जसप्रीत बुमराह का खुलासा- मुझे मलिंगा ने याॅर्कर सिखाई, यह सच नहीं है
नई दिल्ली। श्रीलंका के लसिथ मलिंगा ने कुछ महीने पहले दावा किया था कि उन्होंने जसप्रीत बुमहार को बताया था कि कैसे याॅर्कर फेंकी जाती है। मलिंगा ने कहा था कि मैं वास्तव में बुमराह की मदद करके खुश हूं और वह अब विश्व का नंबर 1 गेंदबाज है। मैने खुश होकर उसे ऐसे टिप्स दिए, जिनसे वह अपने करियर में मेरे योगदान को पहचान सके। लेकिन मलिंगा की इन बातों को भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने गलत ठहराया है। उनके अनुसार मलिंगा के इस दावे में सच्चाई नहीं है।

जो भी सीखा टीवी के जरिए सीखा
बुमराह ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने टेलीविजन देखने से यॉर्कर सीखी, न कि लसिथ मलिंगा ने, जैसा कि लोग दावा करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस बारे में बात की कि उनकी गेंदबाजी और विविधताओं को टेलीविजन देखने और उनके द्वारा किए गए विश्लेषण से कैसे विकसित किया गया। बुमराह ने सितंबर में विंडीज के खिलाफ एक टेस्ट मैच में हैट्रिक ली थी। कहा जाने लगा ये सब मलिंगा के कारण संभव हुआ। बुमराह ने खुद सामने आकर खुलासा करके उन रिपोर्टों का खंडन किया कि और कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में जो कुछ भी सीखा है, वह ज्यादातर टेलीविजन से है। बुमराह ने अब तक खेले गए 149 टी 20 मैचों में अपने स्पेल में हर 19 वें मैच में 174 विकेट चटकाए।

मलिंगा ने कुछ नहीं सिखाया
बुमराह ने कहा, "सारा क्रिकेट मैंने टीवी से सीखा है। बहुत से लोग मानते हैं कि मलिंगा ने मुझे यॉर्कर सिखाया, लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने मुझे मैदान पर कुछ नहीं सिखाया। मैंने उनसे जो बातें सीखीं, वह दिमाग के बारे में हैं। विभिन्न परिस्थितियों को कैसे संभालना है। क्रोध कैसे न करें। एक बल्लेबाज के लिए योजना कैसे बनाई जाए।" इसके अलावा, बुमराह ने कहा, "अब भी, मैं वीडियो देखता हूं और मैं प्रतिक्रिया सुनता हूं, और फिर मैं सबकुछ अपने दम पर तैयार करना पसंद करता हूं, जिस तरह से मैं चाहता हूं। मैं खुद विश्लेषण करने की कोशिश करता हूं। क्योंकि क्रिकेट के मैदान पर, मैं अकेला रहूंगा। कोई भी मेरी मदद करने के लिए वहां नहीं जा रहा है इसलिए मुझे अपनी मदद करने में सक्षम होना चाहिए। "

सड़क पर ऐसे की यॉर्कर की तैयारी
बुमराह ने यह भी बताया कि कैसे उन्होंने याॅर्कर सीखी। उन्होंने कहा कि हमारे पास रबड़ की गेंद होती थी तो बेहद सख्त थी और उस पर सीम भी अंकित होती थी। ये गेंद काफी स्विंग होती थी। हम पिच पर नहीं खेलते थे इसलिए कोई सीम मूवमेंट नहीं होती थी और विकेट के पीछे कैच आउट होने की संभावना भी नहीं थी। ऐसे में मैं जितना अधिक हो सके बल्लेबाजों को फुल लेंग्थ पर गेंद फेंकने की कोशिश करता था। अगर आपको विकेट चाहिए तो यॉर्कर फेंकनी होती थी। मेरा मानना है कि इस अनुभव ने मुझे समझदार बनाया।
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