'बचपन में बड़ा शैतान था मेरा गोलू'
क्रिकेट प्रेमियों के 'वीरू' और परिवार के 'गोलू' घर में भी तोल कर तो बोलते हैं लेकिन सुबह-शाम दूध पीना नहीं भूलते.
पेश है वीरू की माता कृष्णा सहवाग के साथ सूफ़िया शानी की ख़ास बातचीतके अंश:
वीरू ने कई वन डे और टैस्ट मैचो में जीत हासिल की है क्या आईपीएल में दिल्ली टीम की हार ने आपको निराश किया है?
हाँ, दुख तो हुआ है.....खेल में तो हार-जीत चलती रहती है. मगर थोड़े रन और बन जाते...
क्रिकेट प्रेमियों के 'वीरू' और आपके 'गोलू' के बचपन को आप किस तरह याद करती हैं
वीरू बचपन से ही बहुत चंचल और गोल-मटोल था. इसलिए सभी उसे गोलू कहते थे. थोड़ा बड़ा हुआ तो हर दिन एक नई शैतानी सामने आती थी.
किस तरह की शैतानी करते थे वीरू?
कभी स्कूल में क्लास के लड़कों की पिटाई करना और कभी घर पर छोटे भाई विनोद को धमका कर अपना होमवर्क करवा लेना. और जब इससे भी मन नहीं भरता तब चाचा ताऊ के बच्चों की बारी आती थी. उनका दूध का गिलास छीन लेता था... दूध इसे बहुत पसंद था ना इसलिए..दूध उसे आज भी बहुत अच्छा लगता है.
बचपन में बहुत शरारती थे वीरेंद्र
क्या कभी पिटाई करने की नौबत आई?
पिटाई तो बहुत बड़ी बात है...न मुझे और न उसके पापा को वीरू पर कभी ग़ुस्सा आया. एक बार जब वीरू के बैट से छाछ की मटकी टूट गई तो उसके ताऊ थोड़ा कुड़कुड़ाए थे.. मगर वीरू के पापा ने कहा...कोई बात नहीं एक दिन लस्सी नहीं पिएँगे.
वीरू के बचपन की कोई ऐसी घटना जो आप भूल नहीं पातीं?
वीरू जब नवीं क्लास में था तब नजबगढ़ में दो टीमो के बीच मैच चल रहा था. वीरू के एक शॉट से पास के एक क्लीनिक का शीशा टूट गया. लेकिन खेल ख़त्म होने पर डाक्टर ने वीरू की पीठ थपथपाते हुए उसे सौ रूपए दिए और कहा, भाई शीशा तोड़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. इस बहाने मेरे क्लीनिक का बहुत पुराना और गंदा शीशा तो बदल जाएगा.
क्रिकेट में वीरू की रूचि कैसे पैदा हुई?
यह तो क़ुदरती हुनर है उसमें. बचपन में बॉल लाने के लिए मुझसे, अपने पापा और ताऊ से लड़लड़ कर पैसे मांगता था. और बॉल दुबारा ख़राब होने पर पैसे नहीं दिए जाते तो उसे ग़ुस्सा आ जाता.
वीरू में सबसे अच्छी बात आपको क्या लगती है?
उसका आत्मविश्वास और कम बोलना. गोलू आज भी कम बोलता है, मगर उसकी बात में वज़न होता है.
एक बार, जब वह बहुत छोटा था तब टीवी पर कपिल देव की माँ का इंटरव्यू आ रहा था. सब बच्चे फिल्म देखना चाहते थे लेकिन वीरू अड़ गया कि मुझे यही देखना है.
फिर वह मुझे पकड़ कर लाया और बोला, 'एक दिन तू भी ऐसे ही इंटरव्यू देगी'. उसकी इस बात पर घर के सभी बच्चें हँस दिए थे.
इसी तरह एक दिन जब मैं उसकी टीचर से मिलकर लौटी तो मैंने इससे कहा, तेरी बहनोंकी टीचर से मिलकर मैं चौड़ी होकर घर आती थी पर तू ने तो मेरा दूध फीका करदिया.
तब वीरू ने बड़े आत्मविश्वास से कहा था...तू चिंता मत कर एक दिन मैं तेरे दूध का मान रखूँगा.
आपके गोलू को आपके हाथ की पकी कौन सी चीज़ पंसद है?
मेरी बनाई हुई खीर और कढ़ी उसे बहुत पसंद है.
जब वीरू चौके-छक्के मार रहा होता है तब आपको कैसा लगता है?
जब वह मैदान में चौके-छक्के लगा रहा होता है तब मेरी तबियत ख़ुश हो जाती है. तब मन करता है कि जैसे बचपन में प्यार से उसे गोद में उठा लेती थी अब भी उसे गोद में उठा लूँ....
पेश है वीरू की माता कृष्णा सहवाग के साथ सूफ़िया शानी की ख़ास बातचीतके अंश:
वीरू ने कई वन डे और टैस्ट मैचो में जीत हासिल की है क्या आईपीएल में दिल्ली टीम की हार ने आपको निराश किया है?
हाँ, दुख तो हुआ है.....खेल में तो हार-जीत चलती रहती है. मगर थोड़े रन और बन जाते...
क्रिकेट प्रेमियों के 'वीरू' और आपके 'गोलू' के बचपन को आप किस तरह याद करती हैं
वीरू बचपन से ही बहुत चंचल और गोल-मटोल था. इसलिए सभी उसे गोलू कहते थे. थोड़ा बड़ा हुआ तो हर दिन एक नई शैतानी सामने आती थी.
किस तरह की शैतानी करते थे वीरू?
कभी स्कूल में क्लास के लड़कों की पिटाई करना और कभी घर पर छोटे भाई विनोद को धमका कर अपना होमवर्क करवा लेना. और जब इससे भी मन नहीं भरता तब चाचा ताऊ के बच्चों की बारी आती थी. उनका दूध का गिलास छीन लेता था... दूध इसे बहुत पसंद था ना इसलिए..दूध उसे आज भी बहुत अच्छा लगता है.
बचपन में बहुत शरारती थे वीरेंद्र
क्या कभी पिटाई करने की नौबत आई?
पिटाई तो बहुत बड़ी बात है...न मुझे और न उसके पापा को वीरू पर कभी ग़ुस्सा आया. एक बार जब वीरू के बैट से छाछ की मटकी टूट गई तो उसके ताऊ थोड़ा कुड़कुड़ाए थे.. मगर वीरू के पापा ने कहा...कोई बात नहीं एक दिन लस्सी नहीं पिएँगे.
वीरू के बचपन की कोई ऐसी घटना जो आप भूल नहीं पातीं?
वीरू जब नवीं क्लास में था तब नजबगढ़ में दो टीमो के बीच मैच चल रहा था. वीरू के एक शॉट से पास के एक क्लीनिक का शीशा टूट गया. लेकिन खेल ख़त्म होने पर डाक्टर ने वीरू की पीठ थपथपाते हुए उसे सौ रूपए दिए और कहा, भाई शीशा तोड़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. इस बहाने मेरे क्लीनिक का बहुत पुराना और गंदा शीशा तो बदल जाएगा.
क्रिकेट में वीरू की रूचि कैसे पैदा हुई?
यह तो क़ुदरती हुनर है उसमें. बचपन में बॉल लाने के लिए मुझसे, अपने पापा और ताऊ से लड़लड़ कर पैसे मांगता था. और बॉल दुबारा ख़राब होने पर पैसे नहीं दिए जाते तो उसे ग़ुस्सा आ जाता.
वीरू में सबसे अच्छी बात आपको क्या लगती है?
उसका आत्मविश्वास और कम बोलना. गोलू आज भी कम बोलता है, मगर उसकी बात में वज़न होता है.
एक बार, जब वह बहुत छोटा था तब टीवी पर कपिल देव की माँ का इंटरव्यू आ रहा था. सब बच्चे फिल्म देखना चाहते थे लेकिन वीरू अड़ गया कि मुझे यही देखना है.
फिर वह मुझे पकड़ कर लाया और बोला, 'एक दिन तू भी ऐसे ही इंटरव्यू देगी'. उसकी इस बात पर घर के सभी बच्चें हँस दिए थे.
इसी तरह एक दिन जब मैं उसकी टीचर से मिलकर लौटी तो मैंने इससे कहा, तेरी बहनोंकी टीचर से मिलकर मैं चौड़ी होकर घर आती थी पर तू ने तो मेरा दूध फीका करदिया.
तब वीरू ने बड़े आत्मविश्वास से कहा था...तू चिंता मत कर एक दिन मैं तेरे दूध का मान रखूँगा.
आपके गोलू को आपके हाथ की पकी कौन सी चीज़ पंसद है?
मेरी बनाई हुई खीर और कढ़ी उसे बहुत पसंद है.
जब वीरू चौके-छक्के मार रहा होता है तब आपको कैसा लगता है?
जब वह मैदान में चौके-छक्के लगा रहा होता है तब मेरी तबियत ख़ुश हो जाती है. तब मन करता है कि जैसे बचपन में प्यार से उसे गोद में उठा लेती थी अब भी उसे गोद में उठा लूँ....
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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