कोहली-रोहित में कौन है गावस्कर और कौन है कपिल देव जैसा, रवि शास्त्री ने की दोनों की तुलना

नई दिल्लीः भारत के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी के अंदाज पर अपने नजरिए को पेश किया है। अब भारतीय क्रिकेट टीम में रेड बॉल कप्तान विराट कोहली हैं और सफेद गेंद फॉर्मेट में रोहित शर्मा कमान संभाल रहे हैं। राहुल द्रविड़ से पहले रवि शास्त्री ही टीम इंडिया के हेड कोच थे और उन्होंने तीनों फॉर्मेट में विराट कोहली के साथ काफी काम किया हुआ है। इसके अलावा 59 साल के रवि शास्त्री ने रोहित शर्मा की कप्तानी भी तब-तब देखी है जब-जब विराट कोहली चोटिल हुए और हिटमैन को कमान मिली।

कोहली हैं कपिल देव जैसे- रवि शास्त्री

कोहली हैं कपिल देव जैसे- रवि शास्त्री

रवि शास्त्री ने कोहली और रोहित की कप्तानी के अंदाज को भारत के महान खिलाड़ियों कपिल देव और सुनील गावस्कर के साथ कंपेयर किया है। रवि शास्त्री ने स्टार स्पोर्ट्स पर बात करते हुए बताया, "अगर आप कोहली और रोहित की कप्तानी को कंपेयर करते हैं तू कोहली मुझे कपिल देव और रोहित शर्मा सुनील गावस्कर की याद दिलाते हैं। विराट कोहली कपिल देव की तरह है और रोहित शर्मा गावस्कर की तरह।"

कोहली और शास्त्री ने तीनों फॉर्मेट में द्विपक्षीय श्रृंखलाओं में बहुत कामयाबी हासिल की जिसमें घरेलू धरती पर मिली जीत के साथ ओवरसीज जीत भी शामिल है। हालांकि इन दोनों की जुगलबंदी में भारत को आईसीसी टूर्नामेंट कभी हासिल नहीं हो सका। रवि शास्त्री कहते हैं कि विराट कोहली की और उनकी पर्सनैलिटी काफी हद तक एक है और दोनों को ही आक्रामक और निडर तरीके से क्रिकेट खेलना पसंद है।

'कोहली और मेरे व्यक्तित्व एक जैसे'

'कोहली और मेरे व्यक्तित्व एक जैसे'

इस बारे में बात करते हुए शास्त्री कहते हैं कि, दोनों के ही व्यक्तित्व के एक जैसा होना हमारी मदद कर गया। हम दोनों ही काफी आक्रमक हैं और दोनों ही जीतने के लिए खेलें। हमें यह पता चला कि आप को जीतने के लिए 20 विकेट लेने ही होते हैं तो आप निश्चित तौर पर ऐसे खिलाड़ियों को चुनना शुरू कर देते हैं जो इस काम में आपकी मदद करें लेकिन यह थोड़ा समय ले सकता है।

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'आक्रामक और फीयरलेस क्रिकेट ही मेरी पहचान होगी'

'आक्रामक और फीयरलेस क्रिकेट ही मेरी पहचान होगी'

शास्त्री कहते हैं कि जब आप तय कर लेते हैं कि आप आक्रामक और फीयरलेस क्रिकेट खेलेंगे तो इसका मतलब यह भी है कि आप कुछ मैच हार सकते हैं लेकिन एक बार जब आप सभी तरह के टीम संयोजन फिट कर लेते हैं तो वह टीम काफी घातक बन जाती है और मैंने यह शुरू में ही पहचान लिया था। वैसे रवि शास्त्री के कार्यकाल में भारत ने तीन आईसीसी टूर्नामेंट खेले और किसी को भी जीतने में कामयाबी हासिल नहीं की जबकि टीम इंडिया इन सभी प्रतियोगिताओं में जीत की दावेदार के तौर पर उतरी थी।

मेन इन ब्लू 2019 के वर्ल्ड कप से बाहर हो गए थे और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में भी तब हार गए जब वह अंक तालिका में नंबर एक पर बने हुए थे। भारत की सबसे खराब दुर्गति T20 वर्ल्ड कप में हुई जहां वह ग्रुप स्टेज से आगे भी नहीं बढ़ पाए।

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Story first published: Monday, December 27, 2021, 10:12 [IST]
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