2007 में धोनी की रणनीति की वजह से हारा था पाकिस्तान, राॅबिन उथप्पा ने किया खुलासा
नई दिल्ली। साल 2007 में हुए आईसीसी टी20 विश्व कप के एक ग्रुप मैच में भारतीत क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को 'बॉल आउट' के जरिए रोमांचक जीत दर्ज की थी। यह मैच 14 सितंबर को डरबन में खेला गया था। भारत ने 141 रन बनाए तो पाकिस्तान ने भी स्कोर अंत तक बराबर पहुंचा दिया। आईसीसी नियम के तहत फिर 'बॉल आउट' के जरिए नतीजा निकला जिसमें भारत बाजी मार गया। इस मैच में भारत को कैसे रोमांचक जीत मिली, इसका खुलासा तब टीम में शामिल राॅबिन उथप्पा ने किया है।

धोनी की रणनीति की वजह से हारा था पाकिस्तान
राॅबिन उथप्पा ने राजस्थान रॉयल्स के पॉडकास्ट में इश सोढ़ी से बात करते हुए बताया, ''एक बात थी जो धोनी ने बहुत अच्छी तरह से की थी, वह यह थी कि धोनी विकेट के पीछे पाकिस्तानी कीपर की तरह नहीं खड़े हुए थे। बॉल आउट के दौरान पाकिस्तानी विकेटकीपर कामरान अकमल वहीं खड़े हुए थे, जहां आमतौर पर विकेटकीपर खड़े होते हैं। विकेट से काफी पीछे की तरफ।'' उथप्पा ने आगे कहा, ''स्टम्स के पीछे कुछ कदम पीछे की तरफ, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी स्टम्प्स के ठीक पीछे बैठ गए थे। धोनी की पोजिशन ने हमारे लिए काम आसान कर दिया था। हम बस धोनी को बॉल कर थे और इसी ने हमें विकेट पर मारने का अच्छा माैका दिया। हमने बस यही किया।''

ऐसा रहा था मैच
इस मुकाबले में पाकिस्तान ने टाॅस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। पाकिस्तान ने 7 विकेट खोकर भारत के सामने 141 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में भारत ने भी वीरेंद्र सहवाग के 50 रन की मदद से 9 विकेट खोकर 141 रन बनाकर मैच बराबरी पर ला दिया। ऐसे में मुकाबला 'बॉल आउट' की ओर बढ़ा। दोनों टीमों के 5 गेंदबाज स्टंप उखाने के लिए तैयार हो गए। पहली बॉल पाकिस्तान के यासिर ने फेंकी और वह निशाना लगाने से चूक गए। वहीं दूसरी ओवर भारत की तरफ से पहले सहवाग आगे आए। उन्होंनें स्टंप गिराया और भारत 1-0 की बढ़त दिला दी। फिर हरभजन सिंह आए। उन्होंने भी गेंद करते हुए गिल्लियां गिरा दीं। उधर पाकिस्तान ने उमर गुल और अफरीदी को माैका मिला लेकिन वो चूक गए। भारत के पास 2-0 की बढ़त थी। ऐसे में भारत की तरफ से तीसरें बाॅलर के रूप में राॅबिन उथप्पा आए। उथप्पा ने विकेट गिरा दिया और भारत को 3-0 से जीत दिला दी।

क्या था 'बॉल आउट' नियम
सुपर ओवर के आने से पहले बराबरी पर छूटे मैच का फैसला 'बॉल आउट' के तहत होता था।। 'बॉल आउट' में दोनों टीमों के पांच गेंदबाजों को गेंदबाजी करने का माैका दिया जाता था। गेंदबाजों को गिल्लियां उड़ाने का टारगेट मिलता था। ऐसे में जिस टीम के गेंदबाज ज्यादा बार गेंद से गिल्लियां गिरा पाते उसे विजयी घोषित कर दिया जाता था। अगर दोनों टीमों के खिलाड़ी बराबर स्टंप गिरा लें तो यह खेल तब तक चलता था जब तक फैसला न हो जाए। उदाहरण के लिए अगर किसी एक टीम के 5 गेंदबाजों में से 3 गेंदबाज स्टंप उखाड़ने में कामयाब हो जाते और दूसरी टीम के गेंदबाज सिर्फ 2 ही स्टंप उखाड़ते हैं जो 3-2 के आधार पर पहली टीम को विजयी माना जाता है।
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