आपके वोट से क्रिकेट का ऑस्कर जीत सकता है भारतीय टीम का यह लम्हा, जानें क्या है प्रक्रिया
नई दिल्ली। साल 2011 हर भारतीय खिलाड़ी के जहन में बेहद खास रहा है क्योंकि इसी साल भारतीय टीम ने 27 साल के इंतजार के बाद दोबारा विश्व चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया था। यह विश्व कप इसलिये भी खास था क्योंकि मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का यह आखिरी विश्व कप था और टीम इंडिया ने भी जीत के बाद इसे उन्हें समर्पित किया था। अब इसी लम्हे मे से जुड़े एक पल को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्डस से सम्मानित किया जा सकता है।
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2011 में विश्व कप जीतने के बाद पूरी भारतीय टीम ने विश्व कप के साथ सचिन तेंदुलकर को अपने कंधे पर उठाकर पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाया था। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्डस में से एक लॉरेस अवॉर्ड में इस लम्हे को 'कैरीड ऑन द शोल्डर्स ऑफ ए नेशन' का नाम दिया गया है जो पिछले 2 दशक में क्रिकेट का सबसे खूबसूरत लम्हा बनने की रेस में शामिल है।
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क्रिकेट का ऑस्कर जीत सकता है सचिन तेंदुलकर का यह लम्हा
क्रिकेट का ऑस्कर माने जाने वाले लॉरेस अवॉर्ड में सचिन तेंदुलकर के इस लम्हे समेत 20 और पल शामिल किये गये हैं जो साल 2000 से 2020 तक के ग्रेटेस्ट लॉरेस स्पोर्टिंग मूमेंट की रेस में शामिल है। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम ने लगभग 9 साल पहले विश्व कप जीता था जोकि सचिन तेंदुलकर का का छठा और आखिरी विश्व कप था।
भारतीय टीम के सदस्यों ने इस खिताबी जीत के बाद सचिन तेंदुलकर को अपने कंधे पर उठाकर मैदान का ‘लैप ऑफ ऑनर' लगाया था जहां पर इस दिग्गज बल्लेबाज की आंखों से आंसू गिर रहे थे।

आपको वोट से भारत जीत सकता है अवॉर्ड, ऐसे करें वोटिंग
लॉरेस अवॉर्ड के लिये वोटिंग जारी है। इस अवॉर्ड की घोषणा 17 फरवरी को बर्लिन में की जायेगी। क्रिकेट फैंस उससे पहले 10 जनवरी से 16 फरवरी तक वोट कर सकते हैं। आप भी अपना वोट देकर इस लम्हे को यह अवॉर्ड जीतने में मदद कर सकते हैं। इसके लिये आप यहां पर क्लिक करके सीधे वोट कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि खेलों की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स में शामिल लॉरेस अवॉर्ड की शुरुआत 1999 में लॉरेस स्पोर्ट फॉर गुड फाउंडेशन के डैमलर और रिचीमॉन्ट ने की थी। पहली बार यह अवॉर्ड 25 मई 2000 को दिए गए थे। इस अवॉर्ड के तहत 13 अलग-अलग कैटिगरी में अवॉर्ड के लिए चुनाव किया जाता है।

वानखेड़े के मैदान पर भारत 27 साल बाद बना था विश्व चैम्पियन
भारत ने विश्व कप 2011 के फाइनल में सचिन तेंदुलकर के घरेलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम पर श्रीलंका को हरा कर 27 साल के खिताबी सूखे को मिटाया था और विश्व चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया था।
अपने करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर ने 6 बार विश्व कप खेला और 2 बार फाइनल में पहुंचे। 2011 की खिताबी जीत से पहले सचिन तेंदुलकर 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल खेले थे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की टीम ने भारत को बुरी तरह से हराकर खिताब जीतने के सपने को चूर कर दिया था।
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