अब खत्म होगी कोहली-शास्त्री की तानाशाही, पर कतरने की तैयारी शुरू
नई दिल्ली। टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली की ताकतवर युगलबंदी अब टूटने वाली है। कोहली और शास्त्री का ऐसा आतंक था कि न तो खिलाड़ी कुछ बोल पाते थे और न ही सेलेक्टर। विरोट कोहली ने अपना ऐसा रुतबा बना लिया था कि कोई इनकी मनमानी के खिलाफ मुंह खोलने से डरता था। कोहली बेशक बड़े खिलाड़ी हैं लेकिन वे इतने भी बड़े नहीं कि खेल से ऊपर हो जाएं। विश्वकप सेमीफाइनल में भारत की हार ने इन दोनों के दबदबे को हिला कर रख दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वरा नियुक्त प्रशासकों की समिति ने सेमीफाइनल में हार के बाद जब कोहली और शास्त्री से कई तीखे सवाल पूछे तो पहली बार इनको वक्त बदलने का अहसास हुआ। प्रशासकों की समिति के सख्त रुख को देख कर अब सेलेक्शन कमेटी भी रंग में आ रही है। अब इन दोनों के दिन लदने वाले हैं। एकदिवसीय मैचों के लिए रोहित शर्मा को कप्तान बनाये जाने की चर्चा है। तो रवि शास्त्री को मुख्य कोच बनने के लिए फिर से एप्लिकेशन देना होगा। ये सही है कि शास्त्री का कार्यकाल पूरा होने को है लेकिन उन पर अंकुश लगाने की तैयारी शुरू हो गयी है। अगर उनको खुदा न खास्ते फिर मौका मिल भी गया तो सपोर्टिंग स्टाफ चुनने का अधिकार नहीं रहेगा। शास्त्री अभी तक अपनी पसंद के सपोर्टिंग स्टाफ चुनते रहे थे। प्रशासकों की समिति ने विश्वकप में प्रदर्शन को लेकर कोच, कप्तान और टीम प्रबंधन से प्रजेन्टेशन देने को कहा है।

कोहली की मनमानी
विराट कोहली जैसे-जैसे बड़े खिलाड़ी बनते गये उसके हिसाब से उनकी हैसियत भी बदलती गयी। वे ताकतवर बने तो अपनी पसंद-नापसंद के आधार पर फैसले लेने लगे। विश्वकप के पहले अंबाती रायडू टीम में नम्बर चार के लिए तय थे। लेकिन जब टीम का एलान हुआ तो विजय शंकर को जगह मिल गयी। रायडू कोहली के गुड बुक में नहीं थे। चयन समिति में कोहली का इतना दखल था कि कोई उनकी बात काट नहीं सकता था। जिसे कोहली ने चाहा उसे ही चुना गया। शिखर धवन के घायल होने के बाद ऋषभ पंत को लंदन बुला लिया गया। राहुल ओपनर बन गये। जब विजय शंकर घायल हुए तो उनकी जगह मयंक अग्रवाल को भारत से लंदन बुला लिया गया। हैरानी की बात ये है कि जगह खाली हुई थी मिडिल ऑर्डर में और बुलाया गया सलामी बल्लेबाज को। मयंक कर्नाटक की तरफ से पारी की शुरुआत करते हैं। शास्त्री और कोहली ने नम्बर चार पर इस कदर रायता फैलाया कि टीम पूरे विश्वकप में इससे उबर नहीं सकी। विजय शंकर और पंत दोनों नाकाम साबित हुए। आखिर क्या वजह थी कि रायडू को मौका नहीं दिया गया ? नम्बर चार की कमजोर कड़ी भारत की हार एक बड़ी वजह है। प्रशासकों की समिति ने कोहली और शास्त्री की इस मनमानी को बहुत गंभीरता से लिया है।
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कोहली का अहंकार
विराट कोहली को हां में हां मिलाने वाला कोच चाहिए। उन्हें अनुशासनप्रिय कोच बिल्कुल पसंद नहीं। तभी तो कोहली भारत के महान गेंदबाज अनिल कुंबले को कोच के रूप में झेल नहीं पाये। 2017 में कोहली ने स्वाभिमानी कुंबले के साथ ऐसा वर्ताव किया कि उन्होंने कोच पद से इस्तीफा देना ही ठीक समझा। तब कोहली इतने ताकतवर थे कि क्रिकेट प्रशासन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी इस मनमानी का विरोध नहीं किया था। यहां तक कि सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज भी कुंबले के पक्ष में नहीं खड़े हुए थे। ये कोहली का सबसे बड़ा अहंकार था। भारतीय क्रिकेट में अनिल कुंबले बहुत बड़े मुकाम पर खड़े हैं। वे भारत के कप्तान रहे हैं। उन्होंने 132 टेस्ट मैचों में 619 विकेट हासिल किये हैं। वे भारत के नम्बर एक और दुनिया के तीसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं। लेकिन ऐसे महान खिलाड़ी को भी कोहली ने अपमानित कर दिया था। भारत के पूर्व कप्तान विशन सिंह बेदी ही वो अकेले पूर्व क्रिकेटर थे जिन्होंने कोहली को खरी-खरी सुनायी थी। लेकिन वक्त सबका इंसाफ कर देता है। अब जल्द ही इन दोनों की तानाशाही खत्म होने वाली है।

रवि शास्त्री की मोटी पगार
2018 में जब भारतीय टीम आस्ट्रेलिया जा रहा थी तब एक पत्रकार ने कोहली से पूछा था, क्या कोच रवि शास्त्री आपके यस मैन हैं ? इस सवाल को सुन कर कोहली का पारा चढ़ गया था और गु्स्से में वे आगे बढ़ गये थे। टीम के खिलाड़ी भी यह मानते हैं कि शास्त्री वही करते हैं जो कोहली चाहते हैं। कोहली ने भी हमेशा शास्त्री का बचाव किया है। दरअसल कोहली को एक कठपुतली कोच चाहिए और शास्त्री को मोटी पगार वाली नौकरी। मुख्य कोच पद के लिए बीसीसीआइ हर महीने शास्त्री को करीब 63 लाख रुपये तनख्वाह देती है। उनका सालाना पैकेज 7 करोड़ 61 लाख का है। शास्त्री जब टीम इंडिया के डायरेक्टर थे तब उन्हें सालान करीब 7 करोड़ रुपये मिलते थे। उस समय शास्त्री ने अपने मीडिया कमिटमेंट्स छोड़ने के लिए एक मोटा मुआवजा मांगा था। उस 7 करोड़ में उनका मुआवजा भी शामिल था। 2017 में शास्त्री को कोच बनान के लिए कोहली ने खूब खेल खेले। कुंबले ने जब यह पद छोड़ दिया तो शास्त्री ने कोहली की मदद से यह पद हासिल कर लिया। इंटरव्यू तो दिखाने के लिए होता है। 63 लाख रुपये महीने की तनख्वाह तो छप्परफाड़ कमाई है। ऐसे में भला रवि शास्त्री क्यों कोहली से पंगा लेंगे ?
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