी खिलाड़ियों के ना चुने जाने की बात क्यों करते हैं. उन ऑस्ट्रेलियाआई, दक्षिणी अफ्रीकी, या कनाडाई खिलाड़ियों का क्या जिन पर किसी ने बोली नहीं लगाई गई. आख़िरकार लोग खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धतता के आधार पर चुनेंगे.

पाकिस्तान टी20 का विश्व विजेता है, नीलामी के दौरान शाहिद अफ़रीदी एक अच्छे बेस प्राइस पर थे. लेकिन वो आईपीएल नहीं खेल पायेंगे.

हां ये निराशाजनक बात है, लेकिन ये तो टीम के मालिक तय करेंगे कि उन्हें किसे ख़रीदना है और किसे नहीं. मैं ये फ़ैसले नहीं करता.

आप 2005 में बीसीसीआई के सबसे युवा उपाध्यक्ष बने थे. तबसे काफ़ी कुछ बदला है . क्या कहेंगे ?

हां, परिवर्तन हुए हैं, शरद पवार एक नई सोच के साथ आए. उन्होंने हमें वो सब करने की अनुमति दी जिससे बीसीसीआई का चेहरा बदल सकता था. इससे परिवर्तन संभव हुआ. हम हमेशा कुछ सोचते रहते हैं. मैं गांरटी से कह सकता हूं कि हम विश्व की उच्चकोटि की खेल संस्था बनेंगे.

फॉर्ब्स पत्रिका ने आपको भारत के 21 सबसे ताक़तवर व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है. आप इस बारे में क्या सोचते हैं ?

मैं नहीं सोचता कि ये ताक़तवर होने के बारे में है, ये एक विज़न को क्रियान्वन करने के बारे में है. इसे आप लोगों की ज़िंदगी में आने वाला परिवर्तन ज़रुर कह सकते हैं. इससे खिलाड़ियों और फ़ैन्स के जीवन पर प्रभाव पड़ रहा है, गली-मोहल्लों में लोग हमारे बारे में बात करते हैं. दुनिया भर में हमें पहचान मिली है.

आप जब बड़े फ़ैसले करते हैं तो आपके मन क्या चलता रहता है ?

आप हमेशा सही नहीं हो सकते. मैं जीवन में रिस्क लेता हूं क्योंकि मुझे अपने विचारों पर भरोसा होता है. मैं सिर्फ़ एक चीज़ पर ध्यान देता हूं वो है अपनी योजनाओं का क्रियान्वन. अगर आपके पास अच्छा उत्पाद है और आप उसका सही प्रचार नहीं करते, अच्छी मार्केटिंग नहीं करते तो इस उत्पाद के बारे में आपके सिवाय कोई नहीं जान पायेगा.

क्या आपने कभी कुछ ऐसा किया है जो असफल रहा हो.

हां, ऐसा कई बार हुआ है. 1994 में मैं मल्टीप्लेक्स के धंधे में चला गया था. लेकिन ये समय से पहले उठाया गया क़दम साबित हुआ. आज चारों ओर मल्टीप्लेक्स व्यवसाय फल-फूल रहा है. और भी कई व्यवसाय थे जो मैंने शुरु किए लेकिन चल नहीं पाए. आपको हमेशा अपनी ग़लतियों से कुछ सीख लेनी चाहिए. मैं अपने परिवार का शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने मुझे ये सब करने की छूट दी.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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