कभी-कभी कोहली के गुस्से से अश्विन को लगता है डर
नई दिल्ली। टीम इंडिया के स्टार गेंदबाज आर अश्विन यूं तो कभी भी किसी भी मैच का रुख पलटने का माद्दा रखते हैं, लेकिन जब अपने कप्तान विराट कोहली की बारी आती है तो वह कभी-कभी उनके गुस्से से डर जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान घायल होने की वजह से वह इस बार आईपीएल में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं, ऐसे में उनकी टीम को उनकी कमी खल सकती है।

डर लगता है कोहली से
जब धोनी कप्तान थे तो जो पहली बात मेरे जेहन में आती थी वह यह कि वह काफी गंभीर थे, जबकि कोहली अभी जल्द ही कप्तान बने हैं और वह पूरी तरह से उनसे अलग हैं। वह लोगों से सीधा विवाद करते हैं, वह काफी एग्रेसिव हैं, कभी-कभी मुझे लगता है कि वह इतना एग्रेसिव हो जाते हैं कि मुझे उनसे डर लगता है, मैं सोचता हूं कि यह फील्डर हटाउं या नहीं हटाउं। वहीं विराट के साथ ऐसा नहीं है, आप को यह नहीं सोचना पड़ता है कि आपने फील्डर लगाया है तो क्यों लगाया है, वह हमेशा अटैकिंग के लिए होता है। पिछले दो सालों में कोहली बतौर इंसान और कप्तान काफी बदले हैं, मुझे लगता है कि वह पूरी पीढ़ि को बदलने का काम कर रहे हैं।

कप्तान के बारे में धारणा अलग होनी चाहिए
क्रिकेट में बल्लेबाज को ही कप्तानी में प्राथमिकता दी जाती है, इसके लिए गेंदबाजों को कम प्राथमिकता दी जाती है, इसपर अश्विन का कहना है कि इसके पीछे की वजह यह है कि वह खुद अधिक गेंदबाजी कर सकते हैं या फिर खुद को गेंदबाजी से बचा सकते हैं। मुझे लगता है कि कप्तान की भूमिका को कभी-कभी बहुत अधिक महत्ता दी जाती है और उसे कभी-कभी बहुत कम आंका जाता है। धोनी और कोहली की कप्तानी के बारे में अश्विन का कहना है कि मुझे लगता है कि यह काफी उर्जा का काम है, मुझे लगता है कि पांच साल के बाद कप्तान को खुद ही कप्तानी छोड़ देनी चाहिए, ऐसा इसलिए नहीं कि आप बतौर कप्तान टॉस करने मैदान में जाते हैं बल्कि मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस, सेलेक्शन मीटिंग, अंतिम 11 का चयन आदि। ऐसे में धोनी ने जो किया वह काबिल ए तारीफ है, वह भी ऐसे समय में जब देश चाहता है कि वह लंबे समय तक खेलें।

कोहली पूरी पीढ़ि को बदलने का काम कर रहे हैं
जब धोनी कप्तान थे तो जो पहली बात मेरे जेहन में आती थी वह यह कि वह काफी गंभीर थे, जबकि कोहली अभी जल्द ही कप्तान बने हैं और वह पूरी तरह से उनसे अलग हैं। वह लोगों से सीधा विवाद करते हैं, वह काफी एग्रेसिव हैं, कभी-कभी मुझे लगता है कि वह इतना एग्रेसिव हो जाते हैं कि मुझे उनसे डर लगता है, मैं सोचता हूं कि यह फील्डर हटाउं या नहीं हटाउं। वहीं विराट के साथ ऐसा नहीं है, आप को यह नहीं सोचना पड़ता है कि आपने फील्डर लगाया है तो क्यों लगाया है, वह हमेशा अटैकिंग के लिए होता है। पिछले दो सालों में कोहली बतौर इंसान और कप्तान काफी बदले हैं, मुझे लगता है कि वह पूरी पीढ़ि को बदलने का काम कर रहे हैं।

आईपीएल इंज्वॉय कर रहा
अश्विन का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में मैं अपनी फिटनेस से काफी जूझ रहा था, काफी मशक्तत के बाद मैंने खुद को उस सीरीज के दौरान फिट बनाए रखने की कोशिश की, धर्मशाला मैदान में मैंने जो दो स्पेल किए क्योंकि हमें लगता था कि इस मैच को हम जीत सकते हैं, ऐेसे में मैंने हालात को समझते हुए वह ओवर डाला। आईपीएल में नहीं खेल पाने पर अश्विन कहते हैं कि मैं हर रोज आईपीएल देख रहा हूं और इसे मैं काफी इंज्वॉय कर रहा हूं।

क्यूं कम है ओडीआई में बैटिंग औसत
टीम इंडिया के लिए नबर छह पर बल्लेबाजी के बारे में अपने अनुभव को साझा करते हुए अश्विन का कहना है कि जब मैं बल्लेबाजी करने उतरता हूं तो अपना अधिक ध्यान इस पर केंद्रित करता हूं। शुरुआती 20 गेंदों को मैं अधिक से अधिक अपने शरीर के करीब खेलने की कोशिश करता हूं। आर अश्विन का टेस्ट में बल्लेबाजी औसत 32 है जबकि ओडीआई में उनका औसत 16 का है। अश्विन कहते हैं कि वनडे में मैं 8वें नंबर पर खेलता हूं, ऐसे में इस नंबर पर आने के बाद अक्सर मुझे या तो तेज खेलना होता है और कुछ ही ओवर बचे होते हैं, ऐसे में ओडीआई में रन टेस्ट की तुलना में कम हैं।

बल्लेबाजी में सुधार कर रहा हूं
अश्विन कहते हैं कि मैं अन्य बल्लेबाजों की तरह तकनीकी रुप से अधिक मजबूत नहीं हूं लेकिन मैं अपनी उपयोगित को बनाए रखने के लिए ओडीआई और टी-20 दोनों के लिहाज से खुद को स्थितियों में ढाल रहा हूं। क्रिकेट में आने वाली आगे की पीढ़ि के बारे में अश्विन कहते हैं कि एक समय ऐसा आएगा जब मैं रिटायर हो जाउंगा तो उसके बाद भी मैं क्रिकेट में अपना सबकुछ देने की कोशिश करुंगा। मैं अपनी क्रिकेट अकादमी के जरिए आने वाली पीढ़ि को जो क्रिकेट ने मुझे दिया उन्हें देने की कोशिश करुंगा। मैं चाहता हूं कि मेरी अकादमी में स्कूल की तरह पाठ्यक्रम हो, जहां रिजल्ट मिले, कोच हों, ट्रेनिंग दी जाए, मैंने जो कुछ सीखा उसी की वजह से मैं इतनी तेजी से आगे बढ़ा, ऐसे में मैं चाहता हूं कि आगे आने वाली पीढ़ि को भी मैं वह सब सिखा सकूं जिसे मैंने सीखा।
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