जानिए उन कारणों को जिसके चलते वर्ल्ड कप टीम से बाहर रह गये युवराज
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप में अपने बलबुते भारत को चैंपियन बनाने वाले हरफनमौला क्रिकेटर युवराज सिंह को 2015 वर्ल्ड कप खेलने वाली टीम में जगह नहीं मिली है। यह खबर उनके फैन्स के लिए बेहद दुखद है। युवराज सिंह से देश को काफी उम्मीद रहती थी लेकिन चयकर्ताओं ने उन्हें नहीं चुना। हालांकि इसमें अचंभित होने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि वर्ल्ड कप के लिए चुने गये 30 खिलाडि़यों में भी उनका नाम शामिल नहीं था।
लेकिन पिछले दिनों घरेलू क्रिकेट में उनके लाजवाब प्रदर्शन के बाद उम्मीदें जग गई थीं। ऐसा लगने लगा था कि युवराज सिंह फार्म में वापस हो गई और शायद वर्ल्ड कप टीम में भी वापसी हो जाए। मगर ऐसा नहीं हुआ। इस बीच युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने कहा है कि युवराज को बहुत जल्द टीम इंडिया में लाकर रहूंगा।
आपको बता दें कि युवराज सिंह ने पिछले वर्ल्ड कप में भारत को जीताने में एक अहम भूमिका निभाई थी और मैन ऑफ द सीरिज चुने गये थे। और अंत में एक बात ये कि युवराज का इतिहास तो शानदार रहा है लेकिन टीम में चुनाव ना होने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब टीम को उनकी जरूरत नहीं है। खैर आईए उन वजहों पर चर्चा करते हैं जिस कारण इस शानदार और हरफनमौला खिलाड़ी को टीम में जगह नहीं मिली।
- युवराज कुछ साल पहले कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से जूझ कर लौटे हैं। उनकी फिटनेस भी पहले जैसी नहीं है और उनका वजन भी बढ़ा हुआ दिखता है। वजन शायद दवाईयों के असर से बढ़ गया हो लेकिन ऐसे में उनपर वर्ल्ड कप जैसा दांव खेलना जोखिम भरा हो सकता है।
- युवराज सिंह का पिछले दिनों वनडे क्रिकेट में प्रदर्शन भी खासा निराशाजनक रहा है। उन्होंने अपने अंतिम 20 मैचों में महज एक शतक और दो अर्धशतक लगाए थे। इससे लगता था कि उनका जादुई टच खत्म हो गया है।
- युवराज सिंह में पहले जैसी एकाग्रता भी नहीं रही है। मैदान में खेलने के दौरान उनका कांफिडेंस भी खत्म होता दिखता है। आपको बता दें कि पहले युवराज मैदान में खेल पर ध्यान केंद्रित रखते थे मगर अब उनमें ऐसा नहीं दिखता।
- पिछले वर्ल्ड कप में सिर्फ बल्ले से ही नहीं बल्कि अपनी गेंदबाजी के दम पर मैच निकालने वाले युवराज सिंह की गेंदबाजी में धार नहीं दिख रही थी। वो पहले जैसा गेंदबाजी भी नहीं कर पा रहे थे। हालांकि घरेलू क्रिकेट में उन्होंने सौराष्ट्र के विरुद्ध अच्छी गेदबाजी की है।
- युवराज कैंसर की घातक बीमारी से उबर गए हैं, लेकिन दुर्भागयवश उसका असर उन पर दिखता है। उनमें पहले जैसी फुर्ती नहीं दिखती है। उन्होंने जबरदस्त प्रैक्टिस करके अपनी सेहत और खेल दोनों में सुधार किया है लेकिन इसका बुरा असर दिख रहा है।
- रविंद्र जडेजा ने युवराज की जगह ले ली है। उन पर कप्तान धोनी का विश्वास है। धोनी की नजरों में जडेजा कहीं अच्छा कर सकते हैं। बीसीसीआई को भी जडेजा पर युवराज से कहीं ज्यादा विश्वास रहा। जडेजा लंबे अरसे तक खेल सकते हैं, जबकि युवराज का करियर समाप्ति की ओर है। जडेजा की उम्र कम है और वह लंबे समय तक टीम में बने रह सकते हैं।
- बीमारी के बाद वापसी कर रहे युवराज की तकनीक और रिफ्लेक्स में भी कमी आ गई है। वह उठती हुई तेज गेंदों के सामने पस्त होने लगते हैं और ऑस्ट्रेलिया में ऐसी ही गेंदें मिलेंगी क्योंकि वहां विकेटें उछाल भरी हैं।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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