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राष्ट्रमंडल खेल : प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली से संयुक्त राष्ट्र खुश

नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। इस वर्ष अक्टूबर में राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान वातावरण को साफ रखने के संबंध में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली को संयुक्त राष्ट्र ने भी सराहा है।

विश्व भर में प्रदूषण को रोकने के संबंध में किए जा रहे कार्यो पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष संस्था-द वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित 'सिस्टम ऑफ एयर पोल्यूशन फोरकास्टिंग एंड रिसर्च' (एसएएफएआर) न सिर्फ भारत में बल्कि एशिया और पूरी दुनिया में इस दिशा में किए जा रहे कार्यो के मद्देनजर एक उदाहरण पेश करेगी।

एसएएफएआर का विकास राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान वायु की गुणवत्ता को उच्च स्तर का बनाए रखने के लिए किया गया है। इसके विकास में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) ने अग्रणी भूमिका निभाई है।

डब्ल्यूएमओ के एटमास्फेरिक इंवायरामेंट रिसर्च डिवीजन के प्रमुख ने एसएएफएआर के निदेशक गुरफान बेग को मार्च में लिखे अपने पत्र में लिखा है, "डब्ल्यूएमओ ने एशिया क्षेत्र में एसएएफएआर द्वारा किए गए कार्यों को गौर से देखा है। अपने प्रयासो से यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित करेगी।"

संयुक्त राष्ट्र की इस अग्रणी संस्था द्वारा एसएएफएआर द्वारा किए जा रहे कार्यो को मान्यता देने के बाद उन एथलीटों को राहत मिली होगी, जिन्होंने भारत में होने वाले अब तक के सबसे बड़ी खेल आयोजन में सिर्फ इसलिए हिस्सा नहीं लेने की बात कही थी कि यहां वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।

एसएएफएआर के अंतर्गत राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हवा की गुणवत्ता को लेकर प्रत्येक घंटे एक भविष्यवाणी जारी की जाएगी। इसके अलावा इसके जरिए 24 घंटे के लिए एभी भविष्यवाणी जारी की जाएगी। इस काम के लिए शहर में कुल 11 केंद्र स्थापित किए गए हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक अजीत त्यागी ने आईएएनएस को बताया, "इस तकनीक का बहुत फायदा है। इसके जरिए किसी स्थान या क्षेत्र विशेष में वायु प्रदूषण के बढ़त स्तर का पता चल जाएगा और दिल्ली सरकार प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए उस क्षेत्र में स्थित दुकानों को बंद करा सकती है या फिर यातायात पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है।"

एसएएफएआर के माध्यम से हवा में नाइट्रोजन, कार्बनडाइक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, ब्लैक कार्बन और बेंजेन की मात्रा का पता लगाया जा सकेगा। यह राष्ट्रमंडल खेल आयोजन स्थल के चार किलोमीटर के क्षेत्र पर विशेष नजर रखेगा और पल-पल उस क्षेत्र के वायु प्रदूषण के स्तर की जानकारी देता रहेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:36 [IST]
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