बीसीसीआई को महँगा पड़ेगा पैसे का दंभ
दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड होने का असर भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर साफ़ दिख रहा है. अब इसके विश्व क्रिकेट में अलग-थलग पड़ने के आसार नज़र आ रहे हैं.
भारत में शुरू हुआ इंडियन प्रीमियर लीग़ (आईपीएल) इस बात का सूचक बन गया है कि पैसा ही खेल चलाता है. आख़िर आईपीएल के कारण ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी को अपनी प्रतियोगिता चैंपियंस ट्रॉफी के लिए समय मिल पाना मुश्किल हो गया है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ ने इसे वर्ष 2009 तक के लिए स्थगित कर तो दिया, लेकिन भारत की ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होने वाली एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला और ट्वेंटी-ट्वेंटी चैंपियंस लीग के कारण इस प्रतियोगिता के लिए तीन हफ़्ते का समय निकालना भी मुश्किल हो रहा है.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड और आईपीएल के प्रशासकों ने साफ़ कह दिया है कि यह परेशानी आईसीसी की है और वही इसका हल निकाले.
तनातनी
अभी यह बवाल शांत भी नहीं हुआ था कि आईपीएल पर इंग्लैंड और श्रीलंका के क्रिकेट अधिकारी भारत से भिड़ते नजर आ रहे हैं.
राजनीतिक कारणों से इंग्लैंड को जिम्बाब्वे टीम का दौरा रद्द करना पड़ा. अप्रैल-मई के खाली समय का सदुपयोग करने के लिए ईसीबी ने श्रीलंका को न्यौता दिया और श्रीलंका ने निमंत्रण स्वीकार भी कर लिया.
लेकिन श्रीलंका के चोटी के खिलाड़ियों ने आईपीएल में व्यस्तता के चलते दौरे पर जाने में अपनी असमर्थता जता दी.
चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए आईसीसी समय निर्धारित नहीं कर पा रही है.
जब आईपीएल अधिकारियों ने श्रीलंका के खिलाड़ियों को अनुबंध से मुक्त करने से साफ़ इनकार कर दिया तो श्रीलंका बोर्ड के पास दौरा रद्द करने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया.
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि समस्या इंग्लैंड और श्रीलंका की है और वो विवाद में नहीं पड़ेगा. लेकिन श्रीलंका बोर्ड ने गुस्सा दिखाते हुए कहा कि इंग्लैंड दौरा रद्द होने से उन्हें आमदनी का जो नुक़सान हुआ है, उसकी भरपाई भारत को करनी चाहिए.
इग्लैंड ने भी अपने खिलाडियों को आईपीएल में हिस्सा लेने से मना कर दिया.
ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट को लेकर भारत और इंग्लैंड के बीच पहले से ही ठनी हुई है. पहला विवाद तब हुआ जब इंग्लैंड ने बाग़ी क़रार दिए गए इंडियन क्रिकेट लीग यानी आईसीएल में खेल रहे खिलाड़ियों पर काउंटी क्रिकेट खेलने पर पाबंदी लगाने से साफ़ इनकार कर दिया था.
नाराज़गी
दूसरी ओर, जब इंग्लैंड ने अपनी ट्वेंटी-ट्वेंटी लीग आयोजित करने का प्रस्ताव रखा तो भारत ने इसके लिए अपने खिलाडियों को इजाज़त नहीं दी.
इसके बाद इंग्लैंड ने ट्वेंटी-ट्वेंटी चैम्पियंस लीग में भागीदारी मांगी तो भारत ने कहा कि यह तभी मुमकिन होगा जब आईसीएल में भाग ले चुके खिलाड़ियों वाली कोई भी काउंटी इसका हिस्सा नहीं होगी. लेकिन यह संभव नहीं था क्योंकि 16 में से 14 काउंटी टीमों में आईसीएल के खिलाड़ी मौजूद हैं.
यह बात और है कि भारत को क़रारा जबाव देने की कोशिश में इंग्लैंड का स्टैनफोर्ड ट्वेंटी-ट्वेंटी में भाग लेना भी बहुत क़ामयाब नहीं रहा.
दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ियों ने आईपीएल में खेलने को प्राथमिकता दी है
इंग्लैंड और श्रीलंका के साथ साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकारी भी भारत से कम नाराज़ नहीं हैं.
पाकिस्तान की शिकायत है कि भारत ने आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी के आयोजन में उसका साथ देने के बजाय ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की सुरक्षा से उठी चिंता को हवा देकर प्रतियोगिता को खटाई में डाल दिया.
बांग्लादेश का कहना है कि उन्हें टेस्ट मैच खेलने वाले देश का दर्जा मिले आठ वर्ष हो चुके हैं और वह पाँच टेस्ट में भारत का सामना भी कर चुके हैं. इसके बावजूद भारत की धरती पर टेस्ट मैच खेलने का उन्हें निमंत्रण नहीं मिला है.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड को बांग्लादेश को बुलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि इस श्रृंखला में कोई कमाई या मुनाफ़ा होने की गुंजाइश नहीं है.
बिखरता गुट
कुछ वर्ष पहले भारत ने दक्षिण एशिया के चारों देशों की एकजुटता के दम पर आईसीसी को कई बार घुटने टेकने के लिए मजबूर किया था. लेकिन अब साफ़ दिखने लगा है कि ये गुट बिखर गया है.
इंद्रजीत सिंह बिंद्रा को आईसीसी का मुख्य कार्यकारी बनाने की नाक़ाम कोशिश भी इसी बात का नतीजा है.
अब वह समय आ गया है जब भारत की बात को नज़रअंदाज करने में आईसीसी को कोई हिचकिचाहट नहीं होती. तभी बिना सुनवाई के गौतम गंभीर की अपील ख़ारिज कर दी गई.
यह वही आईसीसी है जो कुछ वर्ष पहले सौरभ गांगुली का निलंबन समाप्त करने पर मजबूर हो गई थी.
भारत को सोचना यह है कि क्या वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग होकर रह सकता है. शायद नहीं. पर यदि भारत का रवैया नहीं बदला तो वह दिन दूर नहीं जब वह अपने आप को अकेला पाएगा. तब आईपीएल हो या आईसीएल, पैसे का बल कुछ नहीं कर पाएगा.
भारत में शुरू हुआ इंडियन प्रीमियर लीग़ (आईपीएल) इस बात का सूचक बन गया है कि पैसा ही खेल चलाता है. आख़िर आईपीएल के कारण ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी को अपनी प्रतियोगिता चैंपियंस ट्रॉफी के लिए समय मिल पाना मुश्किल हो गया है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ ने इसे वर्ष 2009 तक के लिए स्थगित कर तो दिया, लेकिन भारत की ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होने वाली एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला और ट्वेंटी-ट्वेंटी चैंपियंस लीग के कारण इस प्रतियोगिता के लिए तीन हफ़्ते का समय निकालना भी मुश्किल हो रहा है.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड और आईपीएल के प्रशासकों ने साफ़ कह दिया है कि यह परेशानी आईसीसी की है और वही इसका हल निकाले.
तनातनी
अभी यह बवाल शांत भी नहीं हुआ था कि आईपीएल पर इंग्लैंड और श्रीलंका के क्रिकेट अधिकारी भारत से भिड़ते नजर आ रहे हैं.
राजनीतिक कारणों से इंग्लैंड को जिम्बाब्वे टीम का दौरा रद्द करना पड़ा. अप्रैल-मई के खाली समय का सदुपयोग करने के लिए ईसीबी ने श्रीलंका को न्यौता दिया और श्रीलंका ने निमंत्रण स्वीकार भी कर लिया.
लेकिन श्रीलंका के चोटी के खिलाड़ियों ने आईपीएल में व्यस्तता के चलते दौरे पर जाने में अपनी असमर्थता जता दी.
चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए आईसीसी समय निर्धारित नहीं कर पा रही है.
जब आईपीएल अधिकारियों ने श्रीलंका के खिलाड़ियों को अनुबंध से मुक्त करने से साफ़ इनकार कर दिया तो श्रीलंका बोर्ड के पास दौरा रद्द करने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया.
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि समस्या इंग्लैंड और श्रीलंका की है और वो विवाद में नहीं पड़ेगा. लेकिन श्रीलंका बोर्ड ने गुस्सा दिखाते हुए कहा कि इंग्लैंड दौरा रद्द होने से उन्हें आमदनी का जो नुक़सान हुआ है, उसकी भरपाई भारत को करनी चाहिए.
इग्लैंड ने भी अपने खिलाडियों को आईपीएल में हिस्सा लेने से मना कर दिया.
ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट को लेकर भारत और इंग्लैंड के बीच पहले से ही ठनी हुई है. पहला विवाद तब हुआ जब इंग्लैंड ने बाग़ी क़रार दिए गए इंडियन क्रिकेट लीग यानी आईसीएल में खेल रहे खिलाड़ियों पर काउंटी क्रिकेट खेलने पर पाबंदी लगाने से साफ़ इनकार कर दिया था.
नाराज़गी
दूसरी ओर, जब इंग्लैंड ने अपनी ट्वेंटी-ट्वेंटी लीग आयोजित करने का प्रस्ताव रखा तो भारत ने इसके लिए अपने खिलाडियों को इजाज़त नहीं दी.
इसके बाद इंग्लैंड ने ट्वेंटी-ट्वेंटी चैम्पियंस लीग में भागीदारी मांगी तो भारत ने कहा कि यह तभी मुमकिन होगा जब आईसीएल में भाग ले चुके खिलाड़ियों वाली कोई भी काउंटी इसका हिस्सा नहीं होगी. लेकिन यह संभव नहीं था क्योंकि 16 में से 14 काउंटी टीमों में आईसीएल के खिलाड़ी मौजूद हैं.
यह बात और है कि भारत को क़रारा जबाव देने की कोशिश में इंग्लैंड का स्टैनफोर्ड ट्वेंटी-ट्वेंटी में भाग लेना भी बहुत क़ामयाब नहीं रहा.
दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ियों ने आईपीएल में खेलने को प्राथमिकता दी है
इंग्लैंड और श्रीलंका के साथ साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकारी भी भारत से कम नाराज़ नहीं हैं.
पाकिस्तान की शिकायत है कि भारत ने आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी के आयोजन में उसका साथ देने के बजाय ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की सुरक्षा से उठी चिंता को हवा देकर प्रतियोगिता को खटाई में डाल दिया.
बांग्लादेश का कहना है कि उन्हें टेस्ट मैच खेलने वाले देश का दर्जा मिले आठ वर्ष हो चुके हैं और वह पाँच टेस्ट में भारत का सामना भी कर चुके हैं. इसके बावजूद भारत की धरती पर टेस्ट मैच खेलने का उन्हें निमंत्रण नहीं मिला है.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड को बांग्लादेश को बुलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि इस श्रृंखला में कोई कमाई या मुनाफ़ा होने की गुंजाइश नहीं है.
बिखरता गुट
कुछ वर्ष पहले भारत ने दक्षिण एशिया के चारों देशों की एकजुटता के दम पर आईसीसी को कई बार घुटने टेकने के लिए मजबूर किया था. लेकिन अब साफ़ दिखने लगा है कि ये गुट बिखर गया है.
इंद्रजीत सिंह बिंद्रा को आईसीसी का मुख्य कार्यकारी बनाने की नाक़ाम कोशिश भी इसी बात का नतीजा है.
अब वह समय आ गया है जब भारत की बात को नज़रअंदाज करने में आईसीसी को कोई हिचकिचाहट नहीं होती. तभी बिना सुनवाई के गौतम गंभीर की अपील ख़ारिज कर दी गई.
यह वही आईसीसी है जो कुछ वर्ष पहले सौरभ गांगुली का निलंबन समाप्त करने पर मजबूर हो गई थी.
भारत को सोचना यह है कि क्या वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग होकर रह सकता है. शायद नहीं. पर यदि भारत का रवैया नहीं बदला तो वह दिन दूर नहीं जब वह अपने आप को अकेला पाएगा. तब आईपीएल हो या आईसीएल, पैसे का बल कुछ नहीं कर पाएगा.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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