स्पेन पहली बार बना फीफा विश्व चैंपियन
जोहांसबर्ग। स्पेन की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने रविवार रात नीदरलैंड्स को 1-0 से हराकर फीफा विश्व कप 2010 पर कब्जा कर लिया। वर्ष 2008 में यूरोपीयन चैम्पियन रही स्पेन ने पहली बार विश्व कप जीता है। मिडफील्डर आंद्रेस इनिएस्ता ने मैच के 119वें मिनट में शानदार गोल करते हुए अपनी टीम को यह जीत दिलायी।
सॉकर सिटी स्टेडियम में खेले गए मैच में नीदरलैंड्स के हाथ से तीसरी बार विश्व चैम्पियन बनने का मौका निकल गया। पहली बार किसी यूरोपीय देश से बाहर दो यूरोपीय देशों के बीच खेले गए इस मैच के बाद विश्व फुटबाल को आठवां चैम्पियन मिला। यह दूसरा मौका है जब किसी टीम ने यूरोपीयन चैम्पियन होने के साथ-साथ विश्व कप जीता है। इससे पहले 1974 में जर्मनी ने यह कारनामा किया था।
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मैच में शुरू से ही स्पेन ने नीदरलैंड्स पर हावी होने के प्रयास किए। हालांकि नीदरलैंड्स की रक्षापंक्ति ने भी स्पेनिश खिलाडि़यों को निर्धारित 90 मिनट में एक भी गोल करने का मौका नहीं दिया। अतिरिक्त समय के पहले हॉफ में भी कोई गोल नहीं हुआ लेकिन दूसरे हॉफ में इनिएस्ता ने गोल करने के तीन मौके गंवा चुके चेस्क फेब्रीगास के शानदार पास पर हॉलैंड के गोलकीपर को चौंकाकर अपनी टीम विश्व चैम्पियन बना दिया। इनिएस्ता ने यह गोल मैच के 116वें मिनट में किया। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।
इनिएस्ता के गोल और फिर मैच खत्म होने की सीटी बजने के साथ स्पेन के खिलाड़ियों, कोच, सहयोगी स्टाफ और सॉकर सिटी स्टेडियम में मौजूद लाल रंग की पोशाक पहने हजारों प्रशंसकों की खुशी देखने लायक थी। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे जबकि 32 वर्ष बार खिताब जीतने का मौका अपने हाथ से निकलने का गम साफ तौर पर हॉलैंड के खिलाड़ियों के चेहरों पर देखा जा सकता था।
दो बार चूके रोबेन
मिडफील्डर अर्जेन रोबेन जिन्होंने इस विश्व कप में दो गोल किए हैं और फाइनल में दो बार अपनी टीम को बढ़त दिलाने का मौका चूके, की आंखें नम हो गई थीं। उनके साथी और इस विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले वेस्ले श्नाइडर उन्हें दिलासा देते नजर आए। हॉलैंड के प्रशंसकों की आंखें भी छलक आईं और सबने स्टेडियम से बाहर जाने की बजाय एक कोने में खड़े होकर इस हार पर अफसोस जताया।
बहरहाल, स्पेन का नाम इससे पहले खिताब जीतने वाले पांच बार के चैम्पियन ब्राजील, चार बार के चैम्पियन इटली, तीन बार के चैम्पियन जर्मनी, दो बार खिताब जीत चुके उरुग्वे, दो बार के चैम्पियन अर्जेटीना, एक-एक बार खिताब जीत चुकीं इंग्लैंड एवं फ्रांस की टीमों के साथ जुड़ गया है। इन देशों के अलावा चेकोस्लोवाकिया, स्वीडन और हंगरी की टीमें भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं लेकिन उन्हें खिताबी जीत नहीं मिली।
सॉकर सिटी स्टेडियम में खेले गए मैच में नीदरलैंड्स के हाथ से तीसरी बार विश्व चैम्पियन बनने का मौका निकल गया। पहली बार किसी यूरोपीय देश से बाहर दो यूरोपीय देशों के बीच खेले गए इस मैच के बाद विश्व फुटबाल को आठवां चैम्पियन मिला। यह दूसरा मौका है जब किसी टीम ने यूरोपीयन चैम्पियन होने के साथ-साथ विश्व कप जीता है। इससे पहले 1974 में जर्मनी ने यह कारनामा किया था।
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मैच में शुरू से ही स्पेन ने नीदरलैंड्स पर हावी होने के प्रयास किए। हालांकि नीदरलैंड्स की रक्षापंक्ति ने भी स्पेनिश खिलाडि़यों को निर्धारित 90 मिनट में एक भी गोल करने का मौका नहीं दिया। अतिरिक्त समय के पहले हॉफ में भी कोई गोल नहीं हुआ लेकिन दूसरे हॉफ में इनिएस्ता ने गोल करने के तीन मौके गंवा चुके चेस्क फेब्रीगास के शानदार पास पर हॉलैंड के गोलकीपर को चौंकाकर अपनी टीम विश्व चैम्पियन बना दिया। इनिएस्ता ने यह गोल मैच के 116वें मिनट में किया। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।
इनिएस्ता के गोल और फिर मैच खत्म होने की सीटी बजने के साथ स्पेन के खिलाड़ियों, कोच, सहयोगी स्टाफ और सॉकर सिटी स्टेडियम में मौजूद लाल रंग की पोशाक पहने हजारों प्रशंसकों की खुशी देखने लायक थी। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे जबकि 32 वर्ष बार खिताब जीतने का मौका अपने हाथ से निकलने का गम साफ तौर पर हॉलैंड के खिलाड़ियों के चेहरों पर देखा जा सकता था।
दो बार चूके रोबेन
मिडफील्डर अर्जेन रोबेन जिन्होंने इस विश्व कप में दो गोल किए हैं और फाइनल में दो बार अपनी टीम को बढ़त दिलाने का मौका चूके, की आंखें नम हो गई थीं। उनके साथी और इस विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले वेस्ले श्नाइडर उन्हें दिलासा देते नजर आए। हॉलैंड के प्रशंसकों की आंखें भी छलक आईं और सबने स्टेडियम से बाहर जाने की बजाय एक कोने में खड़े होकर इस हार पर अफसोस जताया।
बहरहाल, स्पेन का नाम इससे पहले खिताब जीतने वाले पांच बार के चैम्पियन ब्राजील, चार बार के चैम्पियन इटली, तीन बार के चैम्पियन जर्मनी, दो बार खिताब जीत चुके उरुग्वे, दो बार के चैम्पियन अर्जेटीना, एक-एक बार खिताब जीत चुकीं इंग्लैंड एवं फ्रांस की टीमों के साथ जुड़ गया है। इन देशों के अलावा चेकोस्लोवाकिया, स्वीडन और हंगरी की टीमें भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं लेकिन उन्हें खिताबी जीत नहीं मिली।
Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:23 [IST]
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