कोहली तो अपनी बात कह चुके, शास्त्री ने कहा- अब गांगुली को भी अपनी बात कहनी होगी

नई दिल्लीः भारत के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने विराट कोहली और बीसीसीआई के बीच चल रहे मौजूदा कम्युनिकेशन पर बात की है। रवि शास्त्री का कहना है कि विराट कोहली अपने हिस्से की कहानी बता चुके हैं और अब बीसीसीआई के प्रेसिडेंट सौरव गांगुली को भी अपना पक्ष रखना होगा। रवि शास्त्री ने यह बात द इंडियन एक्सप्रेस ई अड्डा पर चर्चा के दौरान ये बात कहीं।

वे कहते हैं कि, मैं लंबे समय से इस सिस्टम का हिस्सा रहा हूं, मैं पिछले 7 साल से इस टीम का भी हिस्सा रहा हूं। अगर अच्छा कम्युनिकेशन होता तो यह मामला काफी बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता था। इसको पब्लिक में फैलाने की कोई जरूरत नहीं थी। विराट ने अपने हिस्से की कहानी बता दी है, अब बीसीसीआई अध्यक्ष को भी उनके हिस्से की कहानी बतानी होगी या फिर जो भी कुछ हुआ उसके बारे में स्पष्टीकरण देना होगा बस यही बात है।

सवाल यह है कि सच क्या है?

सवाल यह है कि सच क्या है?

शास्त्री का यह भी कहना है कि मामला यह नहीं है कि कोहली और गांगुली में कौन झूठ बोल रहा है। सवाल यह है कि सच क्या है? आप सच जानना चाहते हैं और यह केवल बातचीत से ही निकल कर सामने आता है।

शास्त्री कहते हैं कि एक व्यक्ति एक तरफ बैठकर कुछ और कहता है और दूसरा व्यक्ति दूसरी तरफ बैठकर कुछ और कहता है। ऐसे में कुछ बातें साफ होनी चाहिए और आपको दोनों ही पक्षों को जानना चाहिए ना की एकतरफा चीजे होनी चाहिए।

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यह सब शुरू कहां से हुआ और इसका अंत कहां पर हुआ-

यह सब शुरू कहां से हुआ और इसका अंत कहां पर हुआ-

दरअसल सौरव गांगुली ने कहा था कि उन्होंने विराट कोहली से व्यक्तिगत तौर पर अनुरोध किया था कि वह T20 कप्तानी ना छोड़े। लेकिन विराट कोहली ने इस बात से साफ इनकार किया था कि उनसे T20 कमान वापस लेने का अनुरोध किया था और विराट कोहली ने यह भी बताया कि वनडे कप्तानी उनसे तब छीनी गई जब दक्षिण अफ्रीका जाने वाली टेस्ट टीम का चयन होना था और उस सिलेक्शन से केवल 90 मिनट पहले ही पांचों चयनकर्ताओं के हवाले से लिया फैसला सुना दिया गया कि वे अब वनडे कप्तान नहीं है। इस मामले में सौरव गांगुली ने चुप्पी साधी हुई है और वे कहते हैं कि यह मामला बीसीसीआई का है और बीसीसीआई इसको सुलझा लेगा।

रवि शास्त्री का कहना है कि अब जब सब चीजें बाहर आ चुकी है तो लोगों को यह जानने का हक है कि यह सब शुरू कहां से हुआ और इसका अंत कहां पर हुआ। इसके बाद ही आप समझ पाएंगे कि कौन सही है कौन गलत।

गांगुली के साथ मतभेद पर कही ये बात-

गांगुली के साथ मतभेद पर कही ये बात-

इसके अलावा यह भी कोई छुपी हुई बात नहीं है कि गांगुली और शास्त्री के बीच में भी कुछ मतभेद रहे हैं। खासकर तब जब 2016 में अनिल कुंबले को भारत का का हेड को चुना गया था और शास्त्री को दरकिनार कर किया गया था। कुंबले को चुनने वाली कमेटी गांगुली की ही थी।

रवि शास्त्री इस मतभेद को बहुत हवा नहीं देते हैं और कहते हैं कि गांगुली गांगुली भी उनकी तरह क्रिकेटर है और दोनों के ही पास खेल को समझने का अपना नजरिया है। कई बार इन नजरियों में सहमति या असहमति हो सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसको मतभेद का नाम दिया जाए। सबके गेम को समझने को लेकर अपने पॉइंट ऑफ व्यू हो सकते हैं। आप अपना नजरिया पेश करने के लिए आजाद हैं और दूसरा व्यक्ति अपना नजरिया पेश करने के लिए आजाद है।

कोहली जैसा टेस्ट कप्तान दुनिया में कोई नहीं- शास्त्री

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रवि शास्त्री के दौरान यह भी कहते हैं कि बीती बातों का कोई भी प्रभाव उनके बाद के काम पर नहीं पड़ा है। शास्त्री मानते हैं कि जब विराट कोहली ने T20 कप्तानी से इस्तीफा दिया तो दो सफेद गेंद फॉर्मेट में केवल एक ही लीडर हो सकता था और वह रोहित शर्मा थे क्योंकि पहले से ही उनको T20 कप्तानी दे दी गई थी। इसके अलावा शास्त्री कहते हैं कि विराट कोहली को अभी टेस्ट कप्तानी बरकरार रखनी चाहिए। शास्त्री कहते हैं कि विराट कोहली जिस तरह से टेस्ट क्रिकेट के एंबेस्डर रहे हैं वैसा कोई भी नहीं है। मैं ऐसे किसी भी कप्तान को इस समय नहीं देखता जो इस जनून के साथ अपनी टीम को लीड कर सकता है।

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Story first published: Friday, December 24, 2021, 9:08 [IST]
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