ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी को लेकर काफ़ी आलोचना हो रही है. राष्ट्रमंडल खेल तीन अक्तूबर से शुरू हो रहा है और इसमें 72 देशों के नौ हज़ार से अधिक ऐथलीट्स और अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं.मूडीज़ का कहना है, "भारत के मूलभूत ढांचे, किसी कार्यक्रम के बड़े पैमाने पर आयोजन की क्षमता और पर्यटक स्थल होने की छवि पर सवालिया निशान लग गया है."
इसी हफ़ते मुख्य आयोजन स्थल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के बाहर बन रहे फ़ुट ओवरब्रिज के गिरने से 27 लोग घायल हो गए थे.मूडीज़ ने कहा, "व्यापक भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच फ़ुट ओवरब्रिज के गिरने और खेलगांव की स्थिति को लेकर भारत की राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की क्षमता के साथ-साथ सलामती और सुरक्षा पर भी चिंता जताई जा रही है."
उनका ये भी कहना है कि इतने बड़े आयोजन से भारत ये उम्मीद कर रहा था कि उसेक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और यहां पूंजीनिवेश होगा लेकिन खेल की तैयारी में आई अफ़रा-तफ़री से उसे यह लाभ नहीं मिल सकेगा.मूडीज़ ने कहा, "इसके विपरीत नकारात्मक प्रचार से विदेशी पूंजीनिवेश में रुकावट आएगी और भारत में बहुराष्ट्रीय व्यापार फैलाने पर लोग कई बार सोचेंगे."
बहरहाल राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा, "मैं ये मानता हूँ कि कुछ दिक़्क़ते हुई हैं. दिक़्क़तें तो दूसरे खेलों में भी होती हैं. मैनचेस्टर में हमें यूनिवर्सिटी में रहना पड़ा था. हमने तो खेल गाँव तैयार करके दिया है. लेकिन मैं कह सकता हूँ कि मेलबॉर्न जैसा खेल करके दिखाएँगे. आलोचकों का जवाब मैं खेलों के बाद दूँगा."