जज्बे को सलाम: मूक-बधिर श्रद्धा वैष्णव को मिली स्टेट टीम में जगह
नई दिल्ली। क्रिकेट प्रेमियों के लिए तो ये नाम नया नहीं है लेकिन जो लोग क्रिकेट में रूचि नहीं रखते हैं उनके लिए जरूर श्रद्धा वैष्णव एक अनसुना सा नाम है। तो चलिए बताते हैं श्रद्धा वैष्णव के बारे में आपको विस्तार से, जिन्हें जानने के बाद आपका सीन फक्र से ऊंचा और आंखें खुशी से छलछला उठेंगी।
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छत्तीसगढ़ राज्य के लिए क्रिकेट खेलने वाली 18 वर्षीय श्रद्धा ना तो सुन सकती हैं और ना ही बोल सकती हैं, बावजूद इसके उनकी गेंदबाजी के आगे बड़े-बड़े दिग्गज चारों खाने चित्त हो जाते हैं। श्रद्धा छत्तीसगढ़ की महिला क्रिकेट टीम के लिए चुनी गई हैं, वो देश की पहली महिला दिव्यांग खिलाड़ी हैं जो कि स्टेट क्रिकेट टीम के लिए चुनी गईं हैं।
श्रद्धा वैष्णव छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली हैं, जो मेहनत के दम पर छत्तीसगढ़ की अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम के लिए चुनी गई हैंं। वो लेगस्पिनर हैं और 13 साल की उम्र से क्रिकेट खेल रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह कहते हैं कि श्रद्धा आज बहुतों के लिए उम्मीद की किरण हैं, उनकी वजह से आज क्रिकेट अकादमी में लड़कियां एडमिशन लेने आ रही हैं।
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श्रद्धा की सफलता के पीछे उनके परिवार और कोच मोहन सिंह ठाकुर का बहुत बड़ा हाथ हैं, जिन्होंने उनकी कमियों को नजर अंदाज करके, उनकी खूबियों को तराशा है और आज देश को एक बेहतरीन उम्दा क्रिकेटर दिया है।
नेशनल रिकॉर्ड
श्रद्धा ने इस साल राष्ट्रीय स्कूल स्पर्धा में तमिलनाडु के खिलाफ तीन ओवरों में दो रन देकर पांच विकेट लिए थे। यह नेशनल रिकॉर्ड है और अब वो साइन लैंग्वेज के जरिए रिवर्स स्विंग को सीख रही हैं, देश की इस होनहार बेटी को हमारा भी दिल से सलाम।
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